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Navratri 2026: देवी कवच, अर्गला और कीलक स्तोत्र... नवरात्रि में क्यों है इनका विशेष महत्व?

October 15, 2026

Navratri 2026: देवी कवच, अर्गला और कीलक स्तोत्र… नवरात्रि में क्यों है इनका विशेष महत्व?

नवरात्रि में स्तोत्र पाठ का महत्वImage Credit source: pexels

Devi Kavach Significance: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करने के साथ दुर्गा सप्तशती के पाठ को भी विशेष महत्व दिया जाता है. मान्यता है कि दुर्गा सप्तशती का पाठ भक्तों को मां दुर्गा की महिमा, शक्ति और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है. इस पाठ की शुरुआत से पहले देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलक स्तोत्र का पाठ करने की परंपरा है. इन तीनों स्तोत्रों को दुर्गा सप्तशती के महत्वपूर्ण अंग माना जाता है. अक्सर कई श्रद्धालु सीधे प्रथम चरित्र या अध्याय से पाठ शुरू कर देते हैं, जबकि शास्त्रों के अनुसार, दुर्गा सप्तशती के मुख्य पाठ से पहले देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलक स्तोत्र का पाठ करना जरूरी है. आइए जानते हैं, आखिर इन तीनों का नवरात्रि में इतना गहरा महत्व क्यों है?

देवी कवच

देवी कवच को दुर्गा सप्तशती का महत्वपूर्ण अंग माना जाता है. कवच का सामान्य अर्थ सुरक्षा देने वाला आवरण होता है. इस स्तोत्र में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों का स्मरण करते हुए शरीर के विभिन्न अंगों की रक्षा के लिए प्रार्थना की जाती है. नवरात्रि में देवी कवच का पाठ करने के पीछे मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों को भय, संकट और नकारात्मक परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति देती हैं. भक्त इस पाठ के माध्यम से अपने जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा की कामना करते हैं. इसे केवल बाहरी संकटों से बचाव की प्रार्थना के रूप में ही नहीं, बल्कि मन में साहस और आत्मविश्वास जगाने वाली स्तुति के रूप में भी देखा जाता है.

अर्गला स्तोत्र

अर्गला स्तोत्र दुर्गा सप्तशती के पाठ से पहले पढ़े जाने वाले प्रमुख स्तोत्रों में से एक है. इसमें मां दुर्गा की महिमा का गुणगान करते हुए उनसे रूप, विजय, यश और सफलता जैसी कामनाओं के लिए प्रार्थना की जाती है. नवरात्रि के दौरान भक्त अपने जीवन की परेशानियों को दूर करने, परिवार में सुख-समृद्धि बनाए रखने और कार्यों में सफलता पाने की कामना से इसका पाठ करते हैं. अर्गला स्तोत्र में बार-बार आने वाली प्रार्थना भक्त और देवी के बीच श्रद्धा के भाव को व्यक्त करती है.धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्तोत्र का पाठ भक्त को अपनी इच्छाओं और मनोकामनाओं के लिए मां के सामने प्रार्थना करने का अवसर देता है. हालांकि, इसे किसी इच्छा की पूर्ति की गारंटी के रूप में नहीं देखना चाहिए.

कीलक स्तोत्र

कीलक स्तोत्र का नाम सुनकर कई लोगों के मन में सवाल आता है कि इसका अर्थ क्या है और इसे दुर्गा सप्तशती से पहले क्यों पढ़ा जाता है. कीलक शब्द का सामान्य अर्थ कील या किसी चीज को बांधकर रखने वाला अवरोध माना जाता है. दुर्गा सप्तशती की परंपरा में इस स्तोत्र को पाठ के महत्वपूर्ण अंग के रूप में शामिल किया गया है.धार्मिक व्याख्याओं के अनुसार, कीलक स्तोत्र का पाठ दुर्गा सप्तशती के मंत्रों के महत्व और उनके फल से जुड़ी परंपरा को समझने का माध्यम है. इसे देवी कवच और अर्गला स्तोत्र के बाद पढ़ा जाता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है. .

वरुण चौहान

वरुण चौहान

इलेक्‍ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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