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Nepal Floods: 'चाय पीने रुके और बच गए', नेपाल बाढ़ से लौटे विशाखापत्तनम के तीर्थयात्रियों ने सुनाई आपबीती

August 29, 2026

Nepal Flash Flood: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से विशाखापत्तनम के 28 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया है. उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि कैसे चाय पीने के लिए रुकने और फ्लाइट छूटने जैसी छोटी-छोटी चूकों ने उन्हें बहती बसों और लैंडस्लाइड से बचा लिया.

Nepal Flood News, काठमांडू: नेपाल इस समय विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहा है। इस बीच आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 28 तीर्थयात्रियों को प्रभावित इलाकों से सुरक्षित निकाल लिया गया है। रेस्क्यू के बाद तीर्थयात्रियों ने जो आपबीती सुनाई, वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उनका कहना है कि यात्रा के दौरान हुई छोटी-छोटी देरी ने उन्हें कई बार मौत के मुंह में जाने से बचा लिया।

चाय पीने के लिए रुके और सामने आई दो बसों के बहने की खबर

तीर्थयात्री गडा इलावेनी ने बताया कि उनका दल काठमांडू से करीब 80 किलोमीटर आगे पहुंच चुका था। रास्ते में वे चाय पीने के लिए रुके थे। इसी दौरान उन्हें पता चला कि उनसे करीब आधे घंटे पहले निकली दो बसें बाढ़ की चपेट में आ गईं। दोनों बसों के बह जाने या लापता होने की खबर ने पूरे दल को हिलाकर रख दिया।

उन्होंने बताया कि उनका दल तीन बसों में यात्रा कर रहा था और सभी 28 लोग सुरक्षित हैं। तीर्थयात्री ने कहा कि उन्हें दर्शन तो नहीं हो सके, लेकिन भगवान की कृपा से वे सुरक्षित अपने घर लौट पाए। इस घटना ने उन्हें जिंदगी की अहमियत का एहसास करा दिया।

वीजा में देरी ने बदला पूरा सफर, टल गया बड़ा हादसा

DLDA के चेयरमैन गाडू वेंकटप्पा ने भी अपने दल के बाल-बाल बचने की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए उनका दल पहले ही नेपाल पहुंच गया था, लेकिन चीन का वीजा मिलने में देरी के कारण उन्हें तीन दिन काठमांडू में रुकना पड़ा।

उनके मुताबिक, दल के तीन प्रतिनिधि वीजा लेने के लिए दिल्ली में रुके हुए थे। वीजा मिलने के बाद भी फ्लाइट टिकट की समस्या के कारण वे तय समय से देर से काठमांडू पहुंच सके। इसी वजह से यात्रा शुरू करने का समय भी बदल गया। वेंकटप्पा के अनुसार, अगर वे तय योजना के मुताबिक सुबह जल्दी निकल जाते तो उस समय चीनी दूतावास के आसपास होते, जब वहां बाढ़ ने तबाही मचाई।

‘अगर 3 बजे निकलते तो बाढ़ के बीच होते’

गाडू वेंकटप्पा ने बताया कि मूल योजना के मुताबिक दल को सुबह करीब 3 बजे यात्रा शुरू करनी थी, लेकिन फ्लाइट में देरी के कारण ऐसा नहीं हो सका। बाद में उन्होंने करीब 6 बजे यात्रा शुरू की। उनके मुताबिक, यही तीन घंटे की देरी उनके लिए जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन गई।

उन्होंने कहा कि जिस समय वे वहां से गुजरने वाले थे, उसी दौरान चीनी दूतावास के पास बाढ़ का पानी पहुंच गया था। उनके अनुसार, उसी इलाके में कुछ अन्य तीर्थयात्री और लोग भी ठहरे हुए थे। वेंकटप्पा का मानना है कि यात्रा में हुई यह देरी उनके पूरे दल के लिए वरदान साबित हुई।

चीन सीमा के पास आया लैंडस्लाइड, ड्राइवर की सूझबूझ से बची जान

वेंकटप्पा के भाई गरुड़प्पा नायडू ने भी यात्रा के दौरान सामने आए एक और खौफनाक हादसे की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनका वाहन चीन सीमा के एक पुल से महज 50 से 100 मीटर की दूरी पर था, तभी अचानक तेज आवाज के साथ बड़ा लैंडस्लाइड हुआ।

सामने से आ रहे एक टेम्पो चालक ने खतरा देखकर जोर से चिल्लाकर बस को चेतावनी दी। आवाज सुनते ही बस चालक ने बिना समय गंवाए वाहन को ऊंची जगह की ओर मोड़ दिया। इसके बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। इस तरह ड्राइवर की सतर्कता और कुछ सेकंड की तेजी ने पूरे दल की जान बचा ली।

28 यात्रियों का परिवार भी था दल में शामिल

गरुड़प्पा नायडू ने बताया कि उनके भाई और परिवार के सदस्य 24 अगस्त को एक निजी ट्रैवल ऑपरेटर के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले थे। दल में कुल 28 लोग थे, जिनमें उनके परिवार के आठ सदस्य शामिल थे। वीजा में देरी के कारण दल को काठमांडू में तीन दिन रुकना पड़ा और इसके बाद वे मानसरोवर की ओर रवाना हुए।

उन्होंने बताया कि रास्ते में टॉयलेट जाने और चाय पीने के लिए रुकने के कारण यात्रा में थोड़ी और देरी हुई। इसी दौरान उनकी गाड़ी चीन सीमा के पुल के करीब पहुंची थी कि अचानक लैंडस्लाइड हो गया। हादसे के बाद कुछ समय के लिए परिवार से संपर्क टूट गया, जिससे घरवालों की चिंता बढ़ गई।

कुछ देर बाद आया फोन, ‘हम सुरक्षित हैं’

गरुड़प्पा नायडू के मुताबिक, हादसे के बाद कुछ समय तक परिवार का अपने परिजनों से संपर्क नहीं हो पाया। इस दौरान घरवाले बेहद परेशान रहे। हालांकि कुछ देर बाद उनके भाई ने खुद फोन कर बताया कि वे सुरक्षित स्थान पर हैं और सभी लोग ठीक हैं।

उनके मुताबिक, जिस तरह लगातार छोटी-छोटी घटनाओं और देरी ने उनके सफर का समय बदला, उसने उन्हें कई बड़े खतरों से बचा लिया। तीर्थयात्रियों की यह कहानी अब नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच राहत और बचाव की एक अहम कहानी बन गई है।

विदेश मंत्रालय ने बताया- 84 भारतीयों को बचाया गया

इस बीच नेपाल के भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में आई भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि प्रभावित इलाकों से अब तक 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, बचाए गए लोगों में तमिलनाडु के 21 नागरिक शामिल हैं, जिन्हें सुरक्षित भारत वापस लाया गया है। इसके अलावा त्रिशूली-I जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले 63 कर्मचारियों को भी बचाया गया है।

149 भारतीय चीन से सुरक्षित नेपाल पहुंचे

रणधीर जायसवाल ने बताया कि 149 भारतीय नागरिक चीन से सुरक्षित नेपाल पहुंच गए हैं। इसके अलावा करीब 400 भारतीय नागरिक अभी चीन की तरफ सुरक्षित हैं। भारतीय दूतावास उनके संपर्क में है और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।

हालांकि, भारी बाढ़ के कारण कई इलाकों में टेलीकम्युनिकेशन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इसके चलते करीब 320 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। विदेश मंत्रालय की ओर से उनकी स्थिति का पता लगाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

भोटेकोशी में तबाही, सड़कें और संचार व्यवस्था प्रभावित

रसुवा के भोटेकोशी नदी क्षेत्र में आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। कई लोगों के मारे जाने या लापता होने की खबर है, जबकि प्रमुख सड़क मार्ग और संचार संपर्क भी प्रभावित हुए हैं। नेपाल में बचाव और राहत एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं।

भारत की ओर से भी नेपाल को राहत पहुंचाने के प्रयास जारी हैं। आपातकालीन राहत सामग्री के साथ विशेष चिकित्सा और बचाव क्षमताएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि नेपाल के आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू ऑपरेशन को मजबूती मिल सके। इस बीच, बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना राहत एजेंसियों की सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।