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अब हर जिले में उतरेगा फूड रियलिटी मार्च: मिलावटखोरी के खिलाफ सख्त कानून और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग - Jhunjhunu News

September 26, 2026

बीकानेर से दिल्ली तक 700 किलोमीटर से अधिक की Food Reality March पदयात्रा पूरी करने के बाद अब अभियान को राजस्थान के हर जिले तक पहुंचाने की तैयारी है। इसके तहत प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक दिवसीय फूड रियलिटी मार्च निकाला जाएगा। इसकी शुरुआत झुंझुनूं स

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अभियान के संयोजक और मरुसेना फाउंडेशन के अध्यक्ष एडवोकेट जयन्त मूंड ने बताया कि 4 सितंबर को बीकानेर से शुरू हुई पदयात्रा 20 दिन चली। इस दौरान 700 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर दिल्ली के राजघाट पहुंचकर यात्रा का समापन किया गया।

जयन्त मूंड ने कहा कि यह पदयात्रा किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में नहीं थी। इसका उद्देश्य आम लोगों के सुरक्षित भोजन के अधिकार की आवाज उठाना है। उन्होंने कहा कि दूध, घी, पनीर, आटा, मसाले सहित रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों में मिलावट स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। उन्होंने कहा कि अब अभियान को राजस्थान के सभी जिलों तक ले जाया जाएगा। इसके बाद देश के दूसरे राज्यों में भी इस मुद्दे पर जनजागरण किया जाएगा।

फूड रियलिटी मार्च का पोस्टर दिखाते हुए

फूड रियलिटी मार्च का पोस्टर दिखाते हुए

खाद्य सुरक्षा विभाग को संसाधन देने की मांग

अभियान से जुड़े लोगों ने खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और संसाधनों की कमी पर भी सवाल उठाए। मांग की गई कि विभाग में योग्य और प्रशिक्षित अधिकारियों की नियुक्ति की जाए। खाद्य पदार्थों की जांच के लिए पर्याप्त वाहन, आधुनिक उपकरण और प्रयोगशालाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि मिलावट की शिकायतों पर समय पर कार्रवाई हो सके।

मूंड ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के कानूनी प्रावधानों को और सख्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जानबूझकर खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ कठोर सजा का प्रावधान होना चाहिए। गंभीर मामलों में मृत्युदंड का प्रावधान किए जाने की मांग भी अभियान की ओर से रखी गई।

हर जिले में मुफ्त खाद्य जांच लैब की मांग

अभियान की ओर से सरकार के सामने 12 सूत्रीय मांगें रखी गई हैं। इनमें प्रत्येक जिले में नि:शुल्क खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करना प्रमुख मांग है। इसके अलावा पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर हेल्थ स्टार रेटिंग लागू करने, खाद्य सामग्री पर जानकारी हिंदी में देने और कक्षा 1 से 12 तक विद्यार्थियों को ‘शुद्ध आहार’ के बारे में शिक्षा देने की मांग की गई है।

भ्रामक विज्ञापनों पर सख्त कार्रवाई, खाद्य पदार्थों में हानिकारक रसायनों के अनियंत्रित इस्तेमाल पर रोक, कृत्रिम रंग और फ्लेवर पर नियंत्रण तथा पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में चीनी की मात्रा कम करने की मांग भी शामिल है।

अभियान के संयोजक और मरुसेना फाउंडेशन के अध्यक्ष एडवोकेट जयन्त मूंड ने शनिवार को झुंझुनूं में प्रेस वार्ता में अभियान की संपूर्ण जानकारी दें

अभियान के संयोजक और मरुसेना फाउंडेशन के अध्यक्ष एडवोकेट जयन्त मूंड ने शनिवार को झुंझुनूं में प्रेस वार्ता में अभियान की संपूर्ण जानकारी दें

FSSAI से समय पर कार्रवाई की मांग

अभियान की ओर से भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से खाद्य सुरक्षा मानकों को प्रभावी तरीके से लागू कराने की मांग की गई। साथ ही जांच व्यवस्था में पारदर्शिता और मिलावट के मामलों में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही गई।

झुंझुनूं से शुरू होगा अगला चरण

जयन्त मूंड ने बताया कि राजस्थान में अभियान के अगले चरण की शुरुआत झुंझुनूं से होगी। यहां एक दिवसीय फूड रियलिटी मार्च के माध्यम से लोगों को मिलावट के नुकसान और सुरक्षित भोजन के अधिकार के बारे में जागरूक किया जाएगा। इसके बाद प्रदेश के अन्य जिलों में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

कानूनी लड़ाई के लिए लीगल सेल बनाया

अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए लीगल सेल का भी गठन किया गया है। यह सेल खाद्य सुरक्षा कानूनों, उनके क्रियान्वयन और उपभोक्ताओं के अधिकारों से जुड़े मामलों का अध्ययन करेगा। जरूरत पड़ने पर जनहित याचिका सहित अन्य कानूनी विकल्पों के जरिए मामले न्यायालय तक ले जाने की बात कही गई।

इस मौके पर श्रीगंगानगर के सहदेव कड़वासरा, फतेहपुर के राकेश ढाका, एडवोकेट सुनील सिहाग, एडवोकेट सुनील कुमार झाझोत, एडवोकेट नवीन रामकरण, एडवोकेट प्रदीप सिहाग और एडवोकेट वाहिद खान मौजूद रहे।