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शंभूगंज प्रखंड का प्रसिद्ध तांत्रिक शक्तिपीठ तिलडीहा दुर्गा मंदिर आने वाले समय में बिहार के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बनाने की ओर तेजी से कार्य किया जा रहा है। सबसे बड़ी परियोजना बदुआ नदी के किनारे करीब 14 करोड़ 99 लाख रुपये की लागत से रिवर फ्रंट निर्माण है, जिसका कार्य तेजी से चल रहा है, जिसे दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। नये कांवरिया पैदल पथ से मात्र 200 मीटर की दूरी पर स्थित इस शक्तिपीठ को विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला के धार्मिक पर्यटन सर्किट से जोड़ने की तैयारी है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाने और मंदिर की आय को स्थायी आधार देने के लिए नई व्यवस्था लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है।
मंदिर के गर्भगृह में स्थापित ऐतिहासिक प्रतिमा पिंड के दर्शन के लिए शीघ्र दर्शनम सुविधा शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। प्रस्ताव के अनुसार श्रद्धालु निर्धारित शुल्क देकर सीधे गर्भगृह में पहुंचकर आसानी से दर्शन कर सकेंगे। इससे भीड़ प्रबंधन बेहतर होगा और मंदिर को नियमित आय का नया स्रोत भी मिलेगा। वर्तमान में प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को हजारों श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचते हैं। अधिक भीड़ होने के कारण कई बार गर्भगृह तक पहुंचने में अव्यवस्था की स्थिति बन जाती है। प्रशासन और न्यास समिति नई दर्शन व्यवस्था लागू कर भीड़ नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाने पर विचार कर रही है। फिलहाल मंदिर की प्रमुख आय पाठा बलि और दशहरा के दौरान होने वाले मुंडन संस्कार से होती है। लेकिन शीघ्र दर्शनम् सुविधा शुरू होने के बाद प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को नियमित आय होगी। साथ ही इससे रोजगार भी बढ़ेगा।
बिहार के सीएम सम्राट चौधरी भी तिलडीहा दुर्गा मंदिर को राज्य के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल कराने के प्रयास में जुटे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में ठहरने की व्यवस्था, शौचालय, स्नानघर, पेयजल और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं पहले से उपलब्ध कराई गई हैं। समय-समय पर इन सुविधाओं का विस्तार भी किया जा रहा है ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। शारदीय नवरात्र के दौरान तिलडीहा दुर्गा मंदिर में पहली पूजा से विजयदशमी तक 15 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पाठा बलि के लिए भी यहां भारी भीड़ उमड़ती है।