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निवेशक की मौत तो पैसा भी ‘लॉक’: लोगों का पैसा टुकड़ों में बांट अलग-अलग कंपिनयों में निवेश किया, पोर्टल से कई आईडी में से एक का ही पेमेंट - Raipur News

August 11, 2026

निवेशक की मौत तो पैसा भी ‘लॉक’:लोगों का पैसा टुकड़ों में बांट अलग-अलग कंपिनयों में निवेश किया, पोर्टल से कई आईडी में से एक का ही पेमेंट

रायपुर26 मिनट पहलेलेखक: प्रशांत गुप्ता

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने 18 जुलाई 2023 को सहारा समूह की सहकारी समितियों के निवेशकों के लिए सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल लॉन्च किया था। इसका उद्देश्य करोड़ों निवेशकों का पैसा लौटाना था, लेकिन भास्कर की महीनेभर की पड़ताल में पोर्टल की कई व्यावहारिक और तकनीकी खामियां सामने आई हैं।

सबसे बड़ी परेशानी उन परिवारों की है, जिनमें मूल निवेशक की मृत्यु हो चुकी है। पोर्टल पर नॉमिनी या वैध वारिस के आवेदन का स्पष्ट विकल्प नहीं है। कई निवेशकों के नाम सहारा ने अलग-अलग सदस्यता आईडी जारी की थीं, लेकिन उनका कहना है कि भुगतान किसी एक आईडी पर ही हुआ, बाकी आवेदन लंबे समय से ‘अंडर प्रोसेस’ हैं। मार्च 2023 के बाद मैच्योर हुई कई पॉलिसियों और कुछ योजनाओं के दावे भी स्वीकार नहीं होने की शिकायत है।

भास्कर ने छत्तीसगढ़ समेत 5 राज्यों के 50 निवेशकों, एजेंटों तथा सहारा के पूर्व कर्मचारियों-अधिकारियों से बात की। अधिकांश का कहना है कि पोर्टल से समाधान नहीं मिलने के बाद अब उनकी उम्मीद अदालत से है। पीड़ितों ने विधायक से लेकर राष्ट्रपति कार्यालय तक पत्र भेजे, पर उनके मुताबिक ठोस जवाब नहीं मिला।

पैसा कैसे फंसा, समझिए सहारा समूह से जुड़े लोगों ने अलग-अलग वर्षों में सहारा क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी, सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी, स्टार्स मल्टीपर्पज को-ऑपरेटिव सोसाइटी और अन्य संस्थाएं बनाईं। इनका पंजीयन सहकारिता व्यवस्था के तहत हुआ और देशभर में कार्यालय खोलकर लोगों से पैसा जमा कराया गया।

निवेशकों और पूर्व कर्मचारियों का आरोप है कि एक ही व्यक्ति के नाम पर कई सदस्यता आईडी जारी की गईं। मैच्योर निवेश को कई मामलों में बिना भुगतान के दूसरी योजनाओं में बदल दिया गया। कुछ निवेशकों ने पुनर्निवेश के दस्तावेजों पर जाली हस्ताक्षर किए जाने की शिकायत भी की है।

पुराने रिकॉर्ड और मौजूदा पहचान दस्तावेजों में नाम, जन्मतिथि तथा पारिवारिक विवरण अलग होने से अब दावे रिजेक्ट हो रहे हैं। स्थानीय कार्यालय बंद होने के कारण निवेशकों के पास इन त्रुटियों को सुधरवाने का रास्ता भी नहीं है।

निवेशक की मौत के बाद भटक रहे उनके वारिस

केस-1 : 10 लाख जमा, पत्नी नॉमिनी; आवेदन का विकल्प नहीं रायपुर के भाठागांव निवासी ईश्वरी ध्रुव ने पत्नी- बच्चे के नाम पर 10 लाख रुपए निवेश किए थे। फरवरी 2026 में उनका निधन हो गया। पत्नी नॉमिनी है, पर पोर्टल पर नॉमिनी क्लेम का विकल्प नहीं मिला। उनके साले छवि बताते हैं, ‘पैसे को लेकर असमंजस है, परिवार बेहद मुश्किल में है।’

केस-2 : एक सदस्य की मौत, परिवार के बाकी दावे भी अधूरे राजू यादव और उनके परिवार ने अलग-अलग योजनाओं में करीब 10 लाख रुपए निवेश किए थे। उनके बड़े भाई यादोराम की 2019 में मृत्यु हो गई। राजू के मुताबिक, भाई के निवेश में से केवल 10 हजार रुपए का भुगतान हुआ, जबकि करीब 75 हजार रुपए बाकी हैं। राजू और उनकी पत्नी को भी 50-50 हजार रुपए मिले हैं, लेकिन शेष राशि कब आएगी, इसकी जानकारी नहीं है।

केस-3 : पति के 12 लाख रुपए पाने के लिए पत्नी परेशान मप्र के बीना निवासी वीरेंद्र जैन 2 साल पहले नहीं रहे। उन्होंने सहारा में 12 लाख रुपए जमा किए थे। पत्नी ममता जैन नॉमिनी हैं। उनके बेटे नीतेश कहते हैं, ‘पोर्टल पर नॉमिनी के आवेदन की व्यवस्था नहीं है। थाने में शिकायत की, प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजा, पर हल नहीं निकला।’

भास्कर ने निवेशक के साथ पोर्टल खोला, आगे कोई अपडेट नहीं मिला

देवपुरी निवासी चित्रलेखा साहू ने सहारा में 87,095 रुपए निवेश किए थे। उन्हें अब तक केवल 6 हजार रुपए का रिफंड मिला है। बाकी राशि की स्थिति जानने के लिए भास्कर रिपोर्टर ने उनके साथ सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल पर सदस्यता नंबर डालकर जानकारी देखी, लेकिन आगे के भुगतान से जुड़ा स्पष्ट अपडेट नहीं मिला।

मठपुरैना निवासी स्वामीनाथ यादव कहते हैं, ‘मुझे अखबार से रिफंड पोर्टल की जानकारी मिली। गांवों और छोटे शहरों में बहुत से निवेशकों को पोर्टल के बारे में पता ही नहीं है। सहारा या सरकार को डाक के जरिए प्रत्येक निवेशक तक इसकी जानकारी पहुंचानी चाहिए थी।’

निवेशकों की तीन बड़ी परेशानियां

  • एक से अधिक सदस्यता ID: एक ID पर भुगतान के बाद दूसरी ID के आवेदन लंबे समय तक ‘अंडर प्रोसेस’ रहने की शिकायत।
  • रिकॉर्ड में अंतर: नाम, सरनेम, माता-पिता के नाम, जन्मतिथि और फोटो का पुराना रिकॉर्ड नए दस्तावेजों से मेल नहीं खाने पर आवेदन रिजेक्ट हो रहे हैं।
  • नॉमिनी क्लेम: मूल निवेशक के निधन पर वैध वारिस की आवेदन की व्यवस्था नहीं।

थाने पहुंचने पर जवाब- पहले पोर्टल पर आवेदन करें निवेशकों का कहना है कि धोखाधड़ी की शिकायत लेकर थाने जाने पर उन्हें पहले पोर्टल पर आवेदन करने की सलाह देकर लौटा दिया जाता है। दूसरी ओर, सहारा के कार्यालय बंद होने से दस्तावेजों की गड़बड़ी ठीक कराने या आवेदन की स्थिति जानने के लिए कोई स्थानीय व्यवस्था नहीं बची है। पीड़ित चाहते हैं कि नॉमिनी क्लेम, एक से अधिक सदस्यता आईडी और रिजेक्ट आवेदनों के समाधान के लिए अलग व्यवस्था बनाई जाए।

आवेदन करने से पहले ये बातें ध्यान रखें:

  • रिफंड के लिए CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल पर आवेदन करना जरूरी है।
  • तय अवधि में भुगतान न आए तो पोर्टल पर आवेदन की स्थिति दोबारा जांचें।
  • आवेदन रिजेक्ट होने पर प्रदर्शित कारण के अनुसार दस्तावेज सुधारकर दोबारा अपलोड करें।
  • आवेदन स्वयं या अधिकृत कॉमन सर्विस सेंटर की सहायता से किया जा सकता है।
  • एक से अधिक सदस्यता ID होने पर प्रत्येक निवेश का रिकॉर्ड व प्रमाणपत्र सुरक्षित रखें।
  • मूल निवेशक की मृत्यु हो चुकी हो तो मृत्यु प्रमाणपत्र, नॉमिनी दस्तावेज और वैधानिक उत्तराधिकार से जुड़े रिकॉर्ड तैयार रखें।

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