अगर आपकी कार कोई दोस्त, रिश्तेदार या पड़ोसी लेकर जाता है और उससे एक्सीडेंट हो जाता है, तो क्या पुलिस आपसे भी पूछताछ कर सकती है? क्या गाड़ी के मालिक पर भी केस दर्ज हो सकता है?
आमतौर पर दुर्घटना की आपराधिक जिम्मेदारी ड्राइवर की होती है. लेकिन कुछ परिस्थितियों में गाड़ी का मालिक भी कानूनी मुश्किल में फंस सकता है.
गुरुग्राम केस से समझिए पूरा मामला
13 सितंबर की सुबह गुरुग्राम की गोल्फ कोर्स रोड पर कल्याण बैंसला की कार से एक महिला बाइक राइडर सिया को टक्कर लगी थी. FIR में बैंसला के खिलाफ BNS की धारा 109 के तहत हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया.
खास बात यह थी कि कार बैंसला के नाम पर नहीं थी. कार का मालिक भारतीय सेना में कार्यरत मनीष बताया गया, जो उस समय असम में तैनात थे.
इसी मामले से सवाल उठता है कि अगर आपकी कार कोई दूसरा व्यक्ति चलाते हुए हादसा कर दे तो क्या मालिक भी जिम्मेदार होगा?
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क्या गाड़ी के मालिक को होगी जेल?
कानून के मुताबिक, दुर्घटना होने पर आपराधिक लापरवाही सीधे तौर पर उसकी होती है जो स्टीयरिंग व्हील पर था. यानी गलती पूरी तरह ड्राइवर की मानी जाएगी. पुलिस उस पर लापरवाही से गाड़ी चलाने या हत्या के प्रयास (109 BNS) की धारा लगा सकती है. राहत की बात यह है कि अगर ड्राइवर के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस है, तो कार मालिक को आमतौर पर जेल या आपराधिक सजा नहीं होती.
गाड़ी का मालिक कब फंस सकता है?
गाड़ी मालिक आसानी से नहीं बच सकता, अगर उसने लापरवाही से किसी को गाड़ी दी हो. मालिक पर भी केस दर्ज होगा अगर:
- बिना लाइसेंस: आपने ऐसे व्यक्ति को गाड़ी दी जिसके पास वैलिड ड्राइविंग लाइसेंस न हो.
- नशे में ड्राइविंग: गाड़ी मांगने वाला व्यक्ति शराब के नशे में हो.
- नाबालिग को गाड़ी देना: अगर ड्राइवर कोई नाबालिग है (जैसे पुणे पोर्श केस), तो उसके माता-पिता या गाड़ी मालिक को सीधे आरोपी बनाया जाएगा.
- कागजात अधूरे: गाड़ी का इंश्योरेंस या फिटनेस सर्टिफिकेट फेल हो.
इंश्योरेंस कंपनी कब खड़े कर देगी हाथ?
अगर गाड़ी का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस है और ड्राइवर के पास लाइसेंस था, तो कंपनी क्लेम देगी. लेकिन, अगर एक्सीडेंट करने वाला शख्स बिना लाइसेंस के था या नशे में था, तो बीमा कंपनी क्लेम रिजेक्ट कर सकती है. ऐसे में पीड़ित को मुआवजा देने का पूरा बोझ गाड़ी मालिक की जेब पर आएगा, जो एक बड़ा झटका हो सकता है.
गाड़ी की चाबी देने से पहले दो बार सोचें
भारत में मोटर वाहन अधिनियम के तहत गाड़ी मालिक 'Vicarious Liability' (परोक्ष दायित्व) के दायरे में आता है. नॉर्मल एक्सीडेंट में आप बच सकते हैं, लेकिन लापरवाही या नाबालिग के केस में आपको भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है. इसलिए अपनी गाड़ी की चाबी किसी को भी सौंपने से पहले एक बार जरूर सोच लें.
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