ताइपे(उत्तम हिन्दू न्यूज)-: बालों का झड़ना और गंजापन दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोगों के लिए चिंता का विषय है। अब ताइवान की नेशनल ताइवान यूनिवर्सिटी (NTU) के वैज्ञानिकों की एक रिसर्च ने इस दिशा में नई उम्मीद जगाई है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि त्वचा के नीचे मौजूद फैट सेल्स से निकलने वाले कुछ खास फैटी एसिड बालों की जड़ों में मौजूद निष्क्रिय स्टेम सेल्स को सक्रिय कर सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने इन निष्कर्षों के आधार पर मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड से तैयार एक टॉपिकल फॉर्मूलेशन का परीक्षण किया। प्रयोगों में ओलिक एसिड और पामिटोलिक एसिड जैसे फैटी एसिड का इस्तेमाल किया गया। टीम के अनुसार, चूहों पर किए गए प्रयोग में करीब 20 दिनों के भीतर बालों की ग्रोथ दिखाई गई। यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल Cell Metabolism में प्रकाशित हुआ है।
कैसे काम करता है यह तरीका?
वैज्ञानिकों ने पाया कि त्वचा में चोट या सूजन होने पर इम्यून सेल्स और त्वचा के नीचे मौजूद फैट सेल्स के बीच एक खास प्रक्रिया शुरू होती है। इसके बाद फैट सेल्स मुक्त फैटी एसिड छोड़ते हैं। ये फैटी एसिड बालों के फॉलिकल में मौजूद स्टेम सेल्स तक पहुंचकर उन्हें सक्रिय करने में मदद करते हैं।
शोध के अनुसार, ये मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड बालों की जड़ों में ऊर्जा से जुड़ी प्रक्रियाओं को बढ़ावा देते हैं। इससे निष्क्रिय हेयर फॉलिकल स्टेम सेल्स ग्रोथ फेज में प्रवेश कर सकते हैं और नए बालों के विकास की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
चूहों पर प्रयोग में क्या मिला?
शोधकर्ताओं ने ऐसे चूहों पर प्रयोग किया जिनके हेयर फॉलिकल स्टेम सेल्स निष्क्रिय अवस्था में थे। अलग-अलग फैटी एसिड के स्थानीय इस्तेमाल के बाद बालों की ग्रोथ को करीब 20 दिनों तक देखा गया।
रिसर्च में पाया गया कि ओलिक एसिड और पामिटोलिक एसिड जैसे मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड बालों के फॉलिकल स्टेम सेल्स को सक्रिय करने में सक्षम थे। वैज्ञानिकों ने बताया कि स्थानीय रूप से इन फैटी एसिड का इस्तेमाल करने से बालों की ग्रोथ को बढ़ावा मिला।
मामूली चोट से बाल उगने के संकेत से शुरू हुई रिसर्च
इस शोध की शुरुआत वैज्ञानिकों के एक दिलचस्प अवलोकन से हुई। टीम ने देखा कि त्वचा पर हल्की चोट या सूजन के बाद कुछ परिस्थितियों में उस हिस्से में बालों की ग्रोथ बढ़ सकती है।
इसके बाद वैज्ञानिकों ने यह समझने की कोशिश की कि ऐसा क्यों होता है। शोध में उन्हें इम्यून सेल्स, फैट सेल्स और हेयर फॉलिकल स्टेम सेल्स के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध मिला। वैज्ञानिकों ने पाया कि त्वचा में होने वाली प्रक्रिया फैट सेल्स को ऐसे फैटी एसिड रिलीज करने के लिए प्रेरित कर सकती है, जो बालों के स्टेम सेल्स को सक्रिय करते हैं।
क्या इंसानों में भी उगेंगे बाल?
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि अभी इस रिसर्च को इंसानों में गंजेपन का साबित इलाज नहीं माना जा सकता। वर्तमान अध्ययन के प्रमुख परिणाम पशु प्रयोगों से आए हैं। हालांकि, शोधकर्ताओं ने मानव हेयर फॉलिकल्स से जुड़े शुरुआती प्रयोगों में भी सकारात्मक संकेत मिलने की जानकारी दी है।
नेशनल ताइवान यूनिवर्सिटी के अनुसार, शोध टीम ने इस फॉर्मूलेशन से जुड़ी पेटेंट प्रक्रिया भी शुरू की है और आगे इसे मानव उपयोग के लिए विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
अभी इलाज के तौर पर इस्तेमाल करना जल्दबाजी
वैज्ञानिकों की यह खोज निश्चित रूप से बाल झड़ने की समस्या से परेशान लोगों के लिए उम्मीद बढ़ाने वाली है, लेकिन इसे अभी बाजार में उपलब्ध पक्के इलाज के विकल्प के रूप में देखना सही नहीं होगा। इंसानों में इसकी प्रभावशीलता, सही खुराक और सुरक्षा को बड़े स्तर के क्लिनिकल ट्रायल में जांचना जरूरी है।
फिलहाल रिसर्च से इतना जरूर सामने आया है कि त्वचा के फैट सेल्स से निकलने वाले मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड हेयर फॉलिकल स्टेम सेल्स को सक्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अगर आगे मानव परीक्षणों में भी इसके सुरक्षित और प्रभावी परिणाम मिलते हैं, तो भविष्य में यह बाल झड़ने के इलाज के लिए एक नया रास्ता खोल सकता है।
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