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गेयटी थिएटर में गूंजी हिंदी कविता की स्वर लहरियां

September 14, 2026

गेयटी थिएटर में गूंजी हिंदी कविता की स्वर लहरियां

September 14, 2026

गेयटी थिएटर में गूंजी हिंदी कविता की स्वर लहरियां

District-Level Poetry Meet Held in Shimla : शिमला। राजभाषा हिन्दी पखवाड़ा के समापन अवसर पर ऐतिहसिक गेयटी थिएटर के सम्मेलन कक्ष में जिला स्तरीय कवि सम्मेलन का आयोजन कराया। इसकी अध्यक्षता पूर्व प्रशानिक अधिकारी और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. देवेन्द्र गुप्ता ने की।

हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार, राजभाषा के प्रति जागरूकता तथा हिंदी साहित्य एवं कविता के माध्यम से जनमानस में हिंदी के प्रति प्रेम एवं सम्मान की भावना को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर साहित्यकार प्रोमिला भारद्वाज के “आस की उजास ” नामक कविता संग्रह का विमोचन किया गया । कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर “हिन्दी भाषा की प्रकृति पर बदलाव”नामक शीर्षक से शोध पत्र प्रस्तुत किया। इस अवसर पर जिला शिमला के विभिन्न क्षेत्रों से आमंत्रित कवि एवं कवयित्रयों रचनाओं के माध्यम से हिंदी भाषा की समृद्धता, भारतीय संस्कृति, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक सरोकारों तथा समसामयिक विषयों पर अपने व्यक्त किए।

इनमें वरिष्ठ कवि सुदर्शन वशिष्ठ ने शासकीय कार्यों की भाषा हिंदी विषय तथा पूजा करती महिलाएं विषय पर आधारित काव्य पाठ कर अपने विचार साँझा किए तथा कवि नारायण सिंह वर्मा ने पूछती हैं लाशें बेटियों की के माध्यम से सामाजिक चिंतन पर जोर दिया,डॉ. कौशल्या ठाकुर ने हिन्दी भाषा पर कविता प्रस्तुत की। पवन शर्मा ने नज़रंदाज शीर्षक से सामाजिक ताने बाने की बात की।

जया शर्मा ने मैं हिन्दी हूँ, के माध्यम से हिन्दी भाषा की महत्ता पर बल दिया ,उमा ठाकुर द्वारा “हिंदी है हम” शीर्षक रचना के माध्यम से हिंदी भाषा के प्रति गौरव की भावना व्यक्त की। कल्पना गांगटा ने हिन्दी की अस्मिता को बचाए रखने की बात कही, प्रोमीला भारद्वाज ने आस भरी उजास , इन्दु परिहार की रचना “मैं भारत माँ के मस्तक पर चमकती बिंदी हूँ, मैं हिंदी हूँ” हिंदी को भारतीय अस्मिता और गौरव के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करती है।डॉ० अनीता शर्मा ने कैसे कैसे लोग ,नरेंद्र कुमार शर्मा हिन्दी भाषा को संस्कारों, संस्कृति व सामाजिक सरोकारों से जुड़ी देशप्रेम की भाषा माना।

कंपीला शर्मा ने मेरी हिन्दी मेरा अभिमान, वंदना राणा हिन्दी राष्ट्रभाषा का गौरव हिन्दी, वसुंधरा धर्मानि ने नारी की खूबसूरती पर, ओम प्रकाश शर्मा ने रिश्तों की धूप छाँव पर सामाजिक बिखराव पर चिंता व्यक्त की। भाषा एवं संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, साहित्य और सामाजिक एकता की महत्वपूर्ण कड़ी है। कार्यक्रम के अध्यक्ष ने अपने अध्यक्षीय भाषण में राजभाषा हिन्दी के प्रति नई पीढ़ी में रुचि बढ़ाने तथा राजभाषा के प्रयोग को प्रोत्साहित करने में सहायता मिलती है।

कवि सम्मेलन के माध्यम से कवियों एवं लेखकों का उत्साहवर्धन होता है। इस अवसर पर भाषा एवं संस्कृति विभाग के सहायक निदेशक अनिल हारटा ,जिला भाषा अधिकारी शिमला सरोजना नरवाल, भारतेंदु भारद्वाज, समयन्तक भारद्वाज,,देवेन्द्र कुमार देव, शिवम ठाकुर सहित दर्जनों श्रोतागण उपस्थित रहे।