Published: Sunday, August 9, 2026, 23:12 [IST]
Karnataka Tamil Nadu Border Closed: कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच एक बार फिर सीमा विवाद और कावेरी जल को लेकर तनाव बढ़ता दिख रहा है। कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ता वाटाल नागराज ने 10 अगस्त को कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर स्थित अत्तिबेले में प्रदर्शन और बॉर्डर बंद करने का ऐलान किया है। यह कदम 13 अगस्त को प्रस्तावित राज्यव्यापी कर्नाटक बंद से पहले तमिलनाडु पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि 10 अगस्त को बॉर्डर बंद रखने की घोषणा कन्नड़ कार्यकर्ताओं की ओर से की गई है। इसे अभी सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा को बंद करने का आदेश नहीं माना जाना चाहिए। अत्तिबेले-होसुर सीमा पहले भी कन्नड़ संगठनों के विरोध प्रदर्शनों का केंद्र रही है। जुलाई में भी मेकेदातु परियोजना को लेकर यहां बंद का आह्वान किया गया था।
10 अगस्त को क्या होगा?
वाटाल नागराज के मुताबिक, सोमवार यानी 10 अगस्त को सुबह 11 बजे कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ता अत्तिबेले में अंतरराज्यीय सीमा पर प्रदर्शन करेंगे। उनका दावा है कि इस दौरान तमिलनाडु से कर्नाटक आने वाले वाहनों को सीमा पार नहीं करने दिया जाएगा।
इसी तरह कर्नाटक से तमिलनाडु जाने वाले वाहनों को भी रोकने की बात कही गई है। यानी कार्यकर्ताओं की घोषणा के मुताबिक, कुछ समय के लिए अत्तिबेले-होसुर मार्ग पर यातायात प्रभावित हो सकता है। अत्तिबेले कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच एक महत्वपूर्ण सड़क संपर्क बिंदु है। यह बेंगलुरु-होसुर कॉरिडोर पर स्थित है और राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के जरिए दोनों राज्यों के बीच भारी मात्रा में यातायात चलता है।
इसलिए अगर प्रदर्शन के दौरान सड़क पर वाहनों को रोका जाता है तो इसका असर रोजाना सफर करने वाले लोगों, बसों, मालवाहक वाहनों और दूसरे अंतरराज्यीय यातायात पर पड़ सकता है।
10 अगस्त को ही क्यों किया गया बॉर्डर बंद का ऐलान?
वाटाल नागराज के मुताबिक, 10 अगस्त का प्रदर्शन 13 अगस्त को होने वाले राज्यव्यापी कर्नाटक बंद से पहले तमिलनाडु को चेतावनी देने के लिए किया जा रहा है।
नागराज ने 13 अगस्त को कर्नाटक बंद का आह्वान किया है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस बंद के पीछे कावेरी जल बंटवारे, महादयी परियोजना और बेलगावी को कर्नाटक का अभिन्न हिस्सा घोषित करने जैसी मांगें शामिल हैं। वहीं, कन्नड़ कार्यकर्ताओं की ओर से मेकेदातु परियोजना का मुद्दा भी लगातार उठाया जा रहा है। जुलाई में भी अत्तिबेले-होसुर बॉर्डर पर मेकेदातु के समर्थन में बंद का आह्वान किया गया था।
पर्दे के पीछे क्या है असली विवाद?
कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी नदी के पानी का विवाद दशकों पुराना है। कर्नाटक का कहना है कि उसे अपने किसानों और बेंगलुरु जैसे शहरों की जरूरतों के लिए पर्याप्त जल संसाधन चाहिए। वहीं तमिलनाडु कावेरी के पानी पर अपने हिस्से और डेल्टा क्षेत्र की कृषि जरूरतों को लेकर लगातार चिंता जताता रहा है।
इसी विवाद से जुड़ी मेकेदातु परियोजना भी दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक और जल संसाधन विवाद का बड़ा मुद्दा है। कर्नाटक इस परियोजना को मुख्य रूप से बेंगलुरु की पेयजल जरूरतों से जोड़ता है, जबकि तमिलनाडु को आशंका है कि इससे राज्य में आने वाले कावेरी जल के प्रवाह पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा कर्नाटक में महादयी और कलासा-बंदूरी परियोजनाएं भी लंबे समय से क्षेत्रीय राजनीति का मुद्दा रही हैं।
13 अगस्त को कर्नाटक बंद क्यों?
वाटाल नागराज ने 13 अगस्त के राज्यव्यापी बंद का आह्वान करते हुए कई मांगें रखी हैं। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें बेलगावी को कर्नाटक का अभिन्न हिस्सा घोषित करने के लिए प्रस्ताव पारित करना, तमिलनाडु के साथ कावेरी जल बंटवारे का विरोध और महादयी परियोजना को लागू करने की मांग शामिल है। नागराज का दावा है कि बड़ी संख्या में कन्नड़ समर्थक संगठन इस बंद का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने पहले मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की बंद वापस लेने की अपील को भी स्वीकार नहीं किया था।