महंगाई कितनी है, खाने की इन चीजों के बढ़ गए दाम; प्याज के रेट सुनकर डर जाएंगे
Aug 27, 2026 06:08 am ISTहिन्दुस्तान टीम, नई दिल्ली, विशेष संवाददाता

रक्षाबंधन के त्योहार से पहले ही चीनी के बढ़े हुए दाम का सामना कर रही आम जनता के सामने और भी चुनौतियां हैं। ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि देश में और भी कई खाद्य सामग्रियां हैं, जिनके रेट तेजी से बढ़े हैं। RBI की रिपोर्ट में इनकी जानकारी मिलती है।

भारत में प्याज ही नहीं है, जिसके दामों में इजाफा हुआ है। RBI की रिपोर्ट में महंगी हुई सामग्रियों की लिस्ट है। (ANI Photo)
देश में महंगाई का दबाव केवल चीनी तक सीमित नहीं है। अगस्त में कई प्रमुख खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अगस्त की मासिक रिपोर्ट के अनुसार, प्याज की कीमतों में सबसे ज्यादा 11 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा चावल, गेहूं, दालों और खाद्य तेलों के दाम भी बढ़े हैं।
आरबीआई ने 1 से 21 अगस्त के दौरान औसत कीमतों की तुलना जुलाई की समान अवधि से की है। इसके मुताबिक, मौसम के असर और पश्चिम एशिया संघर्ष से आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई, जिससे खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर व्यापक दबाव बना हुआ है। प्याज और चीनी की कीमतें लगातार बढ़ रही है। चीनी के दाम हर रोज बदल रहे हैं। देश के कई हिस्सों में चीनी की कीमतें 70 रुपये से अधिक पहुंच गई है।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, सब्जियों में प्याज की कीमतें सबसे अधिक तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई हैं। वहीं, अगस्त में चावल की कीमत 2.1 फीसदी बढ़ी। इसी तरह अनाज, दालों की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली। गेहूं के दाम में 0.6 फीसदी की वृद्धि हुई। दालों में चना दाल एक फीसदी, अरहर दाल 0.5 फीसदी और मूंग दाल 0.4 फीसदी महंगी हुई। खाद्य तेलों के दाम भी बढ़े। आरबीआई के अनुसार, सरसों तेल 1.6 फीसदी, मूंगफली तेल 1 फीसदी, सूरजमुखी तेल 0.9 फीसदी और पाम तेल 0.9 फीसदी महंगा हुआ। हालांकि, इस अवधि में आलू की कीमतों में थोड़ी नरमी दर्ज की गई है।
दुनिया में बढ़ते संघर्ष से खाद्य आपूर्ति पर खतरा
दुनिया में बढ़ते सशस्त्र संघर्षों के बीच संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने सुरक्षा परिषद की ‘फूड अंडर फायर’ चर्चा में कहा कि युद्ध और संघर्ष अब केवल प्रभावित देशों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि इनका असर वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर भी पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि युद्ध, प्रतिबंध और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में रुकावट से खाद्य पदार्थों, ईंधन और उर्वरकों की कीमतें बढ़ती हैं तथा उनकी उपलब्धता घटती है। उन्होंने होर्मुज जलमार्ग का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां से दुनिया की करीब पांचवें हिस्से की तेल आपूर्ति और वैश्विक उर्वरक व्यापार का लगभग एक-तिहाई गुजरता है।
ऊर्जा कीमतों का दबाव
आरबीआई ने कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। ईंधन और कच्चे माल की लागत बढ़ने से परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ गई है, जिसका असर अंतिम उत्पादों की कीमतों पर साफ तौर पर पड़ा है।