बार काउंसिल ऑफ इंडिया यानी BCI देश में वकालत के पेशे की सबसे अहम वैधानिक संस्थाओं में से एक है. हाल के NALSAR विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि BCI की ताकत कितनी है और उसकी सीमा कहां खत्म होती है. दरअसल, अगस्त 2026 में हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों का विवाद BCI तक पहुंचा. छात्रों के एक समूह ने CJI को लेकर अभियान चलाया था. इसके बाद 13 अगस्त को BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की ओर से ऐसे निर्देश जारी किए गए, जिनमें 2026 बैच के छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने और छात्रों-फैकल्टी के खिलाफ जांच की बात सामने आई. बाद में ये निर्देश वापस ले लिए गए.
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. 3 सितंबर 2026 को CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय बेंच ने कहा कि एडवोकेट्स एक्ट, 1961 BCI या स्टेट बार काउंसिल को लॉ छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का कोई स्पष्ट या निहित अधिकार नहीं देता. यह अधिकार छात्र के विश्वविद्यालय या संबंधित संस्थान के पास है. कोर्ट ने BCI के NALSAR संबंधी निर्देशों को कानून के विपरीत माना. कोर्ट ने कहा कि लॉ स्टूडेंट के वकील बनने से पहले उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार BCI या किसी स्टेट बार काउंसिल के पास नहीं है. यह अधिकार संबंधित विश्वविद्यालय या शिक्षण संस्थान का है. लेकिन सवाल यह है कि आखिर BCI के पास कौन-कौन सी शक्तियां हैं, इसमें सदस्य कैसे पहुंचते हैं और इसका चुनाव किस तरह होता है?
BCI के पास असल में कितनी ताकत है?
BCI की स्थापना एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 4 के तहत हुई है. कानून के मुताबिक इसमें हर स्टेट बार काउंसिल से एक सदस्य चुना जाता है. इसके अलावा, भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल भी इसके पदेन सदस्य होते हैं.

BCI का चुनाव कैसे होता है?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझनी जरूरी है. BCI का चुनाव सीधे देशभर के वकील नहीं करते. चुनाव की प्रक्रिया नीचे से ऊपर की ओर जाती है.
पहला स्तर: स्टेट बार काउंसिल
सबसे पहले राज्य स्तर पर स्टेट बार काउंसिल के सदस्य चुने जाते हैं. एडवोकेट्स एक्ट के तहत जिस स्टेट बार काउंसिल में वोटर्स यानी वकीलों की संख्या 5,000 तक है, वहां 15 सदस्य चुने जाते हैं. 5,000 से ज्यादा और 10,000 तक वोटर होने पर 20 सदस्य और 10,000 से ज्यादा होने पर 25 सदस्य चुने जाते हैं. चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व और सिंगल ट्रांसफेरेबल वोट (STV) सिस्टम से होता है.
यानी वोटर सिर्फ एक उम्मीदवार को चुनने तक सीमित नहीं होता. वह अपनी पसंद का क्रम भी बता सकता है. कानून में यह भी प्रावधान है कि लगभग आधे निर्वाचित सदस्य ऐसे होने चाहिए, जिन्हें राज्य की सूची में वकील के रूप में कम से कम 10 साल का अनुभव हो.
दूसरा स्तर: स्टेट बार काउंसिल से BCI
जब स्टेट बार काउंसिल बन जाती है तो उसके सदस्य अपने बीच से एक सदस्य को BCI के लिए चुनते हैं. यानी आम वकील सीधे BCI चेयरमैन को वोट नहीं देता. पहले वह स्टेट बार काउंसिल के प्रतिनिधियों को चुनता है और फिर स्टेट बार काउंसिल का चुना हुआ सदस्य BCI में जाता है.
तीसरा स्तर: BCI चेयरमैन का चुनाव
BCI में पहुंचने के बाद चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का चुनाव BCI के सदस्य अपने बीच से करते हैं. यह पद सीधे देश के वकीलों द्वारा नहीं चुना जाता.
BCI की ताकत पर सुप्रीम कोर्ट की दूसरी बड़ी टिप्पणी
NALSAR मामला अकेला नहीं है. 2 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि वे नई BCI के चुनाव तक नी अस्थायी चेयरमैन की भूमिका में रहेंगे. नई स्टेट बार काउंसिल को अपने पदाधिकारियों और BCI प्रतिनिधि का चुनाव करना है.
कोर्ट ने नई स्टेट बार काउंसिलों को निर्देश दिया है कि उनकी नई टीम की घोषणा होने के बाद तीन हफ्ते के अंदर चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, दूसरे पदाधिकारियों और BCI के प्रतिनिधि का चुनाव कर लिया जाए. कोर्ट ने यह भी कहा है कि BCI के बड़े नीतिगत फैसलों में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को भी शामिल किया जाए. इससे साफ है कि BCI एक ताकतवर संस्था है, लेकिन उसकी शक्तियां कानून और चुनावी प्रक्रिया की सीमा में हैं.
NALSAR मामले से यह साफ हुआ कि BCI को वकीलों और कानूनी शिक्षा से जुड़े मामलों को नियंत्रित करने की बड़ी जिम्मेदारी मिली है. लेकिन लॉ कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों पर सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार BCI के पास नहीं है. छात्र के अनुशासन का फैसला उसका विश्वविद्यालय या संस्थान करेगा. वहीं, जब कोई व्यक्ति वकील बन जाता है, तब उसके पेशेवर आचरण पर BCI और स्टेट बार काउंसिल की भूमिका होती है.
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शुभेंदु प्रताप भूमंडल
पत्रकारिता में बीते 5 साल से सक्रिय हैं. नेशनल और इंटरनेशनल न्यूज राइटिंग का अनुभव. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से साइंस में ग्रेजुएशन, फिर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता और वीडियो प्रोडक्शन की पढ़ाई. दैनिक भास्कर डिजिटल से करियर की शुरुआत. बतौर न्यूज ब्रीफ एडिटर भास्कर डिजिटल में 800 से ज्यादा बाइलाइन स्टोरी. वीडियो स्क्रिप्टिंग का भी अनुभव. अगस्त 2025 से टीवी9 डिजिटल के साथ नई पारी का आगाज.
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