इस्राइल में मतदान आज - फोटो : Amar Ujala Graphics
विस्तार
इस्राइल में मंगलवार को संसदीय चुनाव के लिए मतदान होगा। स्थानीय समय के मुताबिक इस्राइल की जनता सुबह सात बजे से रात 10 बजे तक मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेगी। भारतीय समयानुसार आज सुबह लगभग 10.30 बजे से वोटिंग की शुरुआत होगी। चुनाव में 7 अक्तूबर 2023 को हमास के हमले, उसके बाद हुए युद्धों और सरकार की घरेलू व विदेश नीतियों पर चर्चा प्रमुख मुद्दे हैं। पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट और पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट समेत विपक्षी नेता नेतन्याहू की दक्षिणपंथी सरकार को चुनौती दे रहे हैं। वहीं, चुनाव से ठीक पहले इस्राइली सेना (आईडीएफ) प्रमुख इयाल जमील के बीच मतभेद की खबरों ने नेतन्याहू की चुनौती और बढ़ा दी।
विज्ञापन
नेतन्याहू ने सेना प्रमुख जमीर के साथ किसी भी तरह के टकराव या मतभेद की खबर को बकवास करार दिया। नेतन्याहू ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने सेना और मोसाद को ईरान की सत्तारूढ़ सरकार को हटाने का निर्देश दिया है। विपक्ष और आलोचकों ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू अपने राजनीतिक हितों को साधने, चुनाव में फायदा उठाने या चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित/टालने के लिए ईरान के साथ तनाव को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी के नेता नेतन्याहू 1996 से तीन अलग-अलग समय में करीब 19 साल तक प्रधानमंत्री रह चुके हैं। नेतन्याहू पर धोखाधड़ी और रिश्वत लेने जैसे आरोप हैं, लेकिन वह इन आरोपों से इन्कार करते रहे हैं। 7 अक्टूबर के हमास हमले को रोकने में नाकाम रहने को लेकर भी उनकी आलोचना होती रही है।
विज्ञापन
ईरान हमले के लिए आईडीएफ प्रमुख ने मांगा लिखित आदेश
मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि नेतन्याहू चुनाव से पहले ईरान पर हमला करना चाहते थे लेकिन जमीर ने निर्देश की कानूनी मंजूरी से जुड़े लिखित दस्तावेज मांगे। साथ ही इस पर और चर्चा की मांग की। सैन्य अधिकारियों को आशंका थी कि ईरान से टकराव बढ़ सकता है।
विज्ञापन
समाज में गहराती खाई...यहूदियों में पहले कभी नहीं दिखी ऐसी चिंता
- इस्राइल चुनाव को लेकर यहूदी समाज के बड़े हिस्से में जितनी चिंता है, वैसी पहले कभी नहीं दिखी। वजह भी है, मतदाताओं को उन विवादित फैसलों पर अपना फैसला सुनाने का मौका मिलेगा, जिन्होंने कई वर्षों से देश को बांट रखा है। साथ ही, उन्हें इस्राइल के भविष्य की दो बिल्कुल अलग तस्वीरों में से एक को चुनना है।
- नेतन्याहू के विरोधियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या लंबे समय से सत्ता में रहे इस नेता को इस्राइल के इतिहास की सबसे बड़ी सुरक्षा विफलता के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा? यह विफलता 7 अक्तूबर 2023 के हमास हमले से जुड़ी है।
- कई अन्य अहम सवाल भी इस चुनाव में दांव पर हैं। क्या देश की न्यायपालिका को कमजोर करके सरकार को कहीं ज्यादा अधिकार दिए जाएंगे? क्या समाज के सभी वर्गों से सैन्य सेवा और बलिदान की मांग करते हुए देश का सामाजिक समझौता बदला जाएगा?