पटना2 घंटे पहले
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पटना के सरकारी अस्पतालों में सोमवार को बारिश के बाद स्थिति खराब हो गई थी। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी पीएमसीएच के भवन में पानी टपकने लगे हैं। कहीं सीलन है तो कहीं रिसाव। गार्डिनर अस्पताल के छत के प्लास्टर गिरने के कगार पर हैं। एनएनजेपी के कैंपस में जलजमाव अलग परेशानी रही।
ऐसे में मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। फिसलन और कीचड़ के बीच मरीज और उनके परिजन को आना-जाना करना पड़ रहा है।
सबसे पहले पीएमसीएच जानें क्या किस तरह की हुई परेशानी….
पहले कुछ तस्वीरें….

डॉक्टर के केबीन में फैला है पानी।

सिलिंग से भी पानी टपक रहा।
न्यू हॉस्पिटल ब्लॉक के 5वें तल्ले पर छत से पानी टपक रहा
पीएमसीएच पुनर्विकास योजना पर लगभग 5540 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इस परियोजना के तहत तैयार न्यू हॉस्पिटल ब्लॉक के कुछ हिस्से कुछ महीने पहले ही अस्पताल प्रशासन को सौंपे गए थे, लेकिन बारिश ने इसकी गुणवत्ता की पोल खोल दी।
बारिश के दौरान न्यू हॉस्पिटल ब्लॉक के 5वें तल्ले पर स्थित स्त्री-प्रसूति रोग विभाग (गायनी-ऑब्स्टेट्रिक्स) के डॉक्टरों के चैंबर की छत से पानी टपकने लगा। देखते ही देखते पूरे कमरे में पानी फैल गया, जिससे दीवारों पर सीलन, पानी बहने के निशान और कई जगह फफूंद साफ दिखाई देने लगी है। फॉल्स सीलिंग भी बारिश का पानी नहीं सह सकी।
हालात ऐसे हो गए कि कर्मचारियों को मेडिकल उपकरण, कंप्यूटर, फर्नीचर और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को बचाने के लिए तत्काल सुरक्षित स्थान पर हटाना पड़ा। अस्पताल कर्मियों का कहना है कि कुछ महीने पहले ही तैयार हुए भवन में बारिश के दौरान इस तरह का रिसाव निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है।
पीएमसीएच परिसर में कीचड़ बारिश के बाद पीएमसीएच परिसर की कैंपस की सड़कें पूरी तरह कीचड़ से भर गईं। सबसे अधिक परेशानी उन मरीजों को हुई जिन्हें एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई सहित अन्य जांचों के लिए रेडियोलॉजी विभाग ले जाया जा रहा था। गंभीर मरीजों को ट्रॉली और स्ट्रेचर के सहारे कीचड़ भरे रास्तों से गुजरना पड़ा। कई जगह पानी और मिट्टी के कारण स्ट्रेचर धकेलने में स्वास्थ्यकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
माइक्रोबायोलॉजी विभाग जाने वाले मरीजों और अशोक राजपथ की ओर से न्यू हॉस्पिटल ब्लॉक पहुंचने वाले लोगों को भी कीचड़ और फिसलन से होकर गुजरना पड़ा।

न्यू गार्डिनर अस्पताल का जर्जर भवन बना खतरा न्यू गार्डिनर अस्पताल के जर्जर भवन से पानी रिसने लगा है। जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है। जगह-जगह दीवारों का प्लास्टर झड़ रहा है और सीलन फैल गई है। डॉक्टरों और कर्मचारियों का कहना है कि बारिश के दौरान हमेशा यह डर बना रहता है कि कहीं छत या प्लास्टर का कोई हिस्सा टूटकर मरीज या कर्मचारी पर न गिर जाए। बारिश के समय कई कमरों में पानी भर जाने से अस्पताल का कामकाज भी प्रभावित होता है।

सीलन की वजह से दिवार हो रही खराब।

छत का प्लास्टर कभी भी गिर सकता है।
भवन की स्थिति बेहद खराब है
वहीं न्यू गार्डिनर अस्पताल के निदेशक डॉ. मनोज कुमार सिन्हा ने बताया भवन की स्थिति बेहद खराब है और बारिश के दौरान डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच हमेशा किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। पुनर्निर्माण की प्रक्रिया पूरी होने तक उपलब्ध संसाधनों से भवन को सुरक्षित बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।

एलएनजेपी हड्डी अस्पताल का ड्रेनेज सिस्टम ध्वस्त मानसून की बारिश ने हड्डी रोग अस्पताल (लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल) परिसर से लेकर डॉक्टर्स चेंबर तक पानी जमा गया। अस्पताल का पूरा ड्रेनेज सिस्टम ध्वस्त रहा। जहां पानी निकासी के लिए नगर निगम और अस्पताल कर्मचारियों को घंटों मशक्कत करनी पड़ती है।
जलजमाव की वजह से व्हीलचेयर और स्ट्रेचर लेकर आने-जाने मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जलजमाव और फिसलन के कारण हड्डी के मरीजों के लिए स्थिति और भी जोखिमपूर्ण हो गई।

अस्पताल में चारों तरफ फैला पानी और गंदगी।

पानी के बीच मरीज और उनके परिजन आना-जाना कर रहे हैं।
गर्दनीबाग अस्पताल में भी बारिश से जलभराव
गर्दनीबाग अस्पताल भी बारिश के बाद जलजमाव है। अस्पताल परिसर में कई जगह जलजमाव की वजह से मरीजों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अस्पताल के वार्ड तक पहुंचने में उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी।
संक्रमण फैल सकता है
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सीलन और जलजमाव केवल असुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा भी बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार नमी रहने से फफूंद, बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्म जीव तेजी से पनपते हैं। इससे वार्ड, ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर के आसपास के हिस्सों और जांच कक्षों में संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है। जलजमाव के कारण मच्छरों के प्रजनन और गंदगी फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों की संभावना बढ़ सकती है। ऐसे में अस्पतालों में बेहतर जल निकासी, नियमित सफाई और समय पर मरम्मत बेहद जरूरी है।
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