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MLC देवेंद्र की खामोशी ने बढ़ाई भाजपा प्रत्याशी की चिंता: नाराजगी जता रहे समर्थक; दो बार घर पर मनाने पहुंचे ध्रुव त्रिपाठी - Gorakhpur News

October 13, 2026

गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए शिक्षकों का बड़ा सम्मेलन गोरखपुर में आयोजित किया गया। जिस तरह का भाषण मुख्यमंत्री ने यहां दिया, उससे शिक्षक प्रभावित भी नजर आए

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देवेंद्र सिंह इस मामले में पूरी तरह से खामोश हैं लेकिन उनके समर्थक अपनी नाराजगी खुलकर व्यक्त कर रहे हैं। सोशल मीडिया के साथ शिक्षकों के वाट्सएप ग्रुपों पर भी इस अपमान को लेकर शिक्षक अपनी नाराजगी प्रकट कर रहे हैं। इधर, देवेंद्र सिंह की इस खामोशी ने भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी की चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों की मानें तो ध्रुव दो सोमवार शाम एवं मंगलवार को सुबह देवेंद्र सिंह के आवास जा चुके हैं लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। फोन कॉल का भी कोई जवाब नहीं आया।

भाजपा के शिक्षक सम्मेलन में एमएलसी देवेंद्र सिंह के कथित अपमान के बाद भाजपा प्रत्याशी की मुसीबत बढ़ गई है।

भाजपा के शिक्षक सम्मेलन में एमएलसी देवेंद्र सिंह के कथित अपमान के बाद भाजपा प्रत्याशी की मुसीबत बढ़ गई है।

पहले जानिए क्या है मामला

शिक्षक एमएलसी चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी के पक्ष में विशाल शिक्षक सम्मेलन का आयोजन महंत दिग्विजयनाथ पार्क में किया गया था। इसमे मुख्यमंत्री का संबोधन होना था। लेकिन मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में पहुंचने से कुछ देर पहले वहां गोरखपुर-फैजाबाद खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह वहां पहुंचे।

कई लोगों से मिलते हुए वह मंच की ओर जा रहे थे। चर्चा है कि भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष ने उन्हें यह कहते हुए मंच पर जाने से रोक दिया कि विधायकों के बैठने की व्यवस्था नीचे है। इसपर देवेंद्र सिंह ने कुछ जवाब दिया। भाजपा सूत्रों की मानें तो इसके बाद क्षेत्रीय अध्यक्ष नाराज हो गए और देवेंद्र सिंह को काफी खरी-खोटी सुनाई। आरोप है कि क्षेत्रीय अध्यक्ष ने यहां तक कहा कि ''तुम्हारे जैसे बहुत विधायक देखे हैं।'' देवेंद्र सिंह वहां से चुपचाप निकल गए। उनके समर्थकों का कहना है कि इस अपमान से वह काफी आहत हैं।

खुलकर बोलने वाले देवेंद्र सिंह की खामोशी चर्चा में

देवेंद्र प्रताप सिंह छात्र राजनीति की उपज हैं। विभिन्न मुद्दों पर बेबाक बोलने के लिए जाने जाते हैं। कोई बात उनको नागवार लगती है तो उसपर खुलकर अपनी बात रखते हैं। जरूरत पड़े तो सरकार के खिलाफ बोलने में भी नहीं चूकते। लेकिन इस मुद्दे पर घटना के बाद से ही चुप्पी साधे हैं। मीडिया का फोन भी नहीं उठा रहे और समर्थकों से भी खुलकर बात नहीं कर रहे। सूत्रों की मानें तो देवेंद्र सिंह मतदान तक सार्वजनिक रूप से कहीं नजर भी नहीं आने वाले। लेकिन उनकी इस खामोशी को उनके समर्थकों ने समझ लिया है। इसको लेकर वे अपनी नाराजगी भी जता रहे हैं।

कथित अपमान की खबरों के बाद एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह की कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है।

कथित अपमान की खबरों के बाद एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह की कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है।

अब जानिए भाजपा प्रत्याशी की चिंता क्यों बढ़ी है

जिस क्षेत्र से ध्रुव कुमार त्रिपाठी 3 बार एमएलसी रह चुके हैं, उसी क्षेत्र से देवेंद्र सिंह भी स्नातक निर्वाचन का चुनाव लड़ते हैं। 5 चुनाव लड़ चुके हैं और 4 बार उन्हें जीत मिली है। सपा में रहे हों या भाजपा में, 2004 के चुनाव को छोड़कर हर बार विजयी रहे। अपने मतदाताओं के लिए किसी से भी भिड़ जाने वाली उनकी छवि बनी है। सरकार के खिलाफ जाने में भी नहीं चूकते, इसलिए इस क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 17 जिलों में उनका प्रभाव है। चूंकि स्नातक के चुनाव में भी अधिकतर शिक्षक मतदाता होते हैं इसलिए शिक्षकों के बीच भी उनकी अच्छी पकड़ है। भाजपा से जुड़े होने के कारण चुनाव के मामले में देवेंद्र सिंह खुलकर भले न कुछ बोलें लेकिन उनकी नाराजगी की खबर जंगल में आग की तरह सभी 17 जिलों में फैल चुकी है।

वरिष्ठ पत्रकार आलोक दूबे बताते हैं कि देवेंद्र सिंह ने इस मामले में रिएक्शन दिया होता तो उसकी काट में भाजपा के पदाधिकारी कुछ बोलते लेकिन जब उन्होंने चुप्पी साध ली है तो उनको लेकर कोई कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। उनके बारे में कोई कुछ बोलेगा तो भाजपा का और नुकसान होगा। जिस तरह से उन्होंने खामोशी ओढ़ रखी है, इससे उनके कई समर्थक भी आहत हो रहे हैं और वे अपने स्तर से अपनी नाराजगी प्रकट कर रहे हैं। इसके कारण भाजपा प्रत्याशी की चिंता बढ़ना लाजिमी है।

मनाने की कोशिशें हो रहीं फेल

भाजपा की ओर से देवेंद्र सिंह को मनाने की कोशिशें फेल हो रही हैं। हालांकि मामला क्षेत्रीय अध्यक्ष से जुड़ा होने के कारण कोई बड़ा पदाधिकारी खुलकर कुछ नहीं कह रहा है इसलिए प्रत्याशी ध्रुव त्रिपाठी ने खुद यह जिम्मेदारी ली है। वह दो बार उनके घर भी जा चुके हैं लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। दर्जनों बार फोन कर चुके हैं लेकिन फोन भी नहीं उठ रहा। अब ऐसे लोगों को तलाश किया जा रहा है जो इस मामले में देवेंद्र सिंह की खामोशी दूर कर सकें और भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में कोई बयान जारी करा सकें।

भाजपा के शिक्षक सम्मेलन में 17 जिलों से शिक्षकों को जुटाया गया था।

भाजपा के शिक्षक सम्मेलन में 17 जिलों से शिक्षकों को जुटाया गया था।

जानिए कौन हैं देवेंद्र प्रताप सिंह

देवेंद्र प्रताप सिंह, गोरखपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित गांव भौवापार के मूल निवासी हैं। उन्होंने छात्रनेता के रूप में अपनी राजनीतिक पारी शुरू की थी। छात्र आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। हालांकि वह छात्रसंघ पदाधिकारी नहीं रहे लेकिन अपने जुझारूपन के नाते जाने जाते थे। उन्होंने औपचारिक राजनीति सपा के साथ शुरू की। 1998 में सपा ने उन्हें गोरखपुर-फैजाबाद खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया और वह जीत गए।

2004 में भाजपा ने यहां के प्रतिष्ठित डॉक्टर वाईडी सिंह को प्रत्याशी बनाया। उन्हें जिताने के लिए तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ ने भी खूब जोर लगाया। डा. वाईडी सिंह चुनाव जीत गए। 2010 में एक बार फिर देवेंद्र सिंह सपा के टिकट पर मैदान में थे। इस बार उन्होंने क्षेत्र में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली। वह चुनाव जीत गए। लेकिन अखिलेश सरकार में ही युवाओं एवं उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग से जुड़े मुद्दों पर लगातार सवाल उठाने के कारण वह सपा से अलग हो गए। 2015 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ले ली। 2017 का स्नातक निर्वाचन का चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़े और जीते। 2023 का चुनाव भी वह भाजपा के टिकट पर लड़े और जीते। उन्हें इस निर्वाचन क्षेत्र का माहिर राजनीतिक खिलाड़ी माना जाता है।