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परिवार में एक सदस्य सरकारी नौकरी में तो दूसरे को नहीं मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति, पटना हाई कोर्ट का अहम फैसला

August 5, 2026

Patna High Court News: पटना हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी मृत सरकारी कर्मचारी के आश्रितों में एक सदस्य पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत है, तो दूसरे आश्रित को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी नहीं दी जा सकती। 

यह नियम तब भी लागू होगा, जब सरकारी नौकरी करने वाला आश्रित परिवार से अलग रहता हो या परिवार का भरण-पोषण नहीं करता हो। न्यायमूर्ति कुमार मनीष की एकलपीठ ने दरभंगा निवासी अजीत कुमार मंडल की याचिका खारिज करते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति सहानुभूति के आधार पर दी जाने वाली सीमित राहत है, न कि उत्तराधिकार के रूप में मिलने वाला रोजगार।

क्या है मामला?

याचिकाकर्ता अजीत कुमार मंडल के बड़े भाई, जो किरतपुर प्रखंड कार्यालय में अनुसेवक के पद पर कार्यरत थे, की वर्ष 2012 में सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। इसके बाद अजीत कुमार मंडल ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया।

हालांकि, वर्ष 2016 में दरभंगा जिला अनुकंपा नियुक्ति समिति ने उनका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि परिवार का एक अन्य सदस्य पहले से सरकारी नौकरी में कार्यरत है, इसलिए उन्हें अनुकंपा नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता।

याचिकाकर्ता की दलील और सरकार का पक्ष

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने दलील दी कि सरकारी नौकरी कर रहे उनके भाई अलग रहते हैं और परिवार की आर्थिक सहायता नहीं करते। इसलिए उन्हें अनुकंपा नियुक्ति का लाभ मिलना चाहिए।

वहीं, राज्य सरकार ने इस दलील का विरोध करते हुए फुल बेंच के 'नीरज कुमार मलिक बनाम बिहार राज्य' मामले के फैसले का हवाला दिया। सरकार ने कहा कि राज्य की नीति के अनुसार यदि परिवार का कोई आश्रित पहले से लाभकारी सरकारी रोजगार में है, तो दूसरे आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती।

हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी

अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों में सक्षम प्राधिकारी को केवल यह देखना होगा कि मृत कर्मचारी के परिवार का कोई आश्रित लाभकारी रोजगार में है या नहीं। यह जांच का विषय नहीं हो सकता कि वह परिवार के साथ रहता है या नहीं, अथवा परिवार का भरण-पोषण करता है या नहीं।

पटना हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य केवल मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल आर्थिक संकट से राहत देना है, न कि इसे परिवार के अन्य सदस्यों के लिए रोजगार का अधिकार माना जाए।