हर माता-पिता का सपना होता है कि उनके बच्चे को अच्छे स्कूल में पढ़ने का मौका मिले लेकिन दिल्ली जैसे शहर में स्कूल में एडमिशन लेना कई परिवारों के लिए आसान नहीं होता. खासकर उन अभिभावकों के लिए, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं. ऐसे परिवारों के बच्चों के लिए दिल्ली में निजी स्कूलों की कुछ सीटों पर दाखिला कंप्यूटरीकृत लॉटरी यानी ड्रॉ ऑफ लॉट्स के जरिए दिया जाता है. लेकिन यहां जो बात समझना बहुत जरूरी है, वह ये है कि हर बच्चे को इसकी सुविधा नहीं मिलती है. दिल्ली शिक्षा निदेशालय की व्यवस्था के तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त स्कूलों में ईडब्ल्यूएस, डीजी और सीडब्ल्यूएसएन श्रेणी के बच्चों के लिए आरक्षित सीटों पर यह प्रक्रिया अपनाई जाती है.
किन कक्षाओं में लॉटरी से मिलता है दाखिला?
दाखिले की यह व्यवस्था स्कूल की शुरुआती यानी एंट्री-लेवल कक्षाओं के लिए होती है. इनमें मुख्य रूप से तीन स्तर शामिल हैं-
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यानी अगर आपका बच्चा इन कक्षाओं में दाखिले की उम्र और दूसरी पात्रता शर्तें पूरी करता है और वह संबंधित आरक्षित श्रेणी के तहत आता है, तो दाखिले के लिए कंप्यूटरीकृत ड्रॉ में उसका नाम शामिल हो सकता है.
किन स्कूलों में मिल सकता है मौका?
दिल्ली में बड़ी संख्या में निजी मान्यता प्राप्त स्कूल इस व्यवस्था के दायरे में आते हैं. उदाहरण के तौर पर दिल्ली शिक्षा निदेशालय की सूची में डीएवी पब्लिक स्कूल, वसंत कुंज, डीएवी पब्लिक स्कूल, पुष्पांजलि एन्क्लेव, डीएवी पब्लिक स्कूल, श्रेष्ठ विहार, जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल, सरिता विहार, डीप पब्लिक स्कूल, वसंत कुंज, आईटीबीपी पब्लिक स्कूल, द्वारका, ऋषभ पब्लिक स्कूल, मयूर विहार, ग्रीनवे मॉडर्न स्कूल, झिलमिल कॉलोनी, कैंटरबरी पब्लिक स्कूल, यमुना विहार, डायमंड पब्लिक स्कूल, चांद बाग, न्यू ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल, विवेक विहार और भारत शक्ति पब्लिक स्कूल, बुध विहार जैसे स्कूल शामिल हैं.
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी स्कूलों में हर साल हर कक्षा में सीट उपलब्ध होगी. सीटों की संख्या, संबंधित श्रेणी और उस साल की प्रवेश प्रक्रिया के आधार पर स्थिति बदल सकती है. इसलिए अभिभावकों को आवेदन करने से पहले शिक्षा निदेशालय की आधिकारिक सूची और संबंधित स्कूल की जानकारी जरूर देखनी चाहिए.
25 फीसदी सीटों का क्या है नियम?
शिक्षा के अधिकार यानी आरटीई के प्रावधानों के तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त स्कूलों में एंट्री-लेवल कक्षाओं में ईडब्ल्यूएस, डीजी और सीडब्ल्यूएसएन श्रेणी के बच्चों के लिए आरक्षित सीटों का प्रावधान है. इन्हीं सीटों पर दाखिले के लिए दिल्ली शिक्षा निदेशालय की ओर से कंप्यूटरीकृत ड्रॉ कराया जाता है.
क्या सामान्य श्रेणी के बच्चों का भी लॉटरी से एडमिशन होता है?
यहां भी अभिभावकों को अंतर समझना जरूरी है. ईडब्ल्यूएस, डीजी और सीडब्ल्यूएसएन सीटों के लिए होने वाला सरकारी कंप्यूटरीकृत ड्रॉ सामान्य श्रेणी के दाखिले से अलग है. सामान्य श्रेणी में स्कूल अपने तय नियमों और उपलब्ध सीटों के आधार पर दाखिला प्रक्रिया का आयोजन करते हैं. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि दिल्ली के सभी निजी स्कूलों में हर बच्चे का एडमिशन लॉटरी से होता है.
अभिभावक क्या ध्यान रखें?
अगर आप अपने बच्चे का दाखिला इन आरक्षित सीटों के तहत कराना चाहते हैं, तो केवल स्कूल का नाम देखकर आवेदन न करें. सबसे पहले यह जांचें कि बच्चा संबंधित श्रेणी और उम्र के नियमों को पूरा करता है या नहीं. इसके बाद उस वर्ष की आधिकारिक प्रवेश अधिसूचना, स्कूलों की सूची, उपलब्ध सीट और आवेदन की तारीख जरूर देखें.
आखिर में, लॉटरी की प्रक्रिया उन परिवारों के लिए उम्मीद का एक रास्ता है, जो अपने बच्चों को अच्छे निजी स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक कारणों से ऐसा कर पाना उनके लिए मुश्किल है. हालांकि, लॉटरी में नाम आना ही अंतिम दाखिला नहीं है. इसके बाद स्कूल में जरूरी डॉक्यूमेंट का वेरिफिकेशन और अन्य निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होती है.
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