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उत्तराखंड में दूषित पानी से हाहाकार, उत्तरकाशी से नैनीताल तक अलर्ट पर मेडिकल टीमें - Doon Horizon

September 14, 2026

उत्तरकाशी के भंगेली गांव में जल जीवन मिशन की नई पाइपलाइन से जुड़े पानी के इस्तेमाल के बाद 20 से ज्यादा बच्चे व महिलाएं त्वचा संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। वहीं नैनीताल में भी स्वास्थ्य विभाग ने 338 लोगों की जांच की।

दून हॉराइज़न, उत्तरकाशी/देहरादून (14 सितंबर): उत्तरकाशी के सीमांत भटवाड़ी ब्लॉक अंतर्गत भंगेली गांव में जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) के तहत बिछाई गई नई पेयजल लाइन ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। नए स्रोत से पानी की आपूर्ति शुरू होते ही ग्रामीणों के चेहरे पर अचानक छोटे-छोटे दाने निकलने लगे, जो कुछ ही दिनों में गंभीर फोड़े-फुंसी में बदल गए।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस वक्त गांव में 20 से ज्यादा बच्चे और महिलाएं चेहरे पर तेज जलन, असहनीय खुजली, दर्द और तेज बुखार से बेहाल हैं।

नई पेयजल लाइन जोड़ते ही फूटा बीमारी का प्रकोप

भंगेली गांव में रविवार को ग्राम प्रधान संदीप की अध्यक्षता में ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समिति (Village Health, Sanitation and Nutrition Committee) की आपात बैठक बुलाई गई। ग्रामीणों ने एक सुर में कहा कि जब तक पुराने स्रोत से पानी आ रहा था तब तक कोई समस्या नहीं थी, लेकिन जल जीवन मिशन योजना के तहत जैसे ही बस्ती को नए प्राकृतिक स्रोत से जोड़ा गया, उसके कुछ ही रोज बाद चेहरे पर घाव बनने लगे।

इसके तुरंत बाद ग्राम प्रधान ने जिलाधिकारी उत्तरकाशी को औपचारिक पत्र भेजकर संबंधित पेयजल स्रोत के पानी की तत्काल प्रयोगशाला जांच कराने और जिम्मेदार महकमों से रिपोर्ट तलब करने की मांग उठाई।

मामले की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य महकमा हरकत में आया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. श्याम विजय के मुताबिक भटवाड़ी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से चिकित्सकों का एक दल तुरंत गांव भेजा गया। टीम ने घर-घर जाकर पीड़ितों की जांच की और जरूरी एंटीबायोटिक व एंटी-एलर्जिक दवाएं बांटीं। डॉक्टरों ने फिलहाल पूरे गांव को पानी अनिवार्य रूप से अच्छी तरह उबालकर ही पीने की सख्त ताकीद की है।

नैनीताल में भी अलर्ट, 338 ग्रामीणों की जांच और विशेषज्ञ ओपीडी

पहाड़ के दूसरे हिस्से नैनीताल में भी दूषित पानी से उपजने वाले जलजनित रोगों (Waterborne Diseases) की रोकथाम के लिए बड़े पैमाने पर फील्ड अभियान चलाया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत के निर्देश पर स्वास्थ्य कर्मियों ने विभिन्न इलाकों में शिविर लगाकर और बस्तियों में घर-घर पहुंचकर 338 लोगों की जांच की।

इस अभियान के तहत 269 व्यक्तियों का परीक्षण फील्ड स्तर पर हुआ, जबकि 69 मरीजों की जांच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) ज्योलीकोट में की गई। गंभीर लक्षणों वाले तीन मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और 45 संदिग्धों के ब्लड सैंपल प्रयोगशाला भेजे गए हैं।

विभाग ने सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए हरिनगर और सात नंबर क्षेत्र में 77 रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट किए, गनीमत रही कि सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई। साथ ही आड़ूखान और मनोरा आंगनबाड़ी केंद्रों में जागरूकता शिविर लगाकर लोगों को क्लोरीन की गोलियां, जिंक की खुराक और ओआरएस पैकेट बांटे गए।

ज्योलीकोट पीएचसी में निजी अस्पतालों के विशेषज्ञ चिकित्सकों—एमडी फिजीशियन डॉ. हिमांशु कुमार, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सिद्धांत मेहता और डॉ. सचिन चक्रवर्ती—ने मरीजों को परामर्श दिया। विभाग मरीजों की लगातार मानसिक व चिकित्सीय काउंसलिंग के लिए टेली-मानस और ई-संजीवनी नेटवर्क का भी सक्रिय सहारा ले रहा है।