
HC ने सरकार से मांगा जवाब
NCERT Book Chanda Mama poem:पहली कक्षा के बच्चों को पढ़ाई जाने वाली एनसीईआरटी की हिंदी किताब सारंगी भाग-01 में लोकप्रिय बाल कविता चंदा मामा दूर के को लेकर ऐसा विवाद सामने आया है, जिसने अब पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है. आरोप है कि वर्ष 2023 में प्रकाशित पुस्तक में कविता की दूसरी पंक्ति में सही शब्द की जगह एक गलत और अमर्यादित शब्द छप गया. याचिकाकर्ता का कहना है कि किताब प्रकाशित होने के करीब ढाई साल बाद भी कथित गलती में सुधार नहीं किया गया. सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है.
मामला एनसीईआरटी की कक्षा-1 की हिंदी पुस्तक सारंगी भाग-01 में शामिल चंदा मामा दूर के कविता से जुड़ा है. याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि कविता की दूसरी पंक्ति में ऐसा शब्द छप गया, जिससे कविता का अर्थ ही बदल गया. याचिका में दावा किया गया है कि वहां सही शब्द गुड़ होना चाहिए था, लेकिन उसकी जगह कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्द प्रकाशित हो गया. इसे बच्चों की पाठ्यपुस्तक में गंभीर त्रुटि बताते हुए सवाल उठाया गया है कि ऐसी सामग्री प्रकाशन से पहले जांच और प्रूफरीडिंग की प्रक्रिया से कैसे गुजर गई.
2023 में किताब प्रकाशित, ढाई साल तक सुधार नहीं होने का आरोप
याचिका के अनुसार संबंधित पुस्तक वर्ष 2023 में प्रकाशित हुई थी. याचिकाकर्ता का कहना है कि कथित गड़बड़ी सामने आने के बावजूद लंबे समय तक इसमें सुधार नहीं किया गया.
रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने 21 जुलाई 2026 को पटना के कदमकुआं स्थित ज्ञान गंगा बुक डिपो से पुस्तक खरीदी और उसमें छपे शब्द का सत्यापन किया. इसके बाद मामले को लेकर पटना हाईकोर्ट में लोकहित याचिका दायर की गई.
हाईकोर्ट पहुंचा मामला, केंद्र से मांगा जवाब
पटना के मुसल्लहपुर निवासी सोमित्र शंकर की ओर से दायर लोकहित याचिका पर पटना हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति सुधीर सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई की. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शोवेन्द्र कुमार ने अदालत के समक्ष मामले को रखा.
सवाल सिर्फ एक शब्द का नहीं, बच्चों की किताब की गुणवत्ता का भी
कक्षा-1 की पाठ्यपुस्तक बच्चों के शुरुआती भाषा विकास और पढ़ने की आदत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. ऐसे में किताब में किसी भी प्रकार की मुद्रण या संपादकीय त्रुटि सामने आने पर उसकी जांच और समय पर सुधार महत्वपूर्ण माना जाता है. मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि बच्चों के लिए प्रकाशित होने वाली पाठ्यपुस्तकों में सामग्री के अंतिम प्रकाशन से पहले प्रूफरीडिंग और गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया कितनी सख्त है.
चंदा मामा की कविता ने खड़े किए बड़े सवाल
चंदा मामा दूर के बच्चों के बीच लंबे समय से लोकप्रिय बाल गीत है. ऐसे में पहली कक्षा की पाठ्यपुस्तक में इसके शब्द को लेकर सामने आया विवाद अब केवल एक प्रिंटिंग गलती का मामला नहीं रह गया है. याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि बच्चों के लिए तैयार की जाने वाली पाठ्यपुस्तकों में सामग्री की जांच कितनी गंभीरता से की जाती है और यदि किसी संस्करण में गलती रह जाती है तो उसे समय रहते वापस लेकर संशोधित क्यों नहीं किया गया.
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पटना हाईकोर्ट ने अभी यह अंतिम रूप से तय नहीं किया है कि कथित आपत्तिजनक शब्द किस कारण और किस स्तर पर पुस्तक में आया. अदालत ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. अब संबंधित पक्ष के जवाब और आगे की सुनवाई के बाद मामले में स्थिति स्पष्ट होगी.
सबसे बड़ा सवाल
अगर 2023 में प्रकाशित पुस्तक में वास्तव में यह गलती थी, तो इतने लंबे समय तक संशोधित संस्करण क्यों नहीं लाया गया? अब इस सवाल का जवाब अदालत में केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों के जवाब से सामने आने की उम्मीद है.

मोहित पंडित
मोहित पंडित ने साल 2004 से अपनी पत्रकारिता की शुरुआत की. नई बात, सन्मार्ग, सोनभद्र जैसे अखबारों में वे अपनी सेवा दे चुके हैं. वे सीमांचल के समाचारों को सकारात्मक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं और स्थानीय घटनाओं को उच्च स्तर पर रिपोर्ट करने में निपुण हैं. उनकी लेखनी में संवेदनशीलता और नैतिकता झलकती है.
Read More