पटना- पिता की मौत के बाद बेटे ने किया नेत्रदान: कोड़ाई महतो की आखों से दो जरूरतमंदों को मिलेगी रोशनी, PMCH में 423 मरीज इंतजार में - Patna News
September 16, 2026
पटना- पिता की मौत के बाद बेटे ने किया नेत्रदान:कोड़ाई महतो की आखों से दो जरूरतमंदों को मिलेगी रोशनी, PMCH में 423 मरीज इंतजार में
पटना3 घंटे पहले
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पिता की मौत का दुख परिवार के लिए सबसे कठिन समय होता है, लेकिन बेतिया के रहने वाले जितेंद्र महतो ने इसी मुश्किल घड़ी में ऐसा फैसला लिया, जिससे उनके पिता की आंखें किसी और की दुनिया रोशन कर सकती हैं।
पिता कोड़ाई महतो (60) के निधन के बाद बेटे जितेंद्र ने PMCH आई बैंक की टीम से संपर्क किया। आई बैंक के ऋषिकेश और गोनु झा ने परिवार को नेत्रदान की प्रक्रिया और इसके महत्व की जानकारी दी।
काउंसलिंग के बाद जितेंद्र ने नेत्रदान के लिए सहमति दे दी। इसके बाद PMCH की इमरजेंसी ओटी में डॉ. शुभम और डॉ. पूजा की टीम ने कॉर्निया निकालने की प्रक्रिया पूरी की। इस कॉर्निया से दो जरूरतमंदों को रोशनी मिल सकती है।
PMCH आई बैंक की टीम के साथ जितेंद्र महतो।
मजदूरी कर परिवार चलाते हैं जितेंद्र
जितेंद्र महतो मजदूरी कर अपने परिवार का गुजारा करते हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उन्होंने नेत्रदान के महत्व को समझा।
उनका मानना था कि पिता की आंखें किसी ऐसे व्यक्ति के काम आ सकें, जो अंधेपन के कारण दुनिया नहीं देख पा रहा है, तो इससे बड़ी बात और क्या होगी।
पिता के निधन के बाद परिवार पहले ही दुखी था। ऐसे मुश्किल समय में नेत्रदान का फैसला लेना आसान नहीं था। आई बैंक की टीम की काउंसलिंग के बाद जितेंद्र ने तय किया कि पिता की आंखें किसी और के जीवन में रोशनी लाने का माध्यम बनेंगी।
अंधविश्वास से ऊपर उठकर नेत्रदान के बारे में सोचें- डॉ. राजीव
जितेंद्र को सम्मानित करते हुए पीएमसीएच अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कहा, 'नेत्रदान और अंगदान को लेकर समाज में अभी भी कई तरह के भ्रम और अंधविश्वास हैं। इसलिए लोगों को इससे बाहर निकलकर सोचने की जरूरत है। इन्हें दूर करने के लिए लगातार जागरूकता की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘नेत्रदान केवल सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि मानवता की मिसाल है। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी आंखें किसी जरूरतमंद की जिंदगी में रोशनी ला सकती हैं।’
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PMCH में 304 कॉर्निया ट्रांसप्लांट, 423 मरीज इंतजार में
पीएमसीएच आई बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 304 मरीजों का कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया जा चुका है। वहीं, 423 मरीज कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए पंजीकृत हैं। ऐसे में हर नेत्रदान उन मरीजों के लिए उम्मीद बन सकता है, जो लंबे समय से रोशनी का इंतजार कर रहे हैं।
पीएमसीएच आई बैंक की ओर से लोगों को लगातार नेत्रदान के लिए जागरूक किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, समय पर सूचना मिलने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत कॉर्निया रिट्रीवल किया जा सकता है।
नेत्रदान के लिए इन नंबरों पर करें संपर्क
पीएमसीएच में नेत्रदान से संबंधित जानकारी या किसी व्यक्ति के निधन के बाद नेत्रदान की सूचना देने के लिए आई बैंक से संपर्क किया जा सकता है।
आई बैंक संपर्क नंबर:9783420549 | 880411393 | 9318874785
कोड़ाई महतो अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके बेटे जितेंद्र के फैसले से उनकी आंखें किसी और की दुनिया रोशन करने की उम्मीद बन गई हैं। जितेंद्र का यह फैसला समाज के लिए एक प्रेरणा है।
नेत्रदान की यह पहल बताती है कि दुख की घड़ी में लिया गया एक मानवीय फैसला किसी दूसरे परिवार के लिए नई रोशनी की शुरुआत बन सकता है। नेत्रदान से कॉर्निया की जरूरत वाले मरीजों को दोबारा दुनिया देखने का मौका मिल सकता है।
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