59 साल के सोनम वांगचुक 17 दिन से भूख हड़ताल पर हैं। सिर्फ नमक का पानी ले रहे हैं। 8.5 किलो वजन गिर चुका है। उनके पीछे बैनर कॉकरोच जनता पार्टी का है, जिसकी मांग है- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा- सरकार बात
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कॉकरोच पार्टी के प्रोटेस्ट में सोनम वांगचुक क्यों जान दे रहे, क्या खुद अनशन तोड़ देंगे या सरकार जबरन तुड़वाएगी; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: सोनम वांगचुक CJP के प्रोटेस्ट में अनशन पर क्यों बैठे?
जवाब: कॉकरोच जनता पार्टी के मुखिया अभिजीत दीपके ने 6 जून को जंतर-मंतर पर पहली बार प्रोटेस्ट करने का ऐलान किया। 2 जून को X पर वीडियो जारी करके सोनम वांगचुक ने भी समर्थन दिया, 'मैं CJP के आंदोलन से जुड़ने आ रहा हूं। CJP वाले देशप्रेमी हैं, आपको भी उनके साथ जुड़ना चाहिए।’ 6 जून को कंधे पर एक झोला टांगे और हाथों में गुलाब लेकर जंतर-मंतर पहुंचे।
इस प्रोटेस्ट पर सरकार ने कोई बयान तक नहीं दिया। फिर 20 जून को CJP ने जंतर-मंतर पर दोबारा प्रोटेस्ट शुरू किया। सोनम ने भी केंद्र सरकार से 2 मांगें रखीं- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग।
सोनम ने कहा कि इन दोनों मांगों पर 27 जून तक सरकार के जवाब का इंतजार करेंगे। फिर अनशन शुरू करेंगे और अगर एक भी मांग पूरी हुई, तो अनशन वापस भी ले लेंगे।
सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं आया, तो रविवार, 28 जून को सोनम CJP के प्रोटेस्ट में शामिल हो गए। वामपंथी स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑल इंडियन स्टूडेंट्स एसोसिएशन, यानी AISA के 6 मेंबर्स के साथ भूख हड़ताल शुरू कर दी।
सोनम ने कहा, 'मैं मजबूर हूं, खुशी से यहां नहीं आया हूं। दोनों मुद्दों के समर्थन में अनशन पर बैठा हूं। लोग मुझसे पूछते हैं, 'आप लद्दाख में आंदोलन कर रहे थे, अब आप CJP के साथ क्यों हैं?' एजुकेशन, जो यहां का मुद्दा है, पिछले 40 सालों से मेरे दिल के बहुत करीब रहा है, जब मैं स्टूडेंट था तब से। जब कुछ युवा एजुकेशन सिस्टम की दिक्कतों पर आवाज उठा रहे हैं, तो मैं चुप कैसे रह सकता था?'

अभिजीत दीपके ने यह तस्वीर पोस्ट करते हुए बताया कि वांगचुक कह रहे हैं, ‘मुझे अनशन खत्म करने मत बोलो। सरकार से पूछे वो बात करने भी क्यों नहीं आ रहे।’
हालांकि 13 जून को सोनम ने पत्रकारों से कहा कि अभी वह शिक्षा के मुद्दे को लेकर जंतर-मंतर पर मौजूद हैं। लद्दाख के मुद्दे पर सरकार से बातचीत जारी है, कुछ सहमति भी बनी है, लेकिन जमीन पर उतरना बाकी है। सरकार चाहे तो मानसून सत्र में ही इसका समाधान कर सकती है।
सवाल-2: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मामले पर सरकार का क्या रुख है?
जवाब: CJP की मांग है कि धर्मेंद्र प्रधान तुरंत इस्तीफा दें। मई में NEET पेपर लीक के बाद एग्जाम रद्द करना पड़ा था। देश भर में 14 से ज्यादा NEET की तैयारी करने वाले बच्चों ने सुसाइड कर लिया। इसकी नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री को लेनी चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के आसार नहीं दिख रहे हैं…
- 23 जून को धर्मेंद्र प्रधान ने एक इंटरव्यू में CJP को दहशतगर्दों की B टीम बताया। उन्होंने कहा, ‘जिन्हें डेमोक्रेसी में रिजेक्ट कर दिया गया था, वे भेष बदलकर आए हैं और अब सिस्टम के पीछे पड़े हैं। वे उन लोगों के लिए नारे लगाते हैं, जो देश को बांटना चाहते हैं। उनकी पहचान हो गई है।’
- बीजेपी में मंत्रियों के इस्तीफा का रिवाज नहीं है। जब 2015 में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के इस्तीफे की मांग उठी थी, तब गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि मोदी सरकार में मंत्रियों के इस्तीफे नहीं होते। 2018 में #MeeToo विवाद के चलते विदेश राज्यमंत्री एम. जे. अकबर को छोड़ दें, तो 12 साल में मोदी सरकार के किसी और मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया है।
- पॉलिटिकल एनालिस्ट रशीद किदवई कहते हैं कि अगर सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा ले लिया, तो ये मैसेज जा सकता है कि उनसे गलती हुई है। मोदी सरकार में ऐसा होना मुश्किल है।
- सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर अभी तक बीजेपी के किसी नेता, मंत्री ने कोई बयान नहीं दिया है। अभिजीत दीपके ने खुद कहा है कि केंद्र सरकार में से कोई वांगचुक से मिलने नहीं आया। न ही बातचीत की कोई इच्छा जताई है।
हालांकि सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल होने वाला है। इसमें धर्मेंद्र प्रधान से शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी लेकर कोई और मंत्रालय या बीजेपी संगठन में कोई जिम्मेदारी दी जा सकती है।
सवाल-3: अगर सोनम ने अनशन नहीं तोड़ा, तो आगे क्या होगा?
जवाब: कोई व्यक्ति 3 मिनट बिना ऑक्सीजन, 3 दिन बिना पानी और 3 हफ्ते बिना खाए रह सकता है। इसे सर्वाइवल का ‘रूल ऑफ थ्री’ कहते हैं। हालांकि इंसान बिना खाने के कितने दिन जिंदा रह सकता है, ये शरीर की संरचना, अनशन के दौरान हाइड्रेशन और शारीरिक बीमारी जैसी चीजों पर निर्भर करता है।
डॉक्टर्स के मुताबिक कई लोग सिर्फ नमक वाला पानी पीकर ही 2 से 3 महीने तक जिंदा रह लेते हैं। जब भूख हड़ताल की वजह से व्यक्ति का वजन 10% से ज्यादा गिर जाता है, तो उसे डॉक्टर की निगरानी में रखने की सलाह दी जाती है।
आमतौर पर जब शरीर को खाना नहीं मिलता, तो ऊर्जा के लिए-
- पहले 24 घंटे में शरीर पहले से जमा ग्लूकोज खर्च करता है।
- दूसरे-तीसरे दिन से शरीर में जमी चर्बी को तोड़कर ऊर्जा लेता है। इससे वजन तेजी से कम होता है।
- जब चर्बी खत्म होने लगती है तो शरीर मांसपेशियों के प्रोटीन को तोड़ने लगता है।
दिल्ली के सी. के. बिरला हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के डॉ. अमित प्रकाश सिंह कहते हैं, ‘करीब दो हफ्ते के उपवास के बाद दिल, लिवर, किडनी जैसे अंग कमजोर पड़ने लगते हैं। यह जानलेवा हो सकता है।

सोनम वांगचुक अपने अनशन के दौरान सिर्फ पानी और नमक ले रहे हैं। 14 जुलाई को ब्लड प्रेशर 107/70 है, जो कि सामान्य से थोड़ा कम है। हालांकि ब्लड शुगर लेवल 67 है, जो 70 से 99 के बीच रहना चाहिए।
कई लोग सोनम से अनशन तोड़ने की अपील कर रहे हैं। सोनम इस पर राजी नहीं हैं। कह रहे हैं, ‘मैंने जो शुरू किया है, उसे उसके निष्कर्ष तक पहुंचाना होगा।
CJP ने 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के दिन ही जंतर-मंतर से संसद तक पैदल मार्च बुलाया है। सोनम ने लोगों से इसमें शामिल होने की अपील करते हुए कहा है, ‘मैं अपनी बची हुई ताकत के साथ इसमें शामिल रहूंगा। देश में आजादी से चलने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने का अधिकार है। इससे नहीं रोका जाना चाहिए।’
सीनियर पत्रकार अरुण दीक्षित कहते हैं, ‘अभी ऐसा नहीं लग रहा है कि सरकार सोनम की मांगों पर बहुत ध्यान देगी। हालांकि इस बीच अगर सोनम की तबीयत ज्यादा बिगड़ी, तो उनको उठाकर इलाज के लिए भेजा जा सकता है और अनशन तुड़वाया जा सकता है।’
जबरन अनशन तुड़वाने का सबसे चर्चित मामला मणिपुर की इरोम चानू शर्मिला का है। 4 नवंबर 2000 को उन्होंने सशस्त्र बलों को विशेष शक्तियां देने वाले कानून AFSPA हटानी की मांग पर भूख हड़ताल शुरू की। तीसरे दिन सरकार ने आत्महत्या के प्रयास के तहत केस दर्ज किया और गिरफ्तार कर लिया। उन्हें जबरन नाक में फीडिंग ट्यूब डालकर खाना देना शुरू कर दिया। 2016 तक इंफाल के सरकारी अस्पताल के एक कमरे को अस्थायी जेल बनाकर रखा गया, और उन्हें ट्यूब से जबरन फ्लूइड दिया जाता रहा। 9 अगस्त 2016 को इरोम ने खुद ही अपना अनशन खत्म कर दिया।
सवाल-4: क्या इससे पहले भी सोनम ने अनशन किए, तब सरकार का क्या रुख रहा?
जवाब: इससे पहले सोनम लद्दाख के मुद्दों को लेकर कई बार भूख हड़ताल और पैदल यात्राएं वगैरह कर चुके हैं। कभी सरकार के आश्वासन पर उन्होंने अनशन तोड़ा, तो कभी हिरासत में ले लिए गए..
- 26 जनवरी 2023 को सोनम ने लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग के लिए 18,000 फीट की ऊंचाई पर खारदुंगला दर्रे पर 5 दिन के लिए अनशन पर जाने की कोशिश की। यहां पर तापमान -40 डिग्री तक रहता है। हालांकि ऑफिसर्स ने उन्हें घर में नजरबंद कर दिया।
- 18 जून 2023 को वांगचुक ने लेह के NDS स्टेडियम में दोबारा अनशन शुरू किया और 26 जून को अनशन समाप्त किया।
- सितंबर 2024 में सोनम ने 130 लोगों के साथ लेह से दिल्ली तक करीब एक हजार किमी की 'दिल्ली चलो पदयात्रा' शुरू की। इस यात्रा में 130 लोग शामिल हुए थे। 30 सितंबर को दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। दिल्ली में कुछ विपक्षी नेताओं ने उनसे मुलाकात की।
- 5 अक्टूबर 2024 से सोनम ने दिल्ली के लद्दाख भवन में भूख हड़ताल शुरू की। इस दौरान, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) जैसे संगठनों ने उनका समर्थन किया। 21 अक्टूबर 2024 को गृह मंत्रालय ने दिसंबर में उनसे बातचीत का भरोसा दिया, इसके बाद उन्होंने अनशन तोड़ दिया।
- 10 सितंबर 2025 को सोनम और LAB के मेंबर्स ने 35 दिन की भूख हड़ताल शुरू की। 24 सितंबर को लेह में हिंसक प्रदर्शन भड़के। BJP कार्यालय जलाया गया, पुलिस फायरिंग में 4 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई।
- 25 सितंबर को वांगचुक को हिंसा भड़काने के आरोप में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार कर जोधपुर जेल भेजा दिया गया। 170 दिन बाद 14 मार्च 2026 को सोनम जेल से रिहा हुए।
सवाल-5: लद्दाख का मुद्दा क्या है, जिस पर सरकार से भिड़े हुए हैं सोनम?
जवाब: 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद लद्दाख को केंद्र-शासित प्रदेश (UT) बना दिया गया था। इससे जम्मू-कश्मीर विधान परिषद में लद्दाख का प्रतिनिधित्व लगभग खत्म हो गया और हिल डेवलपमेंट काउंसिल लेह और कारगिल (LAHDC) के जरिए लद्दाख का प्रशासनिक कामकाज शुरू हुआ।
UT बनने से पहले LAHDC के पास कैबिनेट के बराबर अधिकार थे, लेकिन UT बनने के बाद इनकी ताकत सिर्फ कागजी रह गई हैं। LAHDC के पास आर्थिक मामले देखने के भी अधिकार भी नहीं हैं।
लद्दाख के UT बनने के बाद से सोनम 4 मांगें कर रहे हैं…
- लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए।
- संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए।
- अलग लोक सेवा आयोग बनाया जाए, ताकि स्थानीय लोगों को सरकारी नौकरी मिले।
- राज्यसभा में एक सीट आवंटित हो और लोकसभा सीटों की संख्या एक से बढ़ाकर दो हों।
अगर ये मांगें मान ली जाएं, तो लद्दाख के जिलों में स्वायत्त जिला परिषदों का गठन हो सकेगा और जंगल, जमीन, पुलिसिंग, खेती आदि से जुड़े कानून बनाने का अधिकार स्थानीय लोगों को मिल जाएंगे। कई दौर की बैठकों के बावजूद अभी तक सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है।
हालांकि 13 जुलाई को लद्दाख के प्रमुख सचिव आशीष कुंद्रा ने कहा है कि सभी 7 जिलों में ऑटोनॉमस हिल डेवेलपमेंट काउंसिल, यानी AHDC बनेगी। इस बॉडी को संविधान के आर्टिकल-371 के खास ढांचे के तहत विधायी, वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार मिलेंगे।
ये केंद्र शासित प्रदेश और पूर्ण राज्य के बीच की व्यवस्था कही जा सकती है। आर्टिकल-371 के ही तहत महाराष्ट्र, गुजरात, मणिपुर जैसे 12 राज्यों को प्रशासन से जुड़े विशेष अधिकार मिले हुए हैं।
13 जुलाई को सोनम ने कहा कि बातचीत जारी है, लेकिन इसके जमीन पर उतरने का इंतजार है। उन्होंने ये उम्मीद भी जताई कि 20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र के दौरान इस पर कोई फैसला ले सकती है। सरकार चाहे, तो संसद से संविधान संशोधन विधेयक पास करवाकर लद्दाख में पूर्ण राज्य के प्रावधान लागू कर सकती है। हालांकि अभी सरकार की तरफ से कोई बयान नहीं आया है।
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