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भारतीय सेना, इसके देशी और विदेशी भागीदारों और प्रतिद्वन्द्वियों की गरमा गरम खबरें।
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समुद्र में पहली बार उतरा नौसेना का सहायक पोत 'सूर्य', युद्धपोतों को देगा रसद
समुद्र में पहली बार उतरा नौसेना का सहायक पोत 'सूर्य', युद्धपोतों को देगा रसद
Sputnik भारत
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने 6 अक्टूबर को विशाखापट्टनम के हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में पहले फ्लीट सपोर्ट शिप(FSS-1) सूर्य का जलावतरण किया। रक्षामंत्रालय ने एक... 06.10.2026, Sputnik भारत
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रक्षामंत्री ने 300 टन भार क्षमता की क्रेन का भी उद्घाटन किया जिससे इस शिपयार्ड के लिए बड़े और ज्यादा जटिल पोत बनाना संभव हो पाएगा। समारोह में रक्षामंत्री ने भारत की बढ़ती हुई समुद्री शक्ति की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस पोत का जलावतरण उपलब्धि का प्रतीक है। इसके साथ ही शिपयार्ड के चौथे स्लिपवे के आधुनिकीकरण का काम भी पूरा हो गया है। अब यह प्लेटफॉर्म 45,000 टन वजन वाले बड़े युद्धपोतों को बनाने और समुद्र में उतारने के लिए पूरी तरह तैयार है।भारतीय नौसेना ने 2023 में 5 FSS के निर्माण के लिए हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के साथ 19000 करोड़ रुपए या लगभग 2 बिलियन डॉलर का सौदा किया था। सभी पोत करार पर हस्ताक्षर होने के 8 वर्ष में नौसेना को मिल जाएंगे। ये पोत भारतीय नौसेना के विभिन्न पोतों को समुद्र में ही ईंधन, रसद, गोलाबारूद सहित आवश्यक वस्तुओं को पहुंचाने के लिए बनाए जा रहे हैं। प्रत्येक पोत का भार 45000 टन और लंबाई 228.8 मीटर है। इनकी अधिकतम गति 20 समुद्री मील प्रति घंटे की है और ये एक बार में लगभग 22000 किमी की समुद्री यात्रा कर सकते हैं। यद्यपि इनका मुख्य कार्य अन्य पोतों को आवश्यक सामग्री पहुंचाना है, लेकिन इनको स्वयं की सुरक्षा की क्षमता भी प्रदान की गई है। इन पोतों में शत्रु के पोतों और सबमरीन दोनों से ही सुरक्षा के लिए अस्त्र लगाए गए हैं। इनमें एक-एक हेलीकॉप्टर भी तैनात किया जा सकता है।
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भारत सरकार, रक्षा मंत्रालय (mod), भारत के रक्षा मंत्री, भारतीय नौसेना, युद्धपोत
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समुद्र में पहली बार उतरा नौसेना का सहायक पोत 'सूर्य', युद्धपोतों को देगा रसद
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कृष्णमोहन मिश्रा
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने 6 अक्टूबर को विशाखापट्टनम के हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में पहले फ्लीट सपोर्ट शिप(FSS-1) सूर्य का जलावतरण किया। रक्षामंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी दी है कि इस कार्यक्रम में पांचवें फ्लीट सपोर्ट शिप(FSS-5) के निर्माण को कील डालकर प्रारंभ भी किया गया।
रक्षामंत्री ने 300 टन भार क्षमता की क्रेन का भी उद्घाटन किया जिससे इस शिपयार्ड के लिए बड़े और ज्यादा जटिल पोत बनाना संभव हो पाएगा। समारोह में रक्षामंत्री ने भारत की बढ़ती हुई समुद्री शक्ति की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस पोत का जलावतरण उपलब्धि का प्रतीक है।
"यह पोत हिंद महासगर में नौसेना की पहुंच, स्थायित्व और कार्यक्षमता को सुदृढ़ करेगा। नौसेना की सुदूर समुद्री क्षेत्रों में लंबे समय तक कार्रवाइयों में न केवल युद्धपोत की आवश्यकता होती है बल्कि सामग्री प्रबंधन, मरम्मत, अनवरत सहायता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इस तरह के पोत समुद्र में ही आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करके नौसैनिक कार्रवाइयों में सहायता करते हैं," उन्होंने कहा।
इसके साथ ही शिपयार्ड के चौथे स्लिपवे के आधुनिकीकरण का काम भी पूरा हो गया है। अब यह प्लेटफॉर्म 45,000 टन वजन वाले बड़े युद्धपोतों को बनाने और समुद्र में उतारने के लिए पूरी तरह तैयार है।
भारतीय नौसेना ने 2023 में 5 FSS के निर्माण के लिए हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के साथ 19000 करोड़ रुपए या लगभग 2 बिलियन डॉलर का सौदा किया था। सभी पोत करार पर हस्ताक्षर होने के 8 वर्ष में नौसेना को मिल जाएंगे।
ये पोत भारतीय नौसेना के विभिन्न पोतों को समुद्र में ही ईंधन, रसद, गोलाबारूद सहित आवश्यक वस्तुओं को पहुंचाने के लिए बनाए जा रहे हैं। प्रत्येक पोत का भार 45000 टन और लंबाई 228.8 मीटर है। इनकी अधिकतम गति 20 समुद्री मील प्रति घंटे की है और ये एक बार में लगभग 22000 किमी की समुद्री यात्रा कर सकते हैं।
यद्यपि इनका मुख्य कार्य अन्य पोतों को आवश्यक सामग्री पहुंचाना है, लेकिन इनको स्वयं की सुरक्षा की क्षमता भी प्रदान की गई है। इन पोतों में शत्रु के पोतों और सबमरीन दोनों से ही सुरक्षा के लिए अस्त्र लगाए गए हैं। इनमें एक-एक हेलीकॉप्टर भी तैनात किया जा सकता है।

23 सितंबर , 19:41