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LIC निवेश धोखाधड़ी मामले में रिलायंस कैपिटल के खिलाफ CBI ने दर्ज की FIR

September 18, 2026

LIC की शिकायत के अनुसार, 12 अप्रैल 2012 से 9 मार्च 2018 के बीच LIC ने रिलायंस कैपिटल की ओर से जारी किए गए पांच नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) में कुल 3,900 करोड़ रुपये का निवेश किया था

LIC की शिकायत के अनुसार, 12 अप्रैल 2012 से 9 मार्च 2018 के बीच LIC ने रिलायंस कैपिटल की ओर से जारी किए गए पांच नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) में कुल 3,900 करोड़ रुपये का निवेश किया था

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LIC

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की लिखित शिकायत के आधार पर रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (RCAP), मुंबई के खिलाफ FIR दर्ज की है. मामले में RCAP के पूर्व चेयरमैन अनिल डी. अंबानी, रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADA Group) के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर सतीश सेठ, कुछ अज्ञात लोक सेवकों और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है.

LIC की शिकायत के अनुसार, 12 अप्रैल 2012 से 9 मार्च 2018 के बीच LIC ने रिलायंस कैपिटल की ओर से जारी किए गए पांच नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) में कुल 3,900 करोड़ रुपये का निवेश किया था. ये NCDs सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों, फंडिंग जरूरतों और मौजूदा कर्ज के पुनर्वित्त के लिए जारी किए गए थे. CBI के मुताबिक, LIC ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत कथित तौर पर धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक कदाचार, धन की हेराफेरी/दुरुपयोग और खातों में फर्जीवाड़ा किया. आरोप है कि LIC को गलत जानकारी और कथित गलत प्रस्तुतीकरण के जरिए RCAP में निवेश के लिए प्रेरित किया गया और इसके बाद निवेश की गई रकम को कथित तौर पर दूसरी जगह डायवर्ट कर दिया गया.

शिकायत में LIC ने आरोप लगाया है कि इस कथित धोखाधड़ी और धन के दुरुपयोग से उसे 2,684.57 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि आरोपियों और अन्य लाभार्थियों को इसके अनुरूप अनुचित आर्थिक लाभ मिला.

फंड के इस्तेमाल और डायवर्जन की जांच

CBI ने मामले की जांच शुरू कर दी है. जांच एजेंसी का फोकस इस बात पर रहेगा कि पूरे मामले में किन-किन लोगों की भूमिका थी, आपराधिक साजिश में कौन शामिल था और LIC से प्राप्त निवेश की रकम का वास्तविक इस्तेमाल कहां किया गया. जांच में कथित तौर पर फंड डायवर्जन के रास्ते और अंतिम लाभार्थियों का भी पता लगाया जाएगा. CBI अज्ञात लोक सेवकों और निजी व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच करेगी. एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि निवेश से जुड़ी प्रक्रिया में कहीं नियमों का उल्लंघन, मिलीभगत या आपराधिक साजिश तो नहीं हुई.

रिलायंस समूह की कंपनियों के खिलाफ पहले भी मामले

CBI के अनुसार, इससे पहले भी विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) और LIC से प्राप्त शिकायतों के आधार पर रिलायंस समूह से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ 8 FIR दर्ज की जा चुकी हैं. इन मामलों में Reliance Communications Ltd. (RCom), Reliance Capital Ltd. (RCAP), Reliance Home Finance Ltd. (RHFL), Reliance Commercial Finance Ltd. (RCFL) और Reliance Telecom Ltd. (RTL) शामिल हैं. CBI के मुताबिक, इन मामलों में अब तक 6 चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं और 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. ये मामले अभी जांच के दायरे में हैं और इनकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा की जा रही है.

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