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कोरोना, यूक्रेन युद्ध और टैरिफ का झटका: फिर भी भारत की अर्थव्यवस्था रही मजबूत; सीतारमण ने बताया कैसे बचा देश

August 30, 2026

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी मजबूत बना रहा। सरकार ने विदेशों में हो रहे बदलावों पर लगातार नजर रखी। साथ ही देश की अपनी जरूरतों को भी ध्यान में रखा गया। इसका असर यह हुआ कि भारतीय किसानों, परिवारों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को बड़ा झटका नहीं लगा।



शिकागो में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि कई देशों की आर्थिक गणनाएं इन परिस्थितियों में बिगड़ गईं। भारत की भी अपनी सीमाएं थीं। इसके बावजूद देश ने मुश्किल दौर में अपने नागरिकों को सुरक्षित रखने में कामयाबी हासिल की।

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कोरोना के बाद भी 7% से ज्यादा विकास: सीतारमण


वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद भारत ने लगातार 7% से ज्यादा आर्थिक विकास बनाए रखा है। इस साल भी विकास दर इसी दायरे में रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि आसान नहीं थी। इस दौरान दुनिया ने कोरोना महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता और ईरान-अमेरिका संघर्ष जैसे संकट देखे।

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वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि भारत ने वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखने के साथ घरेलू जरूरतों को भी समझा। इसी संतुलन ने देश को अनिश्चित माहौल से निकलने में मदद की। उन्होंने इसे भारत की आर्थिक मजबूती की बड़ी वजह बताया।



2030 तक कर्ज घटाने का लक्ष्य


भारत की केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण ने सरकार की राजकोषीय नीति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि सरकार ने 2030 तक उधारी को जीडीपी के 50% के स्तर तक लाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए वह इसी दिशा में काम करेंगी। उन्होंने कहा कि राजकोषीय घाटे को लेकर भी भारत ने अनुशासन का रास्ता अपनाया है। 2025-26 तक पहुंचने वाला तय लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। सीतारमण ने तुलना करते हुए कहा कि कुछ विकसित देशों का कर्ज अब भी उनकी जीडीपी के 200% से ज्यादा है।



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भारत की क्रेडिट रेटिंग में सुधार: वित्त मंत्री


वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की क्रेडिट रेटिंग में सुधार हो रहा है। यह सुधार सामाजिक कल्याण के लिए जरूरी संसाधनों को रोककर नहीं हुआ। बल्कि अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रबंधन से यह संभव हुआ है।



उन्होंने विकसित भारत के 2047 के लक्ष्य का भी जिक्र किया। सीतारमण ने कहा कि अब करीब 20 साल ही बचे हैं। इसलिए सुधारों की गति और स्तर को बनाए रखने के लिए ज्यादा सहयोग चाहिए। उन्होंने प्रतिभाशाली और अनुभवी लोगों से नए विचार देने की अपील की। साथ ही देश की आकांक्षाएं पूरी करने के लिए पूंजी की जरूरत पर जोर दिया। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर उन्होंने कहा कि अंतिम बातचीत चल रही है।