भारत में हमेशा देखा जाता है कि जब कोई अपराध होता है तो स्वतंत्र गवाहों की पर्याप्त संख्या होने के बाद भी ज्यादातर लोग गवाही नहीं देते। कुछ लोग अपराधी के डर के कारण गवाही नहीं देते लेकिन ज्यादातर लोग गवाही की लंबी प्रक्रिया के कारण, गवाही देने से मना कर देते हैं, लेकिन अब चिंता की बात नहीं है, क्योंकि गवाही देने के लिए ना तो कोर्ट जाना पड़ेगा और ना ही अपना पूरा दिन खराब करना होगा। आप ऑनलाइन भी बयान दे सकते हैं।
कोर्ट में ऑनलाइन गढ़ी का प्रावधान किस कानून की कौन सी धारा में है
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 530 के तहत न्यायालय की कार्यवाहियों को इलेक्ट्रॉनिक पद्धति में करने का प्रावधान किया गया है। इस धारा के तहत कुछ ऐसा किया गया है जो क्रांतिकारी है और भविष्य में भारतीय न्याय व्यवस्था को काफी मजबूत कर सकता है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 530 के माध्यम से भारतीय कोर्ट को पूरी तरह से डिजिटल और आधुनिक बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसका सबसे बड़ा फायदा गवाहों को मिलने वाला है। कैसे, मैं समझाता हूं:-
क्या गवाह को ऑनलाइन समन भेजा जा सकता है?
यदि आप किसी मामले में गवाह हैं तो समन के साथ आपका तनाव शुरू हो जाता है। कोर्ट द्वारा समन जारी किया जाता है फिर एक सिपाही मोहल्ले में आपका पता पूछते हुए आपके घर तक आता है। सबको पता चल जाता है कि पुलिस आपके घर आई है। सिपाही तो समन देकर चला जाता है लेकिन सबको यह समझना मुश्किल हो जाता है कि आप भारत की न्याय व्यवस्था में मदद कर रहे हैं। यह एक सम्मानजनक काम है। लोग शक करते हैं पता नहीं क्या हुआ होगा? आपके पास कोई जवाब नहीं होता, क्योंकि कई लोग सवाल ही नहीं करते, बस शक करते हैं। अब ऐसा नहीं होगा, क्योंकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 530 के तहत न्यायालय आपको व्हाट्सएप पर डायरेक्ट समन भेज देगा। पुलिस का झंझट ही खत्म।
क्या कोर्ट में ऑनलाइन गवाही दी जा सकती है?
सिर्फ इतना ही नहीं है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 530 में यह प्रावधान भी किया गया है कि, गवाही के लिए कोर्ट में उपस्थित होना अनिवार्य नहीं है, वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से भी गवाही दी जा सकती है। मतलब आप कोर्ट में गवाही के लिए आपका दिन खराब नहीं होगा। आपको सुबह 10:00 बजे दुकान या ऑफिस की जगह कोर्ट नहीं जाना पड़ेगा। किसी को बताना नहीं पड़ेगा कि आज आपकी कोर्ट में गवाही है। आप अपनी दुकान या ऑफिस में रहते हुए भी गवाही दे सकते हैं।
अपनी सुविधा को सुनिश्चित करने के लिए, जब पुलिस इन्वेस्टिगेशन के दौरान आप अपना बयान दर्ज करवाएं तो वहां स्पष्ट रूप स लिखवाएं कि, भारतीय न्याय संहिता की धारा 530 के तहत मुझे मेरे व्हाट्सएप नंबर पर समन भेजा जाए एवं इसी धारा के तहत में ऑनलाइन गवाही दूंगा। न्यायालय में गवाही के लिए उपस्थित नहीं हो सकूंगा।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 530 में ऑनलाइन गवाही का प्रावधान, आने वाले दिनों में भारत की पूरी न्याय व्यवस्था को बदल देगा, क्योंकि अब ऐसे लोग जो पुलिस और कोर्ट की झंझट से बचने के लिए गवाही देने से कतराते थे, ऑनलाइन गवाही देने लगेंगे। इसके कारण भारत की न्याय व्यवस्था मजबूत होगी क्योंकि किसी भी मामले में न्याय स्थापित करने के लिए स्वतंत्र गवाही बहुत जरूरी होती है।
भारतीय न्याय व्यवस्था की धारा 530 के तहत क्या-क्या ऑनलाइन कर सकते हैं
- समन और वारंट को जारी करना, उनकी तामीली (Service) और निष्पादन इलेक्ट्रॉनिक रूप से किया जा सकता है।
- शिकायतकर्ता और गवाहों के बयानों को ऑनलाइन माध्यम से दर्ज किया जा सकता है।
- जांच और विचारण के दौरान साक्ष्यों को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड किया जा सकता है।
- सभी अपीलीय कार्यवाहियां और अन्य कानूनी कार्यवाहियां भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से संचालित की जा सकती हैं।
लेखक: उपदेश अवस्थी (लीगल एडवाइजर एवं पत्रकार)।
