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MP Ayushman Bharat Scheme: आयुष्मान योजना में लापरवाही पर 11 अस्पतालों पर कार्रवाई की तैयारी, 7 दिन में मांगा जवाब - Haribhoomi

September 12, 2026

Ayushman Bharat: मध्य प्रदेश में 11 अस्पतालों को TMS पोर्टल पर उपचार संबंधी प्रकरण दर्ज नहीं करने पर नोटिस मिला है। 7 दिन में जवाब नहीं देने पर डी-इम्पैनलमेंट की कार्रवाई हो सकती है।

MP Ayushman Bharat Scheme

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  • Published: 12 Sep 2026, 10:03 AM IST
  • Last Updated: 12 Sep 2026, 10:03 AM IST

भोपाल। आयुष्मान भारत ‘निरामयम्’ योजना के तहत हितग्राहियों को इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने में लापरवाही बरतने वाले अस्पतालों पर अब कार्रवाई की तैयारी है। योजना के तहत उपचार से संबंधित प्रकरण TMS पोर्टल पर दर्ज नहीं करने के मामले में मध्य प्रदेश के 11 अस्पतालों को नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा गया है।

पिछले छह महीने के आंकड़ों का विश्लेषण करने के दौरान इन अस्पतालों की कार्यप्रणाली में लापरवाही सामने आई। इसके बाद सीईओ अरविंद शाह ने संबंधित अस्पतालों को स्पष्ट, तथ्यात्मक और संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

इन 11 अस्पतालों से मांगा गया जवाब
अलग-अलग जिलों के जिन अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें शामिल हैं-
बड़वानी: मनोरमा हॉस्पिटल
भोपाल: गणपति हॉस्पिटल, हक मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नवोदय हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर और शल्य ज्वाइंट केयर
ग्वालियर: मेट्रो न्यूरो हॉस्पिटल
इंदौर: आर्थ्रोस क्लिनिक
नीमच: रामनिवास ऐरन हॉस्पिटल
रीवा: रेवांचल हेल्थ केयर एंड नर्सिंग होम
शाजापुर: श्री डीपी केयर हॉस्पिटल
टीकमगढ़: न्यू सिटी हॉस्पिटल

सात दिन में देना होगा स्पष्टीकरण
संबंधित अस्पतालों को नोटिस मिलने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर अपना जवाब देना होगा। अधिकारियों ने अस्पतालों से केवल औपचारिक जवाब के बजाय स्पष्ट और तथ्यात्मक स्पष्टीकरण देने को कहा है।

अगर कोई अस्पताल सात दिन के भीतर जवाब नहीं देता है या उसका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता, तो उसके खिलाफ डी-इम्पैनलमेंट की कार्रवाई की जा सकती है।

हितग्राहियों के अधिकारों से जुड़ा है मामला
अधिकारियों का कहना है कि आयुष्मान भारत ‘निरामयम्’ योजना के हितग्राहियों के उपचार से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। TMS पोर्टल पर उपचार संबंधी प्रकरणों की जानकारी दर्ज करना योजना की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में रिकॉर्ड दर्ज नहीं किए जाने को गंभीरता से लिया गया है।

इस कार्रवाई का मकसद योजना के तहत इलाज लेने वाले हितग्राहियों के अधिकारों की सुरक्षा के साथ-साथ अस्पतालों की जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है।