Match Simulation Test : भारतीय क्रिकेट टीम दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में से एक हैं. भारत ने वनडे वर्ल्ड कप और टी20 वर्ल्ड कप में भी अपनी बादशाहत दिखाई है. भारत का घरेलू क्रिकेट भी काफी मजबूत है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) एक ही समय पर कई टीमें बना सकती है. ऐसा भारतीय क्रिकेट में कई दफा हुआ है, जब इंडियन क्रिकेट टीम एक ही समय में दो देशों के साथ सीरीज खेल रही होती है.
ऐसा ही इस बार एशियन गेम्स 2026 में होगा, जब भारतीय क्रिकेट टीम एशियन गेम्स में हिस्सा लेगी. उसी वक्त वो भारत में वेस्टइंडीज के साथ घरेलू क्रिकेट खेल रही होगी. इस स्थिति में भारतीय क्रिकेट टीम एक समय पर दो जगह पर मुकाबले खेल रही होगी. भारतीय क्रिकेट की बेंच स्ट्रेंथ इतनी मजबूत है कि, एक ही समय पर 2 से 3 टीमें बनाकर तैयार की जा सकती हैं. ये सभी टीमें मैन टीम की तरह पर प्रदर्शन कर सकती हैं.
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चोट बनती है खिलाड़ियों की राह में रोड़ा
आज भारतीय क्रिकेट में अनगिनत खिलाड़ी हैं, जो टीम इंडिया के लिए लगातार क्रिकेट के मैदान पर अपना दम दिखा रहे हैं. ये सभी खिलाड़ी लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं. पर इन खिलाड़ियों के लिए थोड़ी मुश्किल भी खड़ी हो जाती है, क्योंकि जब ये खिलाड़ी लगातार टीम इंडिया के लिए क्रिकेट खेलते हैं तो चोटिल भी होते हैं. चोट लगने के चलते इनके करियर पर ब्रेक लग जाता है. ऐसे में उन्हें रिकवरी में काफी समय लग जाता है.
भारत के चोटिल हुए खिलाड़ी लगातार दोबारा से फिट होने के लिए और मैच फिटनेस हासिल करने के लिए पसीना बहाते हैं. इंडियन क्रिकेट के सभी खिलाड़ी बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) में कड़ी मेहनत करने के बाद अपने आप को फिट करते हैं. ये खिलाड़ी पहले 100 प्रतिशत ठीक होने पर टीम के लिए खेल सकते थे. अब नए नियम और शर्तों के अनुसार खिलाड़ी को क्लियरेंस तभी मिलेगा, जब वो 200% फिट हो जाएगा.
COE में होती है प्लेयर की असली परीक्षा
सीओई में कड़ी मेहनत करने के साथ-साथ इन खिलाड़ियों को अपनी फिटनेस साबित करने के लिए कई टेस्ट देने पड़ते हैं. इनमें कई सारे टेस्ट शामिल हैं, जिनमें यो-यो टेस्ट, ब्रॉन्को टेस्ट समेत कई अन्य टेस्ट भी शामिल हैं. अब सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से फिटनेस क्लियरेंस मिलने के लिए इन खिलाड़ियों को एक और परीक्षा से गुजरना पड़ेगा. इसका नाम मैच सिमुलेशन टेस्ट (Match Simulation Test) है.
भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को भी टीम इंडिया में अफगानिस्तान के खिलाफ 13 सितंबर से शुरू होने वाली 3 मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले इस परीक्षा से गुजरना पड़ा था. बुमराह ने भी मैच सिमुलेशन टेस्ट पार किया. उनको 9 सितंबर को बेंगलुरु स्थिति सीओई में मैच सिमुलेशन टेस्ट से गुजरना पड़ा था.
🚨 UPDATE ON JASPRIT BUMRAH ⏳
- Bumrah is likely to undergo match simulation test today ahead of the Afghanistan T20I series. [Sports Today] pic.twitter.com/q4IPl8BLJj
— Johns. (@CricCrazyJohns) September 9, 2026
अब बुमराह इसे पार करके अफगानिस्तान सीरीज में जगह बना चुके हैं. ऐसे में आज हम आपको मैच सिमुलेशन टेस्ट (Match Simulation Test) के बारे में बताने वाले हैं. ये टेस्ट क्या होता है और कैसे काम करनता है. इसमें क्या-क्या होता है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
क्या होता है मैच सिमुलेशन टेस्ट?
मैच सिमुलेशन टेस्ट क्रिकेट के मैदान पर आने से पहले खिलाड़ियों के लिए एक टेस्ट होता है. ये बिल्कुल असल मैच की तरह होता है. इसमें खिलाड़ियों को अपनी फिटनेस का प्रमाण दिया जाता है. मैच सिमुलेशन टेस्ट क्रिकेट में किसी खिलाड़ी या पूरी टीम को असली मैच जैसी परिस्थितियों में अभ्यास कराने के लिए तैयार किया जाता है. इसमें खिलाड़ी सिर्फ नेट्स में गेंदबाजी या बल्लेबाजी नहीं करते बल्कि उनको मैच के दबाव और परिस्थितियों में खुद को तैयार करने का मौका असली मैच से पहले मिल जाता है.
Indian bowling Coach said "Gill is improving on Day by day basis. We will take a call on the morning of the test. He played well in the match simulation in the build up, so fingers crossed". [RevSportz] pic.twitter.com/7UVApnNtHw
— Johns. (@CricCrazyJohns) November 20, 2024
कैसे काम करता है मैच सिमुलेशन टेस्ट?
- इस मैच सिमुलेशन टेस्ट में 2 टीमें बनाई जाती हैं. इसमें एक टीम मुख्य खिलाड़ियों की और दूसरी टीम रिजर्व/स्थानीय खिलाड़ियों शामिल होते हैं.
- इसमें पूरा मैच या निर्धारित समय का खेल कराया जाता है. इससे खिलाड़ियों को टेस्ट होता है, ये सिमुलेशन टेस्ट 1 या 2 दिन चल सकता है.
- इस मैच सिमुलेशन टेस्ट का उद्देश्य खिलाड़ियों के लिए मैच जैसा माहौल बनाना होता है.
- इसमें बल्लेबाजों मैच जैसी परिस्थितियों में बल्लेबाजी करनी होती है. वहीं गेंदबाजों को स्पेल में गेंदबाजी कराई जाती है, ताकि उनका वर्कलोड देखा जा सके.
- इस मैच सिमुलेशन टेस्ट के दौरान पूरी तरह से मैच के जैसे खिलाड़ियों को फील्डिंग, रनिंग, विकेट के बीच दौड़ और कैचिंग भी करनी होती है.
- इसमें कोच और फिजियो देखते हैं कि खिलाड़ी थकान, दबाव और लंबे समय तक खेलने को कैसे संभाल रहा है. क्या वो वैसे ही खेल रहा है, जैसा मैच के दौरान खेलता है.
- इस मैच सिमुलेशन टेस्ट को खिलाड़ी के पूरा करने के बाद टीम मैनेजमेंट तय करता है कि, प्लेयर मैच खेलने के लिए फिट और तैयार है या नहीं.
— BCCI (@BCCI) July 26, 2026
क्यों लिया जा रहा है खिलाड़ियों का मैच सिमुलेशन टेस्ट?
भारतीय क्रिकेटर्स चोट के बाद फिट होकर टीम में वापसी करते हैं और वो मैच खेलने के बाद फिर से चोटिल हो जाते हैं. ऐसे कई उदाहरण हैं. जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा और वाशिंगटन सुंदर जैसे कई खिलाड़ी चोट के बाद टीम इंडिया में वापस आए और फिर से चोटिल हो गए. अब खिलाड़ी को 200 प्रतिशत फिट होना होगा, तब ही वो टीम में वापसी कर पाएगा. अब बीसीसीआई खिलाड़ियों की पूरी फिटनेस चैक करने के लिए उनका मैच सिमुलेशन टेस्ट ले रही है.
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