उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बहुजन समाज पार्टी बसपा की सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को लेकर बड़ा और सख्त निर्णय लिया है। एक आधिकारिक प्रेस-विज्ञप्ति जारी करते हुए मायावती ने स्पष्ट किया कि आकाश आनंद को अभी राजनीतिक रूप से और अधिक परिपक्व मैच्योर होने की आवश्यकता है, इसलिए जब तक वह पूरी तरह तैयार नहीं हो जाते, उन्हें पार्टी की कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाएगी। इस बयान के तुरंत बाद आकाश आनंद ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल से राष्ट्रीय संयोजक का पद हटाकर खुद को केवल 'बसपा कार्यकर्ता' लिख लिया है।
बसपा की सुप्रीमो मायावती (file photo)
- Published: 03 Sep 2026, 04:33 PM IST
- Last Updated: 03 Sep 2026, 04:33 PM IST
लखनऊ : उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी बसपा के भीतर शीर्ष स्तर पर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद की संगठनात्मक भूमिका को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। मायावती ने सार्वजनिक बयान जारी कर कहा कि आकाश आनंद को पार्टी के भीतर काम करने की छूट जरूर है, लेकिन उन्हें अभी राजनीतिक रूप से और अधिक परिपक्व मैच्योर होने की सख्त जरूरत है। जब तक वह पूरी तरह से परिपक्वता हासिल नहीं कर लेते, तब तक उन्हें पार्टी में कोई बड़ा दायित्व या अहम पद नहीं दिया जाएगा।
संस्थापक कांशीराम के सिद्धांतों और उसूलों का दिया हवाला
बसपा सुप्रीमो ने अपने फैसले के पीछे पार्टी संस्थापक मान्यवर कांशीराम के मूल सिद्धांतों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि कांशीराम के संकल्पों की तरह उनके लिए भी बहुजन समाज का हित और कल्याण हर रिश्ते से ऊपर है। उन्होंने रेखांकित किया, "बहुजन आंदोलन का एकमात्र उद्देश्य शोषित वर्ग को शासक वर्ग में बदलना है। इस मिशन को पूरा करने के लिए मेरा न कोई अपना है और न ही कोई पराया।
बी.एस.पी. द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति-दिनांक 03.09.2026
— Mayawati (@Mayawati) September 3, 2026
(1) बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन कु. मायावती जी द्वारा आज बी.एस.पी. की आल-इण्डिया की हुई बैठक में पार्टी व मूवमेन्ट से सम्बन्धित पिछले दिये गये कार्यो की समीक्षा व कमियों को दूर करने तथा आगे के हर वर्ष सालाना…
मायावती ने स्पष्ट किया कि मान्यवर कांशीराम ने अपने परिजनों को आंदोलन में बतौर कार्यकर्ता सहयोग करने की छूट तो दी थी, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ाने या सरकार व संगठन में बड़े पदों पर बिठाने के वह सख्त खिलाफ थे। बसपा प्रमुख ने कहा कि वह आज भी कांशीराम के उसी पदचिह्न और मर्यादा पर अडिग हैं।
चुनावी नुकसान से बचाने के लिए फैसला जरूरी
मायावती ने कहा कि राजनीतिक विरोधियों द्वारा अपनाए जाने वाले 'साम, दाम, दंड, भेद' के कुचक्र से बसपा को चुनावी और संगठनात्मक नुकसान से बचाना समय की सबसे बड़ी मांग है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह तय किया है कि आकाश आनंद को फिलहाल सिर्फ एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में काम करना होगा। जब तक वह जमीनी राजनीति की बारीकियों और विरोधियों के षड्यंत्रों को भांपने में पूरी तरह दक्ष नहीं हो जाते, उन्हें शीर्ष कमान नहीं सौंपी जाएगी।
आकाश आनंद ने बदला X ट्विटर प्रोफाइल, हटाया राष्ट्रीय संयोजक का पद
मायावती के इस कड़े रुख के सामने आते ही आकाश आनंद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने आधिकारिक बायो में तत्काल बदलाव कर दिया। पहले उनके प्रोफाइल पर 'राष्ट्रीय संयोजक, बहुजन समाज पार्टी' दर्ज था, जिसे हटाकर अब उन्होंने खुद को सिर्फ 'कार्यकर्ता, बहुजन समाज पार्टी' के रूप में अपडेट किया है। इस बड़े बदलाव के बाद आकाश आनंद के समर्थक खेमे में निराशा देखी जा रही है और राजनीतिक गलियारों में बसपा के भविष्य के उत्तराधिकार को लेकर नई चर्चाएं छिड़ गई हैं।
सत्ता हासिल करना ही बहुजन मिशन का लक्ष्य
लखनऊ में आयोजित पार्टी की अखिल भारतीय स्तर की बैठक को संबोधित करते हुए मायावती ने कैडर को सक्रिय होने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कमजोर और वंचित वर्गों को उनका हक तभी मिलेगा जब वे सत्ता की चाबी अपने हाथ में लेंगे। इसके लिए सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को आपसी मतभेद भुलाकर पूरी निष्ठा के साथ 2027 की चुनावी तैयारियों में जुटने के निर्देश दिए गए हैं।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयानों पर पलटवार
बैठक के दौरान मायावती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत के अमेरिका प्रवास के दौरान दिए गए बयानों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि संघ के दावों और उसकी वास्तविक कार्यप्रणाली में जमीन-आसमान का अंतर है। आरक्षण, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और महिला अधिकारों के मुद्दे पर आरएसएस के बयान वास्तविकता से कोसों दूर हैं। मायावती ने नसीहत दी कि संघ को बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित समतामूलक और मानवतावादी संविधान की मूल भावना का अक्षरशः पालन करना चाहिए।