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मीरी-पीरी मेडिकल इंस्टीट्यूट में मेडिकल सेवाओं और स्टाफ की सैलरी में नहीं आएगी रुकावट: एडवोकेट धामी

August 9, 2026

मीरी-पीरी मेडिकल इंस्टीट्यूट में मेडिकल सेवाओं और स्टाफ की सैलरी में नहीं आएगी रुकावट: एडवोकेट धामी

August 9, 2026

मीरी-पीरी मेडिकल इंस्टीट्यूट में मेडिकल सेवाओं और स्टाफ की सैलरी में नहीं आएगी रुकावट: एडवोकेट धामी

अमृतसर: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने मीरी-पीरी मेडिकल इंस्टीट्यूट, शाहाबाद मारकंडा पहुंचकर ट्रस्ट सदस्यों, अस्पताल के स्टाफ और क्षेत्र के लोगों को भरोसा दिलाया कि अस्पताल से जुड़े अदालती मामले का अंतिम फैसला आने तक SGPC अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि स्टाफ की सैलरी और मरीजों को मिल रही मेडिकल सुविधाएं बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगी।

अदालत के अंतिम फैसले तक जिम्मेदारियां निभाएगी SGPC

एडवोकेट धामी ने कहा कि मीरी-पीरी मेडिकल इंस्टीट्यूट के संचालन के लिए SGPC की ओर से एक अलग ट्रस्ट बनाया गया है, जिसकी अगुवाई SGPC अध्यक्ष करते हैं। वर्ष 2006 से संचालित यह अस्पताल हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।

उन्होंने बताया कि अस्पताल की ओपीडी के अलावा कैथ लैब, घुटनों और अन्य चिकित्सा सेवाओं का बड़ी संख्या में लोग लाभ उठा रहे हैं। करीब तीन वर्ष पहले शुरू की गई कैथ लैब भी सफलतापूर्वक संचालित हो रही है।

करीब 142 करोड़ रुपये की सहायता देने का दावा

एडवोकेट धामी ने बताया कि SGPC की ओर से अब तक मीरी-पीरी मेडिकल इंस्टीट्यूट को करीब 142 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। इसके अलावा हर वर्ष बजट में लगभग 8 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में सचखंड श्री हरमंदिर साहिब से भी करीब 25 करोड़ रुपये की राशि इस संस्थान को दी गई है। SGPC का उद्देश्य भविष्य में अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित करना है, जिसके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को तैयार किया गया है।

अस्पताल में किसी तरह के भेदभाव से इनकार

SGPC अध्यक्ष ने कहा कि SGPC से जुड़े अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों में जाति, धर्म या किसी अन्य आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि हर जरूरतमंद व्यक्ति को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना संस्थान का मुख्य उद्देश्य है।

कोर्ट के फैसले का सम्मान, मामला अभी विचाराधीन

अदालती मामले पर एडवोकेट धामी ने कहा कि SGPC ने हमेशा अदालतों के फैसलों का सम्मान किया है और इस मामले में भी कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने बताया कि 12 मई को आए फैसले के बाद SGPC की ओर से कानूनी अधिकार के तहत एलपीए दायर की गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मामले पर सुनवाई की और नए गठित मेडिकल बोर्ड से संबंधित कार्रवाई पर रोक लगाई गई। उन्होंने कहा कि फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है।

धामी ने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले को किसी तरह के कब्जे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, मुख्य उद्देश्य लोगों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना और संस्थान की जिम्मेदारियों को निभाना है।

स्टाफ की सैलरी के लिए 1.40 करोड़ रुपये जारी

एडवोकेट धामी ने कहा कि अस्पताल के स्टाफ की सैलरी के लिए SGPC की ओर से 1 करोड़ 40 लाख रुपये जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बाकी लंबित वेतन भी जारी किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि कुछ डॉक्टर और अन्य कर्मचारी पिछले समय में अस्पताल छोड़कर चले गए थे। उनसे संपर्क किया जा रहा है और उन्हें वापस अस्पताल में सेवाएं देने के लिए अपील की जा रही है।

मरीजों और कर्मचारियों के हित में काम जारी रखने का भरोसा

एडवोकेट धामी ने कहा कि अदालत का अंतिम फैसला आने तक SGPC अस्पताल से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियां पहले की तरह निभाती रहेगी। उन्होंने कहा कि प्रयास है कि अस्पताल का प्रशासन व्यवस्थित तरीके से चलता रहे, कर्मचारियों को समय पर वेतन मिले और हरियाणा के लोगों को पहले की तरह चिकित्सा सुविधाएं मिलती रहें।

उन्होंने कहा कि उनका शाहाबाद मारकंडा दौरा किसी तरह के कब्जे के लिए नहीं, बल्कि अस्पताल के स्टाफ, मरीजों और हरियाणा के लोगों को भरोसा दिलाने के लिए था कि अदालती मामले के अंतिम निपटारे तक मेडिकल सेवाओं और कर्मचारियों के अधिकारों में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी।

इस अवसर पर SGPC के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह विर्क, अंतिरंग सदस्य बलदेव सिंह कायमपुर, सदस्य बाबा गुरमीत सिंह त्रिलोकेवाला, तेजिंदरपाल सिंह लाडवा, हरपाल सिंह मछौंडा, पूर्व सदस्य अमरजीत सिंह मंगी, सचिव सुखमिंदर सिंह सहित कई पदाधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।