श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने सोमवार को केंद्र शासित प्रदेश को जल्द से जल्द पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित कर दिया। इस दौरान भाजपा विधायकों ने जोरदार विरोध किया और सदन से वॉकआउट किया।
यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पेश किया। विधानसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी भाजपा के विरोध के बावजूद प्रस्ताव पारित हो गया।
अगस्त 2019 में संसद द्वारा अनुच्छेद 370 को हटाए जाने और तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांटे जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश है।
भाजपा ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर के इसे सदन में पेश करने की अनुमति देने के तरीके पर सवाल उठाया। भाजपा विधायकों ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने नियमों में छूट देकर प्रस्ताव को सदन में चर्चा के लिए रखने की अनुमति दी।
सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा विधायक अपनी सीटों से खड़े हो गए और प्रस्ताव का विरोध करने लगे। विपक्षी पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर को पद से हटाने के लिए भी एक प्रस्ताव पेश किया। भाजपा ने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष ने नियमों का उल्लंघन करते हुए मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को पेश करने की अनुमति दी।
विधानसभा अध्यक्ष ने पद छोड़ने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने भाजपा की ओर से उन्हें अध्यक्ष पद से हटाने के लिए दिए गए नोटिस को अभी नहीं पढ़ा है। विधानसभा की प्रक्रिया के अनुसार इस नोटिस को 14 दिन बाद कार्यसूची में शामिल किया जाएगा।
विपक्ष के नेता सुनील शर्मा के नेतृत्व में भाजपा विधायक सदन के वेल में आ गए और विरोध शुरू कर दिया। भाजपा विधायकों के हंगामे के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला प्रस्ताव को पारित करने की मांग को लेकर अपना भाषण देते रहे। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने मार्शलों को कुछ विधायकों को सदन के वेल से बाहर निकालने का आदेश दिया।
आखिरकार विपक्षी भाजपा की गैरमौजूदगी में सदन ने प्रस्ताव पारित कर दिया। 90 सदस्यीय जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भाजपा के 29 विधायक हैं।
भाजपा ने राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाले इस प्रस्ताव को अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा बहाल करने की मांग से जुड़े पुराने प्रस्तावों के साथ जोड़ने पर आपत्ति जताई है।
राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव के पारित होने और इसे विवादित अनुच्छेद 370 तथा खत्म किए जा चुके जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे से जोड़ने के मुद्दे ने सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस और भाजपा को एक बार फिर सीधे राजनीतिक टकराव में ला दिया है।