ऑनलाइन शॉपिंग में आकर्षक ऑफर्स के साथ धोखाधड़ी का खतरा भी रहता है। फर्जी वेबसाइट, पेमेंट स्कैम और फेक डिलीवरी से बचने के लिए सतर्क रहें और अपनी वित्ती ...और पढ़ें

सस्ते ऑफर के लालच में न फंसें, Online Shopping के इन Scam से रहें सावधान

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संक्षेप में पढ़ें
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। होम अप्लायंस खरीदना है, वार्डरोब को अपग्रेड करना है या फिर नया स्मार्टफोन या गैजेट लेना है तो लोकप्रिय ई-कामर्स प्लेटफार्मों पर बेहतर डिस्काउंट और आफर्स के साथ खरीदारी करने का अभी अच्छा मौका है। कुछ बैंकों की तरफ ईजी ईएमआई, कैशबैक रिवार्ड, इंस्टैंट डिस्काउंट और कुछ खास तरह के क्रेडिट/डेबिट कार्ड पर नो-कास्ट ईएमई जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं।
ऐसे में इंटरनेट पर नया हेडफोन ब्राउज करते समय कहीं आपको मैसेज दिख जाए- मेगा सेल, 80 प्रतिशत तक डिस्काउंट, लिमिटेड स्टाक, तुरंत आर्डर करें... तो थोड़ा ठहर जाएं। कुछ बातों पर गौर कर लें- जिस वेबसाइट से प्रोडक्ट लेने जा रहे हैं, क्या उसके बारे में पहले से जानते हैं, क्या प्रोडक्ट का फोटो ओरिजिनल दिख रहा है, डिस्काउंट कहीं अविश्वसनीय तो नहीं है, क्योंकि कुछ ही क्लिक के बाद आपको आनलाइन पेमेंट करनी है, जहां आसानी से ट्रैप हो सकते हैं।
इन दिनों फेक फेस्टिव सेल वेबसाइट, फेक यूपीआइ पेमेंट रिक्वेस्ट, डिलिवरी स्कैम, बोगस कस्टमर काल के जरिये स्कैमर लोगों को आसानी से फंसा लेते हैं। एक छोटी सी लापरवाही के चलते प्रोडक्ट डिलिवरी के चांस कम हो जाएंगे, लेकिन आपके पैसे डूबेंगे, इसके पूरे चांस हैं।
डिजिटल शापिंग कल्चर का सबसे यह असहज करने वाला हिस्सा है। जो तकनीक आपको कुछ ही सेकंड में खरीदारी की सुविधा देती है, वही ठगों को भी यह सुविधा देती है कि वे ग्राहकों को आसानी से जाल में फंसा सकें।
डिस्काउंट के धोखे को भी समझें
आनलाइन शापिंग में डिस्काउंट सबसे बड़ा आकर्षण होता है। त्योहारों और बड़ी सेल के दौरान, भारी छूट का वादा करने वाले मैसेज फोन और इंटरनेट मीडिया फीड में भरे होते हैं। नकली शापिंग साइटें असली ई-कामर्स प्लेटफार्म जैसा दिखने की कोशिश कर सकती हैं।
वे प्रोडक्ट की तस्वीरें, ग्राहकों के रिव्यू, डिस्काउंट बैनर और यहां तक कि जल्दबाजी का एहसास दिलाने वाले काउंटडाउन टाइमर भी दिखा सकती हैं। मकसद सीधा है- खरीदार से अधिक सवाल पूछने से पहले ही पेमेंट करवा लेना।
इसलिए, बहुत कम कीमत देखकर उत्साह नहीं, बल्कि मन में सवाल उठना चाहिए। खरीदारी से पहले सेलर की जानकारी, रिटर्न और रिफंड पालिसी, कांटैक्ट की जानकारी और आनलाइन रेपुटेशन की जांच करनी चाहिए। अगर कोई प्रोडक्ट बहुत ही कम कीमत पर मिल रहा है, तो इसके पीछे कोई वजह हो सकती है।
जोखिम का नया बाजार है सोशल मीडिया
इंस्टाग्राम, फेसबुक और दूसरे इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म कपड़े, एक्सेसरीज, गैजेट्स, हाथ से बने सामान और दूसरी चीजें खोजने के लिए लोकप्रिय बनते जा रहे हैं। यहां कई अच्छे सेलर हैं, तो कुछ धोखेबाज अकाउंट भी हैं, जो आकर्षक उत्पादों का विज्ञापन करते हैं, एडवांस पेमेंट लेते हैं और फिर गायब हो जाते हैं। किसी अनजान सेलर को पेमेंट करने से पहले, सिर्फ तस्वीरों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
अकाउंट की हिस्ट्री, बिजनेस की जानकारी, कस्टमर फीडबैक और पेमेंट की शर्तों को भी जानना जरूरी है। अगर सेलर सीधे पर्सनल अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने पर जोर देता है या रिटर्न और रिफंड के बारे में जानकारी देने से मना करता है, तो सावधान हो जाना चाहिए। ध्यान रखें प्रोफेशनल दिखने वाला इंटरनेट मीडिया पेज असली बिजनेस का सबूत नहीं होता।

ठगी होने पर क्या है उपाय
इस सच को भी स्वीकारें कि सावधान खरीदार भी धोखा खा सकता है। अगर अनधिकृत ट्रांजैक्शन का पता चलता है या आपको एहसास होता है कि कोई संवेदनशील फाइनेंशियल जानकारी किसी गलत व्यक्ति के साथ साझा कर दी है, तो बिना इंतजार किए अपने बैंक या पेमेंट प्रोवाइडर से संपर्क करना चाहिए और घटना को रिपोर्ट करना चाहिए।
स्क्रीनशाट, ट्रांजैक्शन रिकार्ड, मैसेज, आर्डर की जानकारी, फोन नंबर और दूसरे सबूतों को संभाल कर रखना चाहिए। यह मानने में कोई शर्म नहीं है कि आपके साथ धोखाधड़ी हुई है। स्कैम ऐसे बनाए जाते हैं कि वे असली लगें। चुप रहने के बजाय उनकी रिपोर्ट करना ज्यादा फायदेमंद है।
स्कैम को समझें और उससे बचें
फेक डिलीवरी स्कैम : स्कैमर्स रैंडम पतों पर बिना मांगे 'कैश आन डिलीवरी' पैकेज भेजते हैं। इनमें खाली डिब्बे या कम कीमत वाली चीजें हो सकती हैं, वे लोगों में कन्फ्यूजन या जल्दबाजी का फायदा उठाकर उनसे पेमेंट करवाते हैं।
अचानक आई डिलीवरी किसी को भी चौंका सकती है, खासकर जब घर के किसी सदस्य के आर्डर करने की संभावना हो। पैकेज लेने या पेमेंट करने से पहले परिवार के सदस्यों से इसे कन्फर्म कर लेना चाहिए।
फेक वेबसाइट और फिशिंग लिंक : स्कैमर लोकप्रिय कंपनियों की वेबसाइट की नकल कर फिशिंग मैसेज और ईमेल भेज सकते हैं, जिनमें बिना पेमेंट वाली डिलिवरी, अकाउंट से जुड़ी समस्याएं या दूसरे जरूरी मामलों का जिक्र होता है।
ये अक्सर आपको ऐसे फर्जी वेबपेज पर ले जाते हैं जिन्हें यूपीआइ आइडी, ओटीपी या क्रेडिट/डेबिट कार्ड की जानकारी जैसी संवेदनशील जानकारी इकट्ठा करने के लिए बनाया गया होता है। इससे बचने का तरीका है कि सबसे पहले वेबसाइट एड्रेस के स्पेलिंग के फर्क को जानें। साइट को देखें कि वह सुरक्षित है या नहीं।
अविश्वसीय आफर : स्कैमर्स अक्सर अविश्वसनीय आफर देते हैं। वे ग्राहकों को लुभाने के लिए इंटरनेट मीडिया पर विज्ञापन भी चलाते हैं। अक्सर, पेमेंट के बाद ये साइटें गायब हो जाती हैं। इसमें कोई कस्टमर सपोर्ट नहीं होता और पीड़ितों के पास कोई रास्ता नहीं बचता।
प्रमोशनल पोस्ट पर भरोसा करने के बजाय वेबसाइट के यूआरएल, संपर्क की जानकारी और रिटर्न पालिसी जैसे विश्वसनीयता मानकों के बारे में जरूर पता करना चाहिए।
पेमेंट स्कैम : स्कैमर्स ग्राहकों से ई-कामर्स वेबसाइट या मोबाइल एप के बाहर (जैसे-किसी थर्ड-पार्टी साइट के जरिये) पेमेंट करने के लिए कहते हैं। बाहरी लिंक, क्यूआर कोड या थर्ड-पार्टी वेबसाइट के जरिये पेमेंट करने से बचना चाहिए। ट्रांजैक्शन हमेशा आफिशियल पेमेंट प्रोसेस के जरिये ही पूरा करना चाहिए।
फेक कस्टमर सपोर्ट अकाउंट : स्कैमर्स इंटरनेट मीडिया पर ग्राहकों की शिकायतों पर नजर रखते हैं और नकली कस्टमर सपोर्ट अकाउंट से जवाब देते हैं। इन प्रोफाइल में अक्सर "हेल्प डेस्क", "सपोर्ट टीम" या "कस्टमर सर्विस" जैसे आम नाम इस्तेमाल किए जाते हैं।
वे बातचीत को प्राइवेट मैसेज पर ले जाने, संदिग्ध लिंक शेयर करने, या समस्या को ठीक करने के बहाने निजी जानकारी मांगने की कोशिश करते हैं। आफिशियल वेबसाइट या एप पर मौजूद वेरिफाइड कस्टमर सपोर्ट चैनलों का इस्तेमाल करके ही आवश्यक जानकारियां साझा करनी चाहिए।
मेंबरशिप रिन्यूअल स्कैम : मेंबरशिप खत्म होने का मैसेज भेजकर स्कैमर आपको नकली पेमेंट पेज पर ले जाते हैं या आपसे तुरंत कार्ड की जानकारी देने को कहते हैं। रिन्यूअल रिमाइंडर की अलग से जांच कर लेनी चाहिए। आफिशियल वेबसाइट या एप के जरिए मेंबरशिप या सब्सक्रिप्शन स्टेटस चेक करना हमेशा बेहतर होता है।
हमेशा ध्यान रखें सेफ्टी चेकलिस्ट
- वेबसाइट का पता https:// से शुरू होना चाहिए (सिर्फ http से नहीं)।
- सुरक्षित पेमेंट गेटवे का प्रयोग करना चाहिए। ये साइट और आपके बैंक के बीच आपकी पेमेंट जानकारी को सुरक्षित रूप से ट्रांसफर करते हैं।
- कभी भी अपना पासवर्ड, ओटीपी, सीवीवी, कार्ड की जानकारी या बैंकिंग क्रेडेंशियल, मैसेज या चैट पर साझा नहीं करना चाहिए।
- एप्स गूगल प्ले स्टोर/आइओएस एप स्टोर से ही डाउनलोड करना चाहिए।
यह भी पढ़ें- Flipkart सेल: Vivo के 7200 mAh बैटरी वाले 5G फोन पर डिस्काउंट, MediaTek प्रोसेसर और 6.76-इंच डिस्प्ले भी