उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में डॉक्टरों ने चिकित्सा जगत में एक अद्भुत इतिहास रच दिया है। डालीगंज स्थित एक निजी अस्पताल में महज 26 सप्ताह की गर्भावस्था में केवल 480 ग्राम वजन के साथ जन्मी एक प्रीमेच्योर बच्ची को डॉक्टरों ने 84 दिनों तक वेंटिलेटर पर रखकर मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।
लखीमपुर खीरी के पलिया की रहने वाली अर्चना ने बीते 23 अप्रैल को प्रीमेच्योर बच्ची को जन्म दिया था।
- Published: 18 Jul 2026, 08:20 AM IST
- Last Updated: 18 Jul 2026, 08:21 AM IST
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चिकित्सा क्षेत्र से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसे डॉक्टर किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं। लखनऊ के डालीगंज स्थित चिल्ड्रन्स मेडिकल सेंटर के डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की अथक मेहनत, अटूट समर्पण और अत्याधुनिक चिकित्सा प्रणाली के समन्वय से एक नवजात शिशु ने जिंदगी की जंग जीत ली है।
महज 26 सप्ताह की बेहद कम गर्भावस्था में पैदा हुई इस बच्ची का वजन जन्म के समय सिर्फ 480 ग्राम था, जो सामान्य बच्चों के मुकाबले बेहद कम और अत्यंत नाजुक श्रेणी में आता है। बच्ची की नाजुक हालत को देखते हुए उसे तुरंत NICU में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया, जहां उसने लगातार 84 दिनों तक संघर्ष किया।
लखीमपुर खीरी के पलिया निवासी अर्चना ने दिया था असमय जन्म; बेहद नाजुक हालत के बीच बार-बार चढ़ाना पड़ा खून
अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. आशुतोष वर्मा के अनुसार, लखीमपुर खीरी जिले के पलिया क्षेत्र की रहने वाली अर्चना ने बीते 23 अप्रैल को प्रीमेच्योर बच्ची को जन्म दिया था। जन्म के तत्काल बाद ही नवजात की शारीरिक स्थिति अत्यंत चिंताजनक थी, क्योंकि उसके कई आंतरिक अंग पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाए थे। बच्ची की सांसों को चलाने और उसे जीवित रखने के लिए डॉक्टरों के सामने बेहद गंभीर चुनौती थी। इलाज की इस लंबी और जटिल प्रक्रिया के दौरान बच्ची की हालत में कई बार उतार-चढ़ाव आए, जिसके कारण डॉक्टरों को उसे कई बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी करना पड़ा।
84 दिनों के बाद वजन बढ़कर हुआ 770 ग्राम; बिना किसी ऑक्सीजन सपोर्ट के सामान्य रूप से सांस ले रही है मासूम
डॉक्टरों और एनआईसीयू की विशेष टीम की चौबीसों घंटे की कड़ी निगरानी और सटीक इलाज के बाद आखिरकार 84 दिनों के लंबे अंतराल के बाद मासूम पूरी तरह से रिकवर हो चुकी है। सबसे राहत की बात यह है कि जन्म के समय 480 ग्राम वजन वाली यह बच्ची अब स्वस्थ होकर 770 ग्राम की हो चुकी है। डॉक्टरों ने बताया कि वर्तमान में बच्ची के सभी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मानक पूरी तरह से सामान्य हैं।
वह अब बिना किसी कृत्रिम ऑक्सीजन या वेंटिलेटर सपोर्ट के खुद से सामान्य रूप से सांस ले रही है और हर तीन घंटे में नियमित रूप से दूध भी पी रही है। पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने बच्ची को उसके माता-पिता को सौंपते हुए डिस्चार्ज कर दिया है, जिससे इस परिवार में भारी खुशियों का माहौल है।