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दिल टूटा तो जुड़ जाएगा, जिंदगी फिर ना मिलेगी दोबारा: एक्सपर्ट बोले- प्रेशर में जान दे रहे लोग, गोरखपुर में सुसाइड केस बढ़े - Gorakhpur News

September 10, 2026

दिल टूटा तो जुड़ जाएगा, जिंदगी फिर ना मिलेगी दोबारा:एक्सपर्ट बोले- प्रेशर में जान दे रहे लोग, गोरखपुर में सुसाइड केस बढ़े

गणेश पाण्डेय । गोरखपुर20 मिनट पहले

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‘दिल टूटा तो जुड़ जाएगा, जिंदगी फिर ना मिलेगी दोबारा ये बातें मदन मोहन मालवीय टेक्निकल यूनिवर्सिटी (MMMUT) में वर्ल्ड सुसाइड प्रीवेन्शन डे पर आयोजित कार्यक्रम में एक्सपर्ट ने कही हैं।’

10 सितंबर को MMMUT यूनिवर्सिटी में सुसाइड रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया था जिसमें दैनिक भास्कर बतौर मीडिया पार्टनर था। इस मौके साइकेट्रिस्ट स्पेशलिस्ट, विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और अधिक संख्या में स्टूडेंट्स शामिल हुए।

बढ़ते हुए प्रेशर और सुसाइड केस में हो रहे इजाफा को लेकर सभी ने अपना पक्ष रखा। WHO के अनुसार विश्व में हर 40 सेकंड में 1 सुसाइड के मामला सामने आ रहे हैं। वहीं भारत में हर 3 मिनट में 1 और गोरखपुर में 8-10 मामले हर महीने में देखने के लिए मिल रहे है।

इसी के बीच एक्सपर्ट ने बच्चों के साथ बातचीत भी की। उनको जागरूक किया। यह प्रोग्राम यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर एंड डिपार्टमेंट ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज ने आयोजित किया था।

देखिए 3 तस्वीरें

इस प्रोग्राम में दैनिक भास्कर रहा मीडिया पार्टनर

इस प्रोग्राम में दैनिक भास्कर रहा मीडिया पार्टनर

एक्सपर्ट्स में रखी अपनी राय

इस दौरान साइकेट्रिस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. शांतनु प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि- इस कार्यक्रम की वजह से लोगों में जागरूकता फैलेगी सुसाइड हमें नहीं करना चाहिए। इसके अलावा सुसाइड से संबंधित डर क्या होता है। उसपर भी चर्चा किया गया।

डॉक्टर ने बताया ABCD फॉर्मूला

डॉ. शांतनु ने मानसिक तनाव और व्यवहार में होने वाले बदलावों को समझने के लिए ABCD फॉर्मूला बताया। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के व्यवहार, काम करने के तरीके या नींद में लगातार बदलाव दिखाई दे रहा है, तो उस पर ध्यान देना जरूरी है।

A से एकेडमिक प्रेशर: अगर कोई बच्चा पढ़ाई में लगातार खराब प्रदर्शन कर रहा है या कोई व्यक्ति अपने काम पर ठीक से फोकस नहीं कर पा रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर ऐसी स्थिति लगातार बनी हुई है, तो व्यक्ति की परेशानी को समझने की कोशिश करनी चाहिए।

B से बिहेवियर: अगर किसी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बदलाव आ रहा है या वह लगातार परेशान नजर आ रहा है, तो परिवार और दोस्तों को इस पर ध्यान देना चाहिए। उसके साथ बातचीत कर उसकी परेशानी समझने की कोशिश करनी चाहिए।

C से कैरिड अवे: अगर कोई व्यक्ति किसी एक काम या जगह पर अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहा है, तो उसे भी खुद पर ध्यान देने की जरूरत है। बिना किसी नतीजे तक पहुंचे बार-बार काम को बीच में छोड़ देना भी चिंता का संकेत हो सकता है।

D से डिस्टर्बेंस ऑफ स्लीप: अगर किसी व्यक्ति की नींद के पैटर्न में बदलाव हो रहा है, यानी वह सामान्य से कम या ज्यादा सो रहा है, तो इसे भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नींद में लगातार बदलाव मानसिक तनाव का संकेत हो सकता है। ऐसे में व्यक्ति को अपनी स्थिति पर ध्यान देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए।

सुसाइड को लेकर छात्रों को बदलना होगा अपना नजरिया

क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट नीतीश मिश्रा ने कहा कि आज के दौर में छात्रों को आत्महत्या को लेकर अपना नजरिया बदलने की जरूरत है। अगर कोई छात्र किसी तरह की परेशानी से गुजर रहा है तो उसे अपने दोस्तों या परिवार से डरने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा कि कई बार लोग अपनी मानसिक परेशानी किसी को नहीं बता पाते और मदद लेने से भी बचते हैं। ऐसे में जरूरी है कि छात्र अपनी समस्या को अकेले झेलने के बजाय किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेने में भी किसी तरह की झिझक नहीं होनी चाहिए।

घर और दोस्तों में एक-दूसरे से जरूर पूछें- क्या आप ठीक हैं?

नीतीश मिश्रा ने लोगों से एक अहम अपील भी की। उन्होंने कहा कि सभी लोग अपने घर में और दोस्तों के बीच एक-दूसरे से जरूर पूछें कि क्या वे सच में ठीक हैं।

उन्होंने कहा कि हो सकता है कोई व्यक्ति अपनी परेशानी खुद से बताने की स्थिति में न हो। लेकिन जब कोई उससे प्यार और अपनापन दिखाते हुए पूछेगा कि वह कैसा महसूस कर रहा है, तो उसे अपनी बात बताने का मौका मिल सकता है। इससे उसके मन की बात सामने आ सकती है और समय रहते उसे जरूरी मदद मिल सकती है।

बच्चों में बढ़ रहा तनाव, इसी वजह से कराया गया कार्यक्रम

ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज के प्रोफेसर सुधीर नारायण सिंह ने बताया कि आज के समय में बच्चों और युवाओं में तनाव की समस्या बढ़ रही है। इसके साथ ही आत्महत्या के मामले भी चिंता का विषय हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए इस जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

उन्होंने कहा कि कार्यक्रम काफी सफल रहा। इसमें विशेषज्ञों ने छात्रों के सवालों के जवाब दिए और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी परेशानियों पर चर्चा की। कार्यक्रम में दैनिक भास्कर न्यूज एप मीडिया पार्टनर रहा।

सुधीर नारायण सिंह ने कहा कि छात्रों के लिए इस तरह के कार्यक्रम बेहद जरूरी हैं। भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि छात्र अपनी समस्याओं को समझ सकें और जरूरत पड़ने पर सही समय पर मदद ले सकें।

एक्सपर्ट की मदद लेने में न करें संकोच

विभाग के प्रोफेसर डॉ. मिलिंद राज आनंद ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान यह बात सामने आई कि जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियां आती हैं, जब हमें किसी विशेषज्ञ की मदद की जरूरत पड़ सकती है।

उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में साइकेट्रिस्ट विशेषज्ञ ने छात्रों को सही दिशा दिखाई। छात्रों को बताया गया कि मानसिक तनाव या आत्महत्या के विचार आने पर उन्हें क्या कदम उठाने चाहिए और किस तरह मदद ली जा सकती है।

डॉ. मिलिंद राज आनंद के मुताबिक, छात्रों के मन में कई तरह के सवाल थे। उन्होंने विशेषज्ञों से अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं और एक्सपर्ट्स ने उनके सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बताते हुए कहा कि छात्रों तक मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सही जानकारी पहुंचाना जरूरी है।

मदन मोहन मालवीय में पहली बार हुआ ऐसा कार्यक्रम

कार्यक्रम की कोऑर्डिनेटर आकृति पांडे ने बताया कि मदन मोहन मालवीय में इस तरह का यह पहला कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि छात्रों के बीच मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषय पर बातचीत होना जरूरी है।

उन्होंने कार्यक्रम को लेकर खुशी जताते हुए कहा कि आगे भी छात्रों के लिए इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य छात्रों को अपनी परेशानियों के बारे में खुलकर बात करने और जरूरत पड़ने पर सही मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करना है।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने छात्रों को यह संदेश दिया कि तनाव या मानसिक परेशानी को अकेले झेलने की जरूरत नहीं है। परिवार, दोस्तों और विशेषज्ञों से बात करके परेशानी का समाधान तलाशा जा सकता है। समय पर किसी से बात करना और मदद लेना बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।

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