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Navabharat Nishanebaaz: कभी था इस देश में ‘सास-मत’, अब NDA का प्रचंड बहुमत| Navbharat Live

July 20, 2026

Updated On: Jul 20, 2026 | 09:53 AM IST

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सार

NDA Majority: संसद के मानसून सत्र से पहले एनडीए का संख्या बल बढ़कर 320 तक पहुंचने की चर्चा तेज है। इसे लेकर विपक्ष की कमजोर होती स्थिति और बदलते राजनीतिक समीकरणों पर सवाल उठ रहे हैं।

Navabharat Nishanebaaz: Once a 'hung parliament' in this country, now a massive NDA majority.

(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)

विस्तार

NDA Parliamentary Strength Increase: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, ऐसा क्यों है कि बहुमत की बहुत चर्चा होती है, लेकिन ‘सासमत’ की नहीं? अखबार में समाचार है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का बहुमत लगातार बढ़ता जा रहा है। संसद के बजट सत्र में एनडीए के 295 संसद सदस्य थे जो इस मानसून सत्र के समय बढ़कर 320 हो गए हैं। क्या यह मानसून की बारिश का असर है?’

हमने कहा, ‘मोदी-शाह का कमाल लोकतंत्र में धमाल मचा रहा है। जैसे तमाम नदियां समुद्र में जाकर मिल जाती हैं वैसे ही विपक्ष की अलग हो चुकी टूटी-बिखरी पार्टियां भी एनडीए में शामिल होती चली जा रही हैं।’

पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, इस देश के घरों में सदियों तक सासू मां की हुकूमत चलती थी। ‘सौ दिन सास के’ नामक फिल्म भी बनी थी। हर मामले में सास का मत ही माना जाता था। बहू का मुंह ही नहीं खुलता था, इसलिए बहुमत का सवाल ही नहीं उठता था। सास शासन करती थी और बहू सहन करती थी। चाहें तो ललिता पवार की पुरानी फिल्में देख लीजिए कि उस जमाने में कैसी स्थिति थी।’

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हमने कहा, ‘अब समय बदल गया है। परिवारों में बेटा-बहू अलग संसार बसाने लगे हैं। आज का वक्त बहू और बहुमत के साथ है। बहू जो चाहती है, वैसा होता है। हम तो यह राय देंगे कि एनडीए को बहुमत और बढ़ाना है तो केंद्र सरकार देश में लाड़ली बहू योजना शुरू कर दे।’

पड़ोसी ने कहा, ‘उसकी जरूरत नहीं है। जब चुनाव आयोग अपने साथ हो, केंद्रीय जांच एजेंसियों का ब्रम्हास्त्र और एसआईआर का चक्रव्यूह हो तो एनडीए का बहुमत चक्रवृद्धि ब्याज के समान बढ़ता ही चला जाएगा और विपक्ष किसी अंधेरे कोने में सिसकता नजर आएगा।’

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पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, मोदी का मैग्नेट विपक्ष के टूटे हुए दलों को अपनी ओर खींचता चला जा रहा है। इतने पर भी हम याद दिला दें कि एक समय वह भी था, जब 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने लोकसभा में 400 से ज्यादा सीटें जीत ली थीं और बीजेपी को सिर्फ 2 सीटें मिल पाई थीं। तब राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के पास प्रचंड बहुमत था। मोदी शायद ही उतनी मेजॉरिटी जुटा पाएं! उन्हें अपने मंत्रिमंडल की पूर्व सदस्य स्मृति ईरानी की याद आती होगी जो फिर छोटे पर्दे पर लौटकर ‘सास भी कभी बहू थी’ में आदर्श तुलसी बहू की भूमिका निभा रही हैं।’

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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