Uttarakhand Startups: उत्तराखंड में युवाओं के लिए नौकरी तलाशने के साथ-साथ अपना कारोबार शुरू करने के रास्ते भी तेजी से खुल रहे हैं. राज्य सरकार स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए ऐसी व्यवस्था तैयार कर रही है, जिसमें नए आइडिया पर काम करने वाले युवाओं को आर्थिक मदद, प्रशिक्षण और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. सरकार का जोर खास तौर पर ऐसे युवाओं को आगे लाने पर है, जो अपने नए विचारों को कारोबार में बदलना चाहते हैं.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं. इसका असर राज्य में स्टार्टअप की बढ़ती संख्या में भी दिखाई दे रहा है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2018 के अंत तक उत्तराखंड में करीब 100 स्टार्टअप थे. वहीं 2021 के अंत तक इनकी संख्या बढ़कर 500 से ज्यादा हो गई। सरकार अब इस क्षेत्र को और विस्तार देने की तैयारी में है.
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पांच साल में 1000 नए स्टार्टअप का लक्ष्य
राज्य सरकार की स्टार्टअप नीति-2023 के तहत अगले पांच वर्षों में 1000 नए स्टार्टअप तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही राज्य के हर जिले में कम से कम एक इनक्यूबेटर स्थापित करने की योजना है. इनक्यूबेटर ऐसे केंद्र होते हैं, जहां नए उद्यमियों को अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन, तकनीकी मदद और दूसरी जरूरी सुविधाएं मिलती हैं. सरकार की कोशिश है कि युवाओं को केवल स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रोत्साहित न किया जाए, बल्कि उन्हें शुरुआत से लेकर कारोबार को आगे बढ़ाने तक जरूरी सहायता भी मिले. इसके लिए इनोवेटर्स, इनक्यूबेटर्स, मेंटर्स और निवेशकों को एक साथ जोड़ने की व्यवस्था की गई है.
हर महीने 15 हजार रुपये तक की मदद
स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं के लिए आर्थिक सहायता भी नीति का अहम हिस्सा है. पंजीकृत स्टार्टअप को एक साल तक हर महीने 15 हजार रुपये का भत्ता देने का प्रावधान है. इससे शुरुआती दौर में कारोबार से जुड़े खर्चों को संभालने में युवाओं को मदद मिल सकती है. वहीं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग, ट्रांसजेंडर और जमीनी स्तर पर नए प्रयोग करने वाले स्टार्टअप को 20 हजार रुपये प्रति माह तक का भत्ता देने की व्यवस्था है. इसका उद्देश्य उन वर्गों के युवाओं को भी स्टार्टअप की दुनिया में आगे आने का मौका देना है, जिन्हें शुरुआती दौर में अतिरिक्त आर्थिक सहायता की जरूरत हो सकती है.
आइडिया को कारोबार में बदलने के लिए सीड फंडिंग
कई बार युवाओं के पास अच्छा बिजनेस आइडिया तो होता है, लेकिन उसे शुरू करने के लिए शुरुआती पूंजी नहीं होती. इसी समस्या को दूर करने के लिए स्टार्टअप नीति में सीड फंडिंग की व्यवस्था की गई है. पंजीकृत स्टार्टअप को 10 लाख रुपये तक की एकमुश्त सीड फंडिंग मिल सकती है. वहीं विशेष श्रेणी के स्टार्टअप के लिए यह सहायता 12.5 लाख रुपये तक है. इससे नए उद्यमियों को अपने आइडिया को जमीन पर उतारने, शुरुआती उत्पाद तैयार करने और कारोबार की शुरुआत करने में मदद मिल सकती है.
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पेटेंट और ट्रेडमार्क पर भी सरकार का साथ
नई तकनीक या नया उत्पाद तैयार करने वाले युवाओं के लिए पेटेंट और ट्रेडमार्क भी महत्वपूर्ण होते हैं. सरकार ने इस क्षेत्र में भी आर्थिक सहायता का प्रावधान किया है. राष्ट्रीय पेटेंट हासिल करने पर एक लाख रुपये तक और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के लिए पांच लाख रुपये तक की प्रतिपूर्ति की व्यवस्था है. इसके अलावा ट्रेडमार्क और औद्योगिक डिजाइन के आवेदन पर भी 10 हजार रुपये तक की सहायता दी जाएगी.
इनक्यूबेशन सेंटर को भी बढ़ावा
स्टार्टअप के लिए मजबूत माहौल तैयार करने के लिए सिर्फ युवाओं को आर्थिक सहायता देना ही पर्याप्त नहीं है. उन्हें सही मार्गदर्शन और काम करने की जगह भी चाहिए. इसी को ध्यान में रखते हुए नए इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने के लिए एक करोड़ रुपये तक की कैपिटल सब्सिडी का प्रावधान किया गया है. वहीं मौजूदा इनक्यूबेशन सेंटरों के विस्तार के लिए 50 लाख रुपये तक की सहायता दी जा सकती है.
कुल मिलाकर, उत्तराखंड सरकार की स्टार्टअप नीति युवाओं को नौकरी तलाशने के साथ-साथ रोजगार देने वाला बनने का मौका भी दे रही है. आर्थिक सहायता, सीड फंडिंग, पेटेंट सहयोग और इनक्यूबेशन सेंटर जैसी सुविधाओं से राज्य में नए बिजनेस आइडिया को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. पहाड़ी राज्य के युवाओं के लिए यह व्यवस्था स्थानीय स्तर पर कारोबार और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है.