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NEET UG 2026 Paper Leak: CBI चार्जशीट में बड़ा खुलासा, NTA एक्सपर्ट्स ने कैसे पहुंचाए सवाल? - Haribhoomi

August 7, 2026

NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट में बड़ा खुलासा हुआ है। NTA के तीन एक्सपर्ट्स पर सवाल याद कर बिचौलियों तक पहुंचाने और WhatsApp-Telegram नेटवर्क के इस्तेमाल का आरोप है।

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CBI की चार्जशीट में NEET UG 2026 पेपर लीक मामले से जुड़े कथित तौर पर NTA एक्सपर्ट्स, सुरक्षा खामियों और डिजिटल नेटवर्क के इस्तेमाल को लेकर कई अहम खुलासे किए गए हैं।

  • Published: 07 Aug 2026, 04:25 PM IST
  • Last Updated: 07 Aug 2026, 05:06 PM IST

NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि NTA द्वारा नियुक्त तीन विषय विशेषज्ञों ने अपनी गोपनीय पहुंच का दुरुपयोग कर परीक्षा से पहले सवाल हासिल किए, उन्हें याद किया या कॉपी किया और फिर बिचौलियों के जरिए उम्मीदवारों तक पहुंचाया।

CBI ने दिल्ली स्थित रूज एवेन्यू कोर्ट की विशेष CBI अदालत में दाखिल अपनी चार्जशीट में कुल 13 आरोपियों के नाम शामिल किए हैं। इनमें NTA के तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स के अलावा उम्मीदवार, बिचौलिए और निजी कोचिंग संचालक भी शामिल हैं। एजेंसी का आरोप है कि प्रश्न पत्र कई हाथों से होते हुए उन उम्मीदवारों तक पहुंचे, जो इसके लिए पैसे देने को तैयार थे।

ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दौरान चार्जशीट में दो पहलुओं को आपस में जोड़ा गया है - NTA के कॉन्फिडेंशियल सेक्शन में मौजूद सुरक्षा खामियां, और उसके बाहर वॉट्सऐप, टेलीग्राम, PDF फाइलों, तस्वीरों और मोबाइल फोन के जरिए बना डिजिटल ट्रेल।

कैसे NTA एक्सपर्ट्स ने याद किए और बाहर पहुंचाए सवाल

CBI ने NTA द्वारा नियुक्त तीन एक्सपर्ट्स की पहचान की है - बॉटनी विषय की विशेषज्ञ मनीषा गुरुनाथ मंधारे, केमिस्ट्री विषय के विशेषज्ञ प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी और फिजिक्स विषय की विशेषज्ञ मनीषा संजय हवलदार।

एजेंसी का आरोप है कि इन एक्सपर्ट्स को NEET-UG 2026 प्रश्न पत्र के अलग-अलग हिस्सों के अनुवाद, बैक-ट्रांसलेशन और प्रूफरीडिंग का काम सौंपा गया था। आरोप है कि इन्होंने इसी पहुंच का इस्तेमाल कर परीक्षा से पहले सवालों को दोबारा तैयार किया या कॉपी किया।

CBI ने खासतौर पर इस बात की ओर इशारा किया है कि NTA के कॉन्फिडेंशियल सेक्शन में तलाशी (फ्रिस्किंग) की कोई व्यवस्था नहीं थी। चार्जशीट के मुताबिक, एक्सपर्ट्स को इस क्षेत्र में प्रवेश या निकास के दौरान नियमित रूप से चेक नहीं किया जाता था, जिसके चलते कथित तौर पर गोपनीय सामग्री बिना पकड़े बाहर ले जाई जा सकती थी।

आरोप है कि कुलकर्णी ने अनुवाद और बैक-ट्रांसलेशन के दौरान रफ कार्य के लिए दी गई सादी शीट्स का इस्तेमाल कर केमिस्ट्री के सवाल और उनके विकल्प छोटी पर्चियों पर लिख लिए। CBI का दावा है कि उन्होंने इन पर्चियों को छुपाकर कॉन्फिडेंशियल सेक्शन से बाहर ले जाया।

एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि आसान सवालों को याद कर उन्हें दिन का काम खत्म होने के बाद बाद में लिखा भी जा सकता था।

CBI के मुताबिक, मंधारे ने एक अलग तरीका अपनाया। जांचकर्ताओं का दावा है कि उन्होंने NCERT की किताबों से अपनी जान-पहचान का इस्तेमाल करते हुए होटल लौटने के बाद किताबों में संबंधित हिस्सों को चिन्हित किया, जिससे वह सवालों को दोबारा तैयार कर सकीं।

फिजिक्स से जुड़े काम में शामिल रहीं हवलदार पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली स्थित अपने आवास पर लौटने के बाद संक्षेप में सवाल नोट किए।

CBI का दावा: CCTV और फ्रिस्किंग की कमी का उठाया गया फायदा

CBI ने NTA के कॉन्फिडेंशियल सेक्शन में CCTV निगरानी को लेकर भी सवाल उठाए हैं। चार्जशीट के अनुसार, NTA के पास सिर्फ करीब 20 से 25 दिनों का ही CCTV बैकअप उपलब्ध था। चूंकि NEET-UG 2026 से जुड़ा कॉन्फिडेंशियल कार्य 7 अप्रैल को पूरा हो चुका था और यह मामला 12 मई को दर्ज किया गया, इसलिए IANS की रिपोर्ट के मुताबिक जब जांचकर्ताओं ने इस कथित लीक की जांच शुरू की, तब तक संबंधित फुटेज उपलब्ध ही नहीं रह गई थी।

CBI ने आगे यह भी आरोप लगाया है कि NTA में लाइव CCTV फीड की निगरानी के लिए कोई समर्पित कंट्रोल रूम भी नहीं था। एजेंसी का दावा है कि इसका मतलब यह हुआ कि कॉन्फिडेंशियल क्षेत्र के भीतर की गतिविधियों की लगातार निगरानी नहीं हो रही थी।

जांचकर्ताओं के अनुसार, तलाशी की कथित कमी और CCTV से जुड़ी इन खामियों ने ऐसा माहौल तैयार कर दिया, जिसमें एक्सपर्ट्स बिना तुरंत ध्यान आकर्षित किए कॉन्फिडेंशियल सवालों को बाहर निकाल सकते थे या दोबारा तैयार कर सकते थे।

WhatsApp, Telegram और PDF से फैला पेपर लीक नेटवर्क

यह कथित लीक सिर्फ एक्सपर्ट्स तक सीमित नहीं रहा। CBI का कहना है कि इसके बाद सवाल बिचौलियों के एक नेटवर्क से होते हुए आखिरकार उम्मीदवारों तक पहुंचे। इस मामले में डिजिटल सबूत एजेंसी के केस का एक बड़ा हिस्सा हैं।

जब्त किए गए मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में कथित तौर पर PDF फाइलें, प्रश्न पत्रों की तस्वीरें, वॉट्सऐप बातचीत और टेलीग्राम चैट बरामद हुईं। जांचकर्ताओं ने आरोपियों के बीच संबंध स्थापित करने के लिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड, फोन एक्सट्रैक्शन रिपोर्ट और लोकेशन डेटा की भी जांच की।

चार्जशीट में कहा गया है कि आरोपी यश यादव के मोबाइल फोन में लीक हुए NEET-UG 2026 सवालों वाली PDF फाइलें मिलीं। जांचकर्ताओं को टेलीग्राम पर "AP Broker" नाम से सेव एक कॉन्टैक्ट के साथ हुई बातचीत भी मिली, जिसे बाद में CBI ने सह-आरोपी शुभम मधुकर खैरनार के रूप में पहचाना।

आरोपी मनीषा संजय वाघमारे से जब्त किए गए मोबाइल फोन में "NEET 2026" नाम का एक वॉट्सऐप ग्रुप भी मिला, जिसे एजेंसी ने इस पूरे मामले में शामिल लोगों द्वारा इस्तेमाल किए गए संचार नेटवर्क का हिस्सा बताया है।

CBI का कहना है कि इन डिजिटल रिकॉर्ड्स की मदद से जांचकर्ताओं को अलग-अलग आरोपियों के बीच सवालों के कथित आदान-प्रदान को दोबारा समझने में मदद मिली। चार्जशीट के मुताबिक, सवाल सीधे NTA एक्सपर्ट्स से उम्मीदवारों तक नहीं पहुंचे, बल्कि इसके लिए कई बिचौलियों का इस्तेमाल किया गया।

CBI: कोचिंग क्लास में भी छात्रों तक पहुंचाए गए सवाल

जांच के दौरान CBI ने पुणे लौटने के बाद NTA एक्सपर्ट्स की गतिविधियों की भी पड़ताल की। एजेंसी के मुताबिक, मंधारे और कुलकर्णी ने 3 मई को होने वाली परीक्षा से कुछ ही समय पहले अप्रैल में विशेष कोचिंग क्लासेज आयोजित की थीं।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि इन क्लासों में शामिल छात्रों ने एक्सपर्ट्स द्वारा बोले गए सवाल लिखे, जिनमें कुछ हिस्सों को महत्वपूर्ण या अत्यंत महत्वपूर्ण के तौर पर चिन्हित किया गया था। CBI ने पुणे में कुलकर्णी जिस रिहायशी सोसाइटी में रहते थे, वहां इस्तेमाल होने वाले एक्सेस-कंट्रोल एप्लीकेशन के रिकॉर्ड की भी जांच की।

एजेंसी ने कथित तौर पर विजिटर-एंट्री और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड के साथ-साथ कॉल डेटा और लोकेशन जानकारी का इस्तेमाल कर उस दौरान परिसर में छात्रों और उनके अभिभावकों की मौजूदगी की पुष्टि की।चार्जशीट में यह भी आरोप है कि हवलदार ने मंधारे के कहने पर एक उम्मीदवार की मां को 68 फिजिक्स सवालों वाले 16 पन्ने सौंपे थे।

CBI का दावा - सरकारी कर्मचारी और निजी संचालक दोनों शामिल

इस चार्जशीट में भारतीय न्याय संहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के प्रावधानों का इस्तेमाल किया गया है। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, CBI ने अपने केस में 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 भौतिक वस्तुओं (मटीरियल ऑब्जेक्ट्स) का हवाला दिया है।

एजेंसी का आरोप है कि सभी साक्ष्य मिलकर NTA के सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स, कोचिंग संचालकों, बिचौलियों और उम्मीदवारों को शामिल करने वाली एक सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करते हैं।

चार्जशीट में नामजद सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में बताए गए हैं। अब इस मामले में अदालत में सुनवाई के दौरान CBI द्वारा पेश किए गए डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच होगी, जिससे पूरे पेपर लीक नेटवर्क की भूमिका पर अंतिम तस्वीर साफ हो सकती है।