lifestyle

फूल और शूल—गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

August 7, 2026

Hindi Short Story: मंडप की छांव, मेहमानों का आगमन , ढोल-ढमाके, गीत-नृत्य, संगीत, चाय के दौर, पकवानों की खुशबू ,माहौल में हर्षोल्लास की खनक, रिश्तेदारों का आत्मीत मिलन इसके साथ ही स्मृति-समृद्धि दोनों बहनों की उपस्थिति विवेक की शादी में चार चांद लगा रही थी । चारों ओर वातावरण मे खुशियों की बयार बह रही थी।

सुबह से शाम, शाम से रात फिर रात से सवेरा, चौबीस घंटे छोटे से चक्र में नौकरी से बमुश्किल पांच दिन का अवकाश लेकर आई समृद्धि का उत्साह एक दिन में ही ठंडा पड़ने लगा। पल—पल आते जाते विचार चेहरे पर छाई खुशी में भी ग्रहण लगा रहे थे, माता-पिता के दोहरे व्यवहार से अंतर्मन व्यथित था सोचने लगी- ' 'स्मृति , साधारण से परिवार में ब्याही गई है पास ही ससुराल होने के कारण आती-जाती भी रहती है फिर भी उसका इतना मान-सम्मान,मेरा लाखों का पैकेज, घर वालों के लिए कीमती उपहार, पूरे साल भर में आई हूं फिर भी कोई ढंग से बात नहीं कर रहा है ।

सोच कर आई थी इतने अंतराल बाद घर पहुंचगी तो मुझे सभी सिर आंखों पर बिठा लेंगे पर यहां तो नजारा ही उल्टा है अच्छा हुआ बाॅस में पंद्रह दिन की छुट्टी नहीं दी । विवाह संपन्न होने के पश्चात जैसे तैसे समृद्धि ने तीन दिन और गुजारे और छठवें दिन परिजनों से विदा ले चल पड़ी अपने मुकाम की ओर इस दौरान किसी ने भी उससे घर पर और रुकने की गुजारिश नही की।

सीधे ऑफिस तो पहुंच गई लेकिन काम में बिल्कुल मन नहीं लगा था। रह-रह कर माता-पिता के द्वारा की गई उपेक्षा उसे कचोट रही थी शाम को घर पहुंच सुमित के आने का इंतजार करने लगी जैसे ही कॉल बेल बजी समृद्धि ने दौड़कर दरवाजा खोला, समृद्धि को देखते ही सुमित ने उसे बाहों में भर लिया-

'पांच दिन तुम्हारे बगैर मैने कैसे काटे हैं मै ही जानता हूं अब मुझे छोड़कर मत जाना।'
समृद्धि ने भी सुमित के स्वर में स्वर मिलाया-
' हां सुमित ! मै भी यही चाहती हूं कि तुमसे कभी जुदा ना होऊं ।'
सुमित- ' बिल्कुल एक ही सोच है हम दोनों की '
समृद्धि - 'हां सुमित! मै चाह रही हूं अब हम दोनों को शादी कर लेनी चाहिए कब तक इस तरह लिव इन रिलेशनशिप में रहेंगे?'
सुमित ने पकड़ ढीली करते हुए कहा- ' क्या समृद्धि! तुम भी पुरातनपंथी हो
अभी तुम शादी जैसे—जिसे पीटी रिवाजों को मानती हो , बेवजह शादी-वादी के चक्कर में पड़ रही हो वैसे ही आराम और सुख चैन की जिंदगी जी रहे हैं हम ।'
समृद्धि - 'लेकिन गांव जाकर मेरा सुख-चैन खो गया है सुमित , वहां जाकर मैंने जाना कि चुनरी का बंधन क्या होता है ? अब और नही, हम जल्दी शादी कर लेंगे।'

सुमित ने समृद्धि को समझाने की बहुत कोशिश की किंतु समृद्धि नहीं मानी और शादी की जिद पर अडिग रही। अगले दिन सुबह समृद्धि की आंख खुली तो घर में सुमित को ना पाकर भौचक्की रह गई वह घर छोड़ कर जा चुका था, यह देख समृद्धि के पांव तले की जमीन खिसक गई मन भारी हो गया आंखों से आंसू टपक पड़े , भगवान के समक्ष अपनी वेदना प्रकट की-

'हे भगवान ! ये मैंने क्या किया? जानबूझकर खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारी ली, सपने में भी नही सोचा था कि इतनी बड़ी गलती हो गई है अब इस वेदना को मुझे ताउम्र अकेले ही झेलना पड़ेगा समाज और परिवार मे बदनामी होगी वो अलग , मैं लोगों की तीखी नजरों का सामना कैसे कर पाऊंगी , आज महसूस हो रहा है कि चरित्र के सामने पैसों का कोई मोल नही है क्षणिक सुख की खातिर मैने अपनी जिंदगी ही बर्बाद कर ली , आज मैं अपनी ही नजरों में गिर चुकी हूं किसी को मुंह दिखाने लायक नही रही, मुझे अपनी जिंदगी का एक-एक क्षण भारी लग रहा है उम्र कैसे गुजरेगी नहीं मालूम, मुझे माफ कर दो भगवान , मुझे माफ कर दो ।'
इसी के साथ समृद्धि धम्म से सोफे पर बैठ फूट-फूट कर रोने लगी। समृद्धि का रुदन जारी ही था कि पीछे से किसी की आहट आई पलट कर देखा तो सुमित हाथों में लाल चुनर लिए उसकी ओर बढ़ रहा था

उसे देखते ही समृद्धि के दुख के आंसू खुशी में तब्दील हो गए

फिर ईश्वर से प्रार्थना की-

' हे ईश्वर ! मै चाहूंगी कि अब कोई भी लड़की इतनी बड़ी गलती ना करे क्योंकि हर लड़का सुमित नहीं होता है।'

Subscribe GL