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Hargaon Assembly Caste Equations हरगाँव विधानसभा के जातिगत समीकरण 2027

August 19, 2026

Hargaon Assembly Caste Equations की सबसे मजबूत धुरी दलित मतदाता हैं, क्योंकि सीतापुर जिले की हरगाँव विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है। पुराने चुनावी आकलनों में पासी मतदाताओं को यहां सबसे बड़ा जातीय समूह माना गया है। इनके बाद कुर्मी, चमार-जाटव, ब्राह्मण, मुस्लिम और ठाकुर मतदाता चुनावी संतुलन को प्रभावित करते हैं। 2026 की अंतिम SIR मतदाता सूची के अनुसार हरगाँव विधानसभा में 2,85,675 मतदाता दर्ज हैं। इनमें 1,57,782 पुरुष, 1,27,881 महिला और 12 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं। सीतापुर जिले की नौ विधानसभा सीटों में मतदाताओं की संख्या के हिसाब से हरगाँव सबसे छोटी सीट है।

उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के जातिगत समीकरण / जातीय समीकरण और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर चुनावी परिणाम काफी हद तक निर्भर करता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों की मानें तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 एक ऐसा निर्णायक अवसर है जो राज्य की दीर्घकालिक राजनीतिक दिशा को स्पष्ट करेगा।

हरगाँव विधानसभा का क्रमांक 147 है। यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और धौरहरा लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा खंडों में शामिल है। मौजूदा विधायक भाजपा के सुरेश राही हैं, जिन्होंने 2017 और 2022 में लगातार दो चुनाव जीते। उत्तर प्रदेश विधानसभा की मौजूदा सदस्य सूची भी सुरेश राही को हरगाँव से भाजपा विधायक के रूप में दर्ज करती है।

उत्तर प्रदेश एसआईआर (SIR) की अंतिम सूची 2026 के तहत राज्य के सभी 75 जिलों में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया गया, जिसके परिणामस्वरूप कुल मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है।

सीतापुर जिले के हरगाँव विधानसभा के 2007  से 2022 तक का तुलनात्मक विश्लेषण, ताज़ा अपडेट, चुनावी इतिहास और पिछले चुनावों के नतीजे

उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के पिछले चुनावी नतीजों का 2007 से 2022 तक तुलनात्मक विश्लेषण, जिसमें प्रत्येक सीट का चुनावी इतिहास, विजेता और उपविजेता प्रत्याशी, मत प्रतिशत, जीत का अंतर और बदलते राजनीतिक समीकरण शामिल हैं।

हरगाँव विधानसभा एक नजर में

विवरणजानकारी
विधानसभाहरगाँव
विधानसभा संख्या147
जिलासीतापुर
लोकसभा क्षेत्रधौरहरा
आरक्षणअनुसूचित जाति
वर्तमान विधायकसुरेश राही
पार्टीभारतीय जनता पार्टी
विधायक का सामाजिक आधारपासी समाज से जुड़ा नेतृत्व
2026 कुल मतदाता2,85,675
पुरुष मतदाता1,57,782
महिला मतदाता1,27,881
ट्रांसजेंडर मतदाता12
SIR में मतदाताओं की कमीकरीब 39.18 हजार
कमी का प्रतिशतकरीब 12.06%
2022 विजेतासुरेश राही, BJP
2022 उपविजेतारामहेत भारती, SP
2022 जीत का अंतर38,160 वोट
2024 लोकसभा में हरगाँव खंडSP +1,930 वोट
प्रमुख सामाजिक समूहपासी, कुर्मी, चमार-जाटव, ब्राह्मण, मुस्लिम, ठाकुर, यादव

2026 के अंतिम पुनरीक्षण के बाद हरगाँव का मतदाता आधार 2.86 लाख से भी कम रह गया है। राज्यव्यापी विधानसभा-वार SIR आंकड़ों में हरगाँव में पुराने आधार के मुकाबले करीब 12.06 प्रतिशत मतदाता कम होने का संकेत है।

Hargaon Assembly Caste Equations को समझने की शुरुआत पासी मतदाताओं से होती है। 2022 से पहले के एक पुराने चुनावी आकलन में हरगाँव में लगभग 90 हजार पासी मतदाता बताए गए थे। इसके बाद करीब 40 हजार कुर्मी, 35 हजार चमार, 30 हजार ब्राह्मण, 26 हजार मुस्लिम, 15 हजार ठाकुर और करीब 9 हजार यादव मतदाताओं का अनुमान लगाया गया था।

यह संख्या वर्तमान 2026 की जाति-वार मतदाता सूची नहीं है। SIR के बाद विधानसभा का कुल मतदाता आधार ही बदलकर 2,85,675 हो चुका है। निर्वाचन प्रक्रिया में जाति के आधार पर वर्तमान मतदाताओं की आधिकारिक अलग-अलग संख्या प्रकाशित नहीं होती। इसलिए इन पुराने आंकड़ों को केवल सीट की सामाजिक संरचना और विभिन्न समुदायों के तुलनात्मक प्रभाव को समझने के संकेत के रूप में देखना चाहिए।

हरगाँव विधानसभा का पुराना संकेतात्मक जातीय समीकरण

जाति/समुदायपुराना अनुमानचुनावी महत्व
पासीकरीब 90 हजारसीट की सबसे मजबूत सामाजिक धुरी
कुर्मीकरीब 40 हजारसबसे महत्वपूर्ण OBC समूहों में
चमार/जाटवकरीब 35 हजारBSP, BJP और SP तीनों के लिए महत्वपूर्ण दलित वोट
ब्राह्मणकरीब 30 हजारसवर्ण वोट की प्रमुख धुरी
मुस्लिमकरीब 26 हजारविपक्षी सामाजिक समीकरण में महत्वपूर्ण
ठाकुरकरीब 15 हजारसवर्ण आधार में असर
यादवकरीब 9 हजारSP के परंपरागत आधार का हिस्सा
अन्यकरीब 36 हजारछोटे OBC, सवर्ण और अन्य समूह
2026 के कुल मतदाता2,85,675वर्तमान अंतिम मतदाता आधार

जाति-वार आंकड़े पुराने चुनावी अनुमान हैं और इन्हें 2026 की आधिकारिक संख्या नहीं माना जाना चाहिए। खास तौर पर SIR के बाद लगभग 12 प्रतिशत मतदाता आधार बदलने के कारण पुराने अनुमान को सीधे 2027 के वोट में बदलना उचित नहीं होगा।

हरगाँव वोटर लिस्ट 2026: अब सिर्फ 2.85 लाख मतदाता

2027 के चुनाव से पहले हरगाँव की चुनावी तस्वीर में सबसे बड़ा सांख्यिकीय बदलाव मतदाता सूची में दिखाई देता है।

अंतिम SIR सूची में यहां 2,85,675 मतदाता हैं। इनमें 1,57,782 पुरुष, 1,27,881 महिलाएं और 12 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं। सीतापुर जिले की सभी नौ विधानसभा सीटों में हरगाँव का मतदाता आधार सबसे छोटा है।

हरगाँव मतदाता सूची 2026

श्रेणीमतदाता
पुरुष1,57,782
महिला1,27,881
ट्रांसजेंडर12
कुल मतदाता2,85,675
SIR में कमीकरीब 39.18 हजार
कमी प्रतिशतकरीब 12.06%

सीतापुर जिले में SIR से पहले कुल 31,55,372 मतदाता थे, जबकि अंतिम सूची में 27,37,476 मतदाता रह गए। पूरे जिले में 4,17,896 मतदाताओं की कमी दर्ज हुई। हरगाँव में भी इस प्रक्रिया का प्रभाव पड़ा और पुराने बूथ स्तर के जातीय गणित की दोबारा समीक्षा जरूरी हो गई है।

2027 में राजनीतिक दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि 2022 के बूथ परिणामों को सीधे आधार न मानकर यह देखा जाए कि नए मतदाता आधार में किस गांव और किस बूथ की वास्तविक चुनावी ताकत कितनी बची है।

पासी वोट क्यों तय करता है हरगाँव की दिशा?

हरगाँव सीट SC के लिए आरक्षित है और पुराने अनुमानों में पासी मतदाता लगभग 90 हजार बताए गए हैं। यही कारण है कि यहां पासी नेतृत्व की राजनीतिक अहमियत दूसरी कई सुरक्षित सीटों की तुलना में अधिक दिखाई देती है।

मौजूदा विधायक सुरेश राही का राजनीतिक-सामाजिक जुड़ाव भी पासी समाज से रहा है। उनके सार्वजनिक राजनीतिक परिचय में इंडियन पासी समाज से जुड़ी जिम्मेदारी का उल्लेख मिलता है। उनके पिता रामलाल राही भी इस क्षेत्र और प्रदेश की राजनीति का बड़ा नाम रहे।

भाजपा के लिए सुरेश राही का चेहरा इसलिए दोहरा लाभ देता रहा है।

एक तरफ पार्टी को सुरक्षित सीट पर प्रभावशाली दलित नेतृत्व मिलता है।

दूसरी तरफ उसका परंपरागत सवर्ण और गैर-यादव OBC आधार भी प्रत्याशी के साथ जुड़ सकता है।

2017 और 2022 की लगातार दो बड़ी जीत इसी व्यापक सामाजिक गठजोड़ की ओर संकेत करती हैं।

चमार-जाटव मतदाता किसके साथ जाएंगे?

पुराने चुनावी अनुमान में हरगाँव में करीब 35 हजार चमार-जाटव मतदाता बताए गए थे।

यह समूह 2027 में बेहद महत्वपूर्ण होगा क्योंकि सुरक्षित विधानसभा सीटों पर दलित समाज के भीतर अलग-अलग उपजातियों का मतदान व्यवहार अक्सर परिणाम को प्रभावित करता है।

BSP के लिए जाटव समाज उसका पुराना कोर आधार रहा है।

BJP की कोशिश अपने पासी नेतृत्व के साथ जाटव और अन्य दलित मतों का भी हिस्सा जोड़ने की होगी।

SP के लिए चुनौती दलित वोट में BJP और BSP दोनों से पर्याप्त हिस्सेदारी हासिल करने की रहेगी।

अगर पासी और जाटव मतदाता अलग-अलग राजनीतिक दिशा में जाते हैं तो OBC, मुस्लिम और सवर्ण वोटों का महत्व और बढ़ जाता है।

कुर्मी वोट: 40 हजार के पुराने अनुमान वाला बड़ा OBC ब्लॉक

हरगाँव के पुराने जातीय आकलन में कुर्मी मतदाताओं की संख्या करीब 40 हजार बताई गई थी। यह पासी के बाद सीट के सबसे बड़े अलग सामाजिक समूहों में शामिल था।

कुर्मी मतदाता हरगाँव में किसी एक दल का स्थायी वोट नहीं माने जा सकते।

धौरहरा लोकसभा क्षेत्र की व्यापक राजनीति में भी कुर्मी वोट का बड़ा महत्व रहा है। ऐसे में विधानसभा स्तर पर कुर्मी मतों का बंटवारा BJP और SP के मुख्य मुकाबले में निर्णायक हो सकता है।

भाजपा के लिए गैर-यादव OBC सामाजिक गठजोड़ में कुर्मी समर्थन महत्वपूर्ण है।

SP के लिए मुस्लिम-यादव और दलित वोट के साथ कुर्मी मतों में बढ़त उसे जीत के करीब पहुंचा सकती है।

2024 के लोकसभा नतीजे इस संभावना को और महत्वपूर्ण बना देते हैं क्योंकि उसी चुनाव में हरगाँव विधानसभा खंड में SP ने BJP पर बढ़त बनाई थी।

ब्राह्मण वोट करीब 30 हजार का पुराना संकेत

पुराने चुनावी आकलन में हरगाँव विधानसभा में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या लगभग 30 हजार बताई गई थी।

SC आरक्षित सीट होने के कारण ब्राह्मण उम्मीदवार यहां चुनाव नहीं लड़ सकता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ब्राह्मण मतदाताओं का राजनीतिक महत्व कम है।

उलटे सुरक्षित सीटों पर सवर्ण मतदाता कई बार जीतने वाले दल के सामाजिक गठजोड़ में निर्णायक सहायक वोट बन जाते हैं।

2017 और 2022 में BJP की बड़ी जीत के पीछे पार्टी का व्यापक सवर्ण समर्थन भी एक संभावित कारक रहा होगा। यह चुनाव परिणामों और सामान्य राजनीतिक गठजोड़ से निकला विश्लेषण है, जाति-वार मतदान का आधिकारिक डेटा उपलब्ध नहीं है।

2027 में अगर ब्राह्मण वोट BJP के साथ बड़े स्तर पर बना रहता है तो पार्टी को शुरुआती बढ़त मिल सकती है। दूसरी तरफ SP या BSP इस वर्ग में सीमित सेंध भी लगा पाती हैं तो करीबी चुनाव में फर्क पड़ सकता है।

मुस्लिम वोट संख्या में छोटा, गठजोड़ में बड़ा

हरगाँव में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या पुराने अनुमान में करीब 26 हजार बताई गई थी।

संख्या के लिहाज से यह पासी या कुर्मी वोट से छोटा समूह है, लेकिन चुनावी गठजोड़ में इसकी भूमिका बड़ी हो सकती है।

अगर मुस्लिम वोट एक विपक्षी उम्मीदवार की तरफ बड़े स्तर पर एकजुट होता है और उसके साथ दलित तथा OBC वोट का पर्याप्त हिस्सा जुड़ता है तो BJP को चुनौती मिल सकती है।

SP के लिए संभावित सामाजिक रास्ता—

दलित का हिस्सा + मुस्लिम + यादव + कुर्मी और दूसरे OBC

से बन सकता है।

लेकिन इस सीट पर मुस्लिम वोट अकेले चुनाव निकालने की स्थिति में नहीं है। उसे बड़े SC और OBC वोट ब्लॉक के साथ जुड़ना जरूरी होगा।

ठाकुर और अन्य सवर्ण भी बढ़ाते हैं BJP का सामाजिक आधार

पुराने अनुमान में ठाकुर मतदाताओं की संख्या करीब 15 हजार थी। इनके अलावा दूसरे सवर्ण और अन्य मतदाता भी विधानसभा में मौजूद हैं।

ब्राह्मण और ठाकुर मतों को जोड़कर देखें तो सुरक्षित सीट होने के बावजूद सवर्ण मतदाता किसी भी प्रमुख दल के लिए बड़ा समर्थन आधार बन सकते हैं।

BJP के लिए पिछले दो चुनावों में यही समीकरण अनुकूल दिखाई देता है—दलित प्रत्याशी के साथ मजबूत सवर्ण और गैर-यादव OBC वोट।

SP के लिए इसे तोड़ने का रास्ता तभी निकलेगा जब वह SC वोट में बड़ी सेंध के साथ OBC या सवर्ण मतदाताओं में भी अतिरिक्त समर्थन हासिल करे।

2022 में BJP ने 52 प्रतिशत से अधिक वोट लेकर दर्ज की बड़ी जीत

2022 के विधानसभा चुनाव में सुरेश राही ने हरगाँव में अपनी पकड़ और मजबूत की।

उन्हें 1,16,691 वोट, यानी 52.46 प्रतिशत मत मिले।

SP के रामहेत भारती को 78,531 वोट, यानी 35.31 प्रतिशत मत मिले।

BSP के रानू चौधरी को 16,226 वोट मिले।

BJP ने 38,160 वोट के बड़े अंतर से चुनाव जीता। मतदान प्रतिशत 68.07 रहा।

हरगाँव विधानसभा चुनाव 2022

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
सुरेश राहीBJP1,16,69152.46%
रामहेत भारतीSP78,53135.31%
रानू चौधरीBSP16,2267.30%
ममता भारतीकांग्रेस3,130करीब 1.41%
NOTA1,6880.76%
BJP की जीत38,160

52 प्रतिशत से अधिक वोट किसी एक जाति के सहारे हासिल नहीं किए जा सकते। इससे संकेत मिलता है कि 2022 में BJP का पासी नेतृत्व दूसरे दलित समूहों, सवर्ण और OBC मतदाताओं के हिस्से के साथ एक बड़ा सामाजिक गठजोड़ बनाने में सफल रहा।

2017 में BJP की 44,995 वोट की भारी जीत

2017 में हरगाँव की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ था।

BJP के सुरेश राही ने 1,01,680 वोट हासिल किए।

BSP के तत्कालीन विधायक रामहेत भारती को 56,685 वोट मिले।

जीत का अंतर 44,995 वोट था।

हरगाँव विधानसभा चुनाव 2017

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
सुरेश राहीBJP1,01,68045.95%
रामहेत भारतीBSP56,68525.62%
BJP की जीत44,995

2017 में BJP के पहली बार सीट जीतने का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही था कि उससे पहले लगातार कई चुनावों से BSP यहां मजबूत थी।

सुरेश राही ने सुरक्षित सीट पर BJP के लिए नया दलित-सवर्ण-OBC गठजोड़ खड़ा किया और सीट सीधे BSP से छीन ली।

2012 में BSP के रामहेत भारती ने जीती थी सीट

2012 में हरगाँव विधानसभा में BSP की मजबूत पकड़ थी।

रामहेत भारती को 73,889 वोट मिले थे।

SP के आर.पी. चौधरी को 61,740 वोट मिले।

BSP ने 12,149 वोट के अंतर से चुनाव जीता।

हरगाँव विधानसभा चुनाव 2012

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
रामहेत भारतीBSP73,889करीब 38%
आर.पी. चौधरीSP61,740करीब 32%
BSP की जीत12,149

यह चुनाव BSP के दलित आधार की पुरानी ताकत को दिखाता है।

2027 के लिहाज से यह इतिहास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि BSP का सामाजिक आधार कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन सीट पर उसकी पुरानी जमीन मौजूद रही है।

अगर पार्टी अपने जाटव और अन्य दलित वोट में वापसी करती है तो BJP-SP की सीधी लड़ाई फिर तीन कोण वाली हो सकती है।

2007 में भी BSP ने जीती थी हरगाँव सीट

2007 में भी हरगाँव में BSP के रामहेत भारती विजेता रहे थे।

उन्हें 43,787 वोट मिले।

SP के रमेश राही को 37,209 वोट हासिल हुए।

जीत का अंतर 6,578 वोट रहा।

हरगाँव विधानसभा चुनाव 2007

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट प्रतिशत
रामहेत भारतीBSP43,787करीब 37%
रमेश राहीSP37,209करीब 32%
BSP की जीत6,578

2007 के बाद परिसीमन हुआ और वर्तमान विधानसभा को क्रमांक 147 मिला। इसलिए 2007 और 2012 के बाद के बूथ तथा सामाजिक गणित की तुलना करते समय परिसीमन के प्रभाव को भी ध्यान में रखना चाहिए। वर्तमान व्यवस्था में हरगाँव सीट SC आरक्षित है।

2007 से 2022 तक हरगाँव का राजनीतिक इतिहास

चुनावविजेतापार्टीवोटजीत का अंतर
2007रामहेत भारतीBSP43,7876,578
2012रामहेत भारतीBSP73,88912,149
2017सुरेश राहीBJP1,01,68044,995
2022सुरेश राहीBJP1,16,69138,160

चार चुनावों की तस्वीर दो साफ हिस्सों में बंटी दिखाई देती है।

2007 और 2012 में BSP का कब्जा रहा।

2017 और 2022 में BJP ने लगातार दो चुनाव जीते।

SP इस अवधि में सीट नहीं जीत सकी, लेकिन 2022 में दूसरे स्थान पर पहुंची और 2024 के लोकसभा चुनाव में विधानसभा खंड स्तर पर BJP से आगे निकल गई।

यही बदलाव 2027 के मुकाबले को दिलचस्प बनाता है।

2024 लोकसभा चुनाव में हरगाँव में SP 1,930 वोट से आगे

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत 2024 के लोकसभा चुनाव से मिलता है।

हरगाँव धौरहरा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। 2024 में इस संसदीय सीट से SP के आनंद भदौरिया ने BJP की रेखा वर्मा को पूरे क्षेत्र में 4,449 वोट से हराया। हरगाँव विधानसभा खंड में भी SP ने बढ़त बनाई।

हरगाँव खंड में SP को 90,862 वोट और BJP को 88,932 वोट मिले।

BSP को 26,304 वोट हासिल हुए।

SP की बढ़त 1,930 वोट रही।

हरगाँव विधानसभा खंड: लोकसभा चुनाव 2024

प्रत्याशीपार्टीवोट
आनंद भदौरियाSP90,862
रेखा वर्माBJP88,932
श्याम किशोर अवस्थीBSP26,304
SP की बढ़त1,930

यह आंकड़ा 2027 के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

2022 विधानसभा चुनाव में BJP हरगाँव में 38,160 वोट से आगे थी।

2024 लोकसभा चुनाव में उसी विधानसभा खंड में SP 1,930 वोट से आगे हो गई।

लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग परिस्थितियों में होते हैं, इसलिए इसे सीधे करीब 40 हजार वोट का विधानसभा स्विंग नहीं माना जा सकता। लेकिन यह जरूर बताता है कि 2022 जैसी एकतरफा बढ़त को BJP 2027 के लिए स्वतः सुरक्षित नहीं मान सकती।

2024 में BSP के 26 हजार वोट भी बेहद महत्वपूर्ण

हरगाँव में 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान BSP को 26,304 वोट मिले।

यह संख्या SP की 1,930 वोट की बढ़त से कई गुना अधिक है।

इसलिए 2027 में BSP प्रत्याशी की सामाजिक पृष्ठभूमि मुख्य मुकाबले को सीधे प्रभावित कर सकती है।

अगर BSP जाटव-चमार वोट को मजबूती से अपने पास रखती है तो SP को दलित वोट में अपेक्षित विस्तार मिलने में कठिनाई होगी।

अगर BSP का वोट 2022 की तरह कमजोर रहता है तो उसका पारंपरिक दलित आधार BJP और SP के बीच बंट सकता है।

और अगर BSP मजबूत पासी या दूसरे व्यापक रूप से स्वीकार्य दलित चेहरे को मैदान में उतारती है तो BJP के मौजूदा SC आधार पर भी दबाव बन सकता है।

BJP का 2027 वाला संभावित सामाजिक फॉर्मूला

BJP की पिछली दो जीतों को देखते हुए उसका सबसे मजबूत संभावित समीकरण होगा—

पासी + ब्राह्मण + ठाकुर + गैर-यादव OBC + दूसरे दलित समूहों का हिस्सा + लाभार्थी वोट।

सुरेश राही का पासी नेतृत्व इस फॉर्मूले का केंद्रीय हिस्सा रहा है। 2017 और 2022 में उनका वोट 1.01 लाख से बढ़कर 1.16 लाख तक पहुंचा।

पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि 2024 के लोकसभा चुनाव में हुआ सामाजिक और राजनीतिक क्षरण विधानसभा चुनाव तक कायम रहता है या वह फिर अपने पुराने वोटों को वापस जोड़ लेती है।

अगर BJP पासी वोट पर अपनी पकड़ बनाए रखती है और कुर्मी-ब्राह्मण-ठाकुर मतों में मजबूत प्रदर्शन करती है तो वह फिर बढ़त बना सकती है।

SP के लिए दलित वोट में सेंध सबसे जरूरी

SP के लिए हरगाँव में मुस्लिम और यादव मतदाता महत्वपूर्ण जरूर हैं, लेकिन उनसे अकेले सीट जीतना संभव नहीं दिखता।

पुराने अनुमान में यादव करीब 9 हजार और मुस्लिम करीब 26 हजार बताए गए थे। दूसरी तरफ अकेले पासी मतदाता करीब 90 हजार और चमार-जाटव करीब 35 हजार बताए गए थे।

यानी SP के लिए असली लड़ाई दलित समाज और गैर-यादव OBC में है।

उसका संभावित फॉर्मूला हो सकता है—

दलित का बड़ा हिस्सा + मुस्लिम + यादव + कुर्मी + दूसरे OBC।

2024 लोकसभा चुनाव में हरगाँव खंड से बढ़त मिलना SP के लिए सकारात्मक संकेत है। लेकिन विधानसभा चुनाव में स्थानीय प्रत्याशी, सुरेश राही की व्यक्तिगत पकड़ और सुरक्षित सीट का उपजातीय समीकरण अलग भूमिका निभा सकता है।

BSP की वापसी से बदल सकता है पूरा चुनाव

हरगाँव उन सीटों में है जहां BSP का इतिहास बहुत मजबूत रहा है।

2007 में BSP जीती।

2012 में BSP दोबारा जीती।

रामहेत भारती ने लगातार दो बार सीट पर पार्टी का कब्जा बनाए रखा।

2017 में BJP के उभार के बाद BSP दूसरे स्थान पर चली गई और 2022 में उसका वोट 16,226 तक सिमट गया।

इसलिए BSP के सामने 2027 में सबसे बड़ी चुनौती अपने पुराने जाटव-दलित वोट को वापस जोड़ने की है।

अगर BSP 30-40 हजार वोट से ऊपर पहुंचती है तो चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।

अगर वह 2022 के आसपास ही रहती है तो मुख्य लड़ाई BJP और SP के बीच बनी रह सकती है।

सुरक्षित सीट पर प्रत्याशी की उपजाति क्यों है महत्वपूर्ण?

हरगाँव SC आरक्षित सीट है, लेकिन अनुसूचित जाति स्वयं एक समान सामाजिक समूह नहीं है।

पासी और चमार-जाटव मतदाताओं की संख्या पुराने आकलनों में अलग-अलग और बड़ी बताई गई है।

इसीलिए प्रत्याशी किस दलित उपजाति से आता है, उसका स्थानीय नेटवर्क कितना मजबूत है और दूसरे दलित समूह उसे कितना स्वीकार करते हैं—ये सवाल यहां सामान्य सीटों से अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

पासी प्रत्याशी पासी वोट में बढ़त दिला सकता है, लेकिन जाटव वोट की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।

जाटव प्रत्याशी BSP के परंपरागत आधार को मजबूत कर सकता है, लेकिन उसे पासी और OBC मतदाताओं की स्वीकार्यता भी चाहिए।

इसलिए टिकट घोषित होने के बाद हरगाँव का मौजूदा जातीय गणित काफी बदल सकता है।

महिला मतदाता भी बड़ा चुनावी समूह

2026 की अंतिम सूची में हरगाँव में 1,27,881 महिला मतदाता हैं।

यह संख्या इतनी बड़ी है कि महिलाओं को केवल उनके परिवार या जाति की राजनीतिक पसंद से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।

राशन, आवास, पेंशन, स्वास्थ्य, सुरक्षा, गैस, महंगाई और घरेलू अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दे महिला मतदाता की अलग राजनीतिक पसंद बना सकते हैं।

2027 में दलित महिला मतदाता, OBC महिला मतदाता या सवर्ण महिला मतदाता का व्यवहार उसकी बिरादरी के पुरुष मतदाता से अलग भी हो सकता है।

करीबी मुकाबला होने पर यही वोट सबसे निर्णायक हो सकता है।

युवा वोट भी बदलेगा पुराना जातीय गणित

सीतापुर जिले में 2026 की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार 18 से 39 वर्ष आयु वर्ग में 12,81,621 मतदाता हैं, जो जिले के कुल मतदाताओं का करीब 46.82 प्रतिशत है। हरगाँव के अलग आयु-वार आंकड़े प्रकाशित नहीं हैं, इसलिए जिला स्तर का यह आंकड़ा केवल व्यापक संकेत देता है।

रोजगार, सरकारी भर्ती, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, स्वरोजगार, सड़क और डिजिटल सेवाएं युवा मतदाता के लिए जातीय पहचान के समानांतर बड़े राजनीतिक मुद्दे हो सकते हैं।

इसीलिए 2027 में यह मानना मुश्किल होगा कि किसी परिवार या बिरादरी का युवा मतदाता स्वतः उसी दल को वोट देगा जिसे पिछली पीढ़ी देती रही है।

2027 में हरगाँव का असली जातीय समीकरण क्या होगा?

हरगाँव के पिछले चार विधानसभा चुनाव, 2024 का लोकसभा परिणाम और 2026 की नई मतदाता सूची एक साथ रखें तो सीट की तस्वीर तेजी से बदलती दिखाई देती है।

चुनावपरिणाम
2007 विधानसभाBSP +6,578
2012 विधानसभाBSP +12,149
2017 विधानसभाBJP +44,995
2022 विधानसभाBJP +38,160
2024 लोकसभा में हरगाँव खंडSP +1,930

2007 और 2012 में BSP का दौर था।

2017 और 2022 में BJP ने सीट पर मजबूत कब्जा बनाया।

लेकिन 2024 में SP विधानसभा खंड में BJP से आगे निकल गई।

इसके बाद 2026 की SIR सूची में कुल मतदाता संख्या 2,85,675 रह गई और पुराने आधार के मुकाबले करीब 12.06 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।

इसलिए 2027 में 2022 के 38 हजार वोट वाले BJP मार्जिन को स्थायी मानना सही नहीं होगा।

BJP के लिए सबसे जरूरी होगा कि वह पासी वोट पर अपनी पकड़, सवर्ण समर्थन और गैर-यादव OBC गठजोड़ बनाए रखे।

SP के लिए जीत का रास्ता पासी-जाटव समेत दलित वोट में सेंध, मुस्लिम समर्थन और कुर्मी सहित OBC मतों में विस्तार से निकल सकता है।

BSP जितना अपना पुराना दलित आधार वापस हासिल करेगी, उतना BJP-SP के बीच मुकाबले का स्वरूप बदलेगा।

हरगाँव में 2027 की असली चुनावी चाबी पासी वोट की दिशा, जाटव-चमार मतों का बंटवारा, कुर्मी OBC की पसंद, ब्राह्मण-ठाकुर समर्थन और मुस्लिम वोट के ध्रुवीकरण में छिपी है। 2022 में BJP की 38,160 वोट की बड़ी जीत के बाद 2024 में SP की 1,930 वोट की बढ़त और 2026 में बदला हुआ 2.85 लाख का मतदाता आधार इस सुरक्षित सीट को अगले विधानसभा चुनाव की दिलचस्प लड़ाइयों में शामिल करता है।

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