मध्य प्रदेश में राशन वितरण व्यवस्था डिजिटल होने जा रही है। भोपाल और इंदौर में पायलट प्रोजेक्ट के तहत लाभार्थियों को डिजिटल रुपये (CBDC) आधारित टोकन दिए जाएंगे। राशन लेने के लिए QR कोड स्कैन करना होगा। सरकार का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी।
MP में राशन वितरण होगा डिजिटल
- Published: 06 Aug 2026, 10:01 AM IST
- Last Updated: 06 Aug 2026, 10:01 AM IST
मध्य प्रदेश सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। अब प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को डिजिटल टोकन के जरिए राशन उपलब्ध कराया जाएगा। इस नई व्यवस्था की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में भोपाल और इंदौर से होगी। इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक की केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) यानी डिजिटल रुपये का उपयोग किया जाएगा।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि भारत सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए मध्य प्रदेश के भोपाल और इंदौर का चयन किया है। लक्ष्य है कि दिसंबर 2026 तक दोनों शहरों की सभी उचित मूल्य दुकानों पर यह व्यवस्था लागू कर दी जाए।
QR कोड स्कैन कर मिलेगा राशन
नई व्यवस्था लागू होने के बाद पात्र हितग्राहियों के डिजिटल वॉलेट में हर महीने उनकी पात्रता के अनुसार डिजिटल टोकन भेजे जाएंगे। राशन लेने के लिए लाभार्थी को अपने मोबाइल ऐप से उचित मूल्य दुकान पर मौजूद QR कोड स्कैन करना होगा। इसके बाद टोकन का उपयोग करते ही गेहूं, चावल और अन्य निर्धारित खाद्यान्न मिल जाएगा।
ऐसे होगी पूरी प्रक्रिया
योजना लागू करने से पहले लाभार्थियों के आधार और राशन कार्ड का मिलान किया जाएगा। मोबाइल नंबर का सत्यापन और ई-केवाईसी भी अनिवार्य होगी। इसके बाद हितग्राहियों को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के डिजिटल रुपया मोबाइल ऐप से जोड़ा जाएगा। सभी उचित मूल्य दुकानों पर QR आधारित CBDC भुगतान प्रणाली स्थापित की जाएगी और दुकानदारों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
पारदर्शिता बढ़ेगी, लीकेज पर लगेगी रोक
सरकार का कहना है कि नई डिजिटल व्यवस्था से राशन वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी। इससे फर्जीवाड़ा, सब्सिडी के दुरुपयोग और खाद्यान्न की लीकेज पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही पात्र लाभार्थियों तक शत-प्रतिशत पारदर्शिता के साथ राशन पहुंचाया जा सकेगा।
कई एजेंसियां मिलकर कर रही हैं तैयारी
इस परियोजना के लिए भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, मध्य प्रदेश खाद्य विभाग, पंजाब नेशनल बैंक, एनआईसी और अन्य तकनीकी एजेंसियों ने संयुक्त रूप से विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। कई दौर की बैठकों और वीडियो कॉन्फ्रेंस के बाद इसे अंतिम रूप दिया गया है।
पूरे प्रदेश में लागू होने का रास्ता खुलेगा
यदि भोपाल और इंदौर में यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो मध्य प्रदेश देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल होगा, जहां सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सीधे डिजिटल रुपये का उपयोग होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस मॉडल को अन्य कल्याणकारी योजनाओं में भी लागू किया जा सकता है।