प्रज्ञा मिश्रा का शक सही निकला! बहन की हत्या के वक्त जीजा मानस अकेले नहीं था, पुलिस के हाथ लगे सबूत
Published: Monday, August 24, 2026, 11:25 [IST]
Lucknow Divya Mishra Death: लखनऊ में ICICI बैंक की अधिकारी दिव्या मिश्रा और उनकी बहन के पति मानस की मौत के मामले में जांच अब नया मोड़ लेती दिख रही है। पुलिस को मानस की कॉल डिटेल से कुछ ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे शक गहरा गया है कि दिव्या की हत्या में मानस अकेला नहीं था। जांच में एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका सामने आई है, जिसने दिव्या के बैंक पहुंचने की जानकारी मानस तक पहुंचाई थी।
यूट्यूबर प्रज्ञा मिश्रा ने शुरुआत में ही सवाल उठाया था कि मानस वाजपेयी अकेले इतनी तेजी से वारदात को अंजाम देकर कैसे भाग सकता था। खासकर इसलिए क्योंकि उसे कार चलाना नहीं आता था। अब कॉल डिटेल में सामने आए संपर्कों ने पुलिस के इस एंगल को भी गंभीर बना दिया है।
मानस को किसने दी थी दिव्या के बैंक पहुंचने की खबर?
पुलिस की जांच में सामने आया है कि मानस ने वारदात से करीब 24 घंटे पहले 20 से ज्यादा लोगों से फोन पर बातचीत की थी। इनमें कुछ लोग उसके जानने वाले और कामकाज से जुड़े थे। वहीं कुछ नंबर पुलिस को संदिग्ध लगे हैं।
जांच का सबसे अहम हिस्सा वह कॉल है, जिसके जरिए मानस को दिव्या के बैंक पहुंचने की जानकारी मिलने का शक है। पुलिस के मुताबिक, दिव्या के बैंक पहुंचते ही मानस भी ऑटो से वहां पहुंच गया। यानी उसे दिव्या की लोकेशन और टाइमिंग की जानकारी पहले से मिलने की आशंका है। यही कड़ी पुलिस को इस सवाल तक ले जा रही है कि क्या किसी ने मानस को सिर्फ सूचना दी थी या पूरी वारदात की तैयारी में भी उसकी मदद की थी।
प्रज्ञा मिश्रा ने पहले ही उठाया था सवाल
प्रज्ञा मिश्रा ने घटना के बाद इस बात पर सवाल उठाया था कि मानस कार चलाना नहीं जानता था। फिर वह दिनदहाड़े दिव्या पर हमला करने के बाद इतनी आसानी से ऑटो से कैसे निकल गया और अपने घर तक कैसे पहुंचा।
प्रज्ञा ने यह भी आशंका जताई थी कि मानस को कोई और मदद कर रहा हो सकता है। उनका शक था कि ऐसा कोई व्यक्ति हो सकता है जिसे पूरे परिवार के खत्म होने से फायदा मिलता। अब मानस की कॉल डिटेल में मिले नंबरों ने इसी संभावना को जांच का अहम हिस्सा बना दिया है। हालांकि पुलिस ने अभी यह साफ नहीं किया है कि संदिग्ध व्यक्ति कौन है और उसकी भूमिका क्या थी।
मानस के बैंक में होगी पूछताछ, खुल सकता है बड़ा राज
पुलिस अब मानस के कार्यस्थल पर भी जांच आगे बढ़ाएगी। सोमवार को टीम जानकीपुरम स्थित बैंक पहुंचेगी। वहां मानस के साथ काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी। पुलिस यह जानने की कोशिश करेगी कि वारदात से दो से चार दिन पहले मानस का व्यवहार कैसा था। वह बैंक में किन लोगों से मिलता था।
उससे मिलने कौन-कौन लोग आते थे। उसके किन लोगों से नियमित संपर्क थे। क्या किसी व्यक्ति की गतिविधि हाल के दिनों में संदिग्ध लगी थी। मानस की कॉल डिटेल में मिले सामान्य और संदिग्ध दोनों तरह के नंबरों को अलग-अलग देखा जा रहा है। संदिग्ध नंबरों से जुड़े लोगों से पूछताछ की तैयारी भी पुलिस कर रही है।
पिस्टल किसने दी? पुलिस की नजर में कई लोग
जांच का दूसरा बड़ा सिरा असलहा है। पुलिस को शक है कि जिस पिस्टल से दिव्या और फिर मानस की मौत हुई, वह उसे किसी ने उपलब्ध कराई थी। गोमतीनगर पुलिस ने हथियार मुहैया कराने वाले कुछ लोगों को अपनी रडार पर लिया है। उनकी तलाश में पुलिस की चार टीमें पड़ोसी जिलों के साथ दूसरे राज्यों में भी दबिश दे रही हैं।
पुलिस का दावा है कि हथियार अरेंज कराने वाले व्यक्ति तक जल्द पहुंचने की कोशिश की जा रही है। अगर यह कड़ी जुड़ती है तो मानस को हथियार कैसे मिला और वारदात की तैयारी कब शुरू हुई, इसका जवाब मिल सकता है।
बैंक के बाहर 12:19 बजे क्या हुआ था?
दिव्या मिश्रा मिठाई वाला चौराहे के पास स्थित आईसीआईसीआई बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर के पद पर काम करती थीं। घटना वाले दिन वह सुबह बैंक पहुंची थीं। इसके बाद वह एक सहकर्मी के साथ विजिट पर बाहर गई थीं।
20 अगस्त दोपहर करीब 12:19 बजे दिव्या बैंक के गेट पर वापस पहुंचीं। पुलिस की जांच के मुताबिक, इसी समय मानस को उनके बैंक पहुंचने की जानकारी मिली। वह तुरंत ऑटो से बैंक की तरफ निकल गया। दिव्या जैसे ही बैंक के अंदर जाने लगीं, मानस ने पीछे से उन्हें पकड़ लिया।
आरोप है कि उसने पहले उनके साथ मारपीट की। फिर पिस्टल की बट से सिर पर वार किया। इसके बाद बेहद करीब से गोली मार दी। हमले के बाद मानस ऑटो से वहां से निकल गया। वह अपने घर पहुंचा और उसी हथियार से अपनी बहन की हत्या कर दी। इसके बाद उसने खुद को भी गोली मार ली।