अध्यात्म
- Authored by: मोहित तिवारी
- Updated Aug 9, 2026, 10:50 AM IST
Kamika Ekadashi Vrat Katha 2026: आज 9 अगस्त को कामिका एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन व्रत की कथा को पढ़ने या सुनने मात्र से ब्रह्महत्या जैसे जघन्य पाप से मुक्ति मिल जाती है।
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कामिका एकादशी व्रत कथा 2026
Kamika Ekadashi Vrat Katha in Hindi (कामिका एकादशी व्रत कथा 2026) : 9 अगस्त 2026 को सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इसे कामिका एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने का विशेष महत्व होता है। एकादशी व्रत में भगवान विष्णु की आराधना के साथ व्रत कथा का श्रवण और पाठ भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार कामिका एकादशी की कथा पढ़ने या सुनने से पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत से ब्रह्म हत्या जैसे दोषों से भी मुक्ति मिल जाती है। मान्यता है कि बिना कथा के यह व्रत अधूरा रहता है। आइए जानते हैं कि कामिका एकादशी व्रत कथा क्या है।
कामिका एकादशी व्रत कथा (Kamika Ekadashi Vrat Katha)
कथा के अनुसार एक बार अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के बारे में पूछा। अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से इस एकादशी का नाम, व्रत विधि, पूजा किए जाने वाले देवता और व्रत से मिलने वाले फल के बारे में जानना चाहा। इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया कि श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। इसके बाद उन्होंने इस एकादशी की महिमा और व्रत कथा का वर्णन किया।
कथा के अनुसार एक गांव में एक वीर क्षत्रिय रहता था। एक दिन किसी कारण से उसका एक ब्राह्मण के साथ विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों के बीच हाथापाई होने लगी और इस दौरान ब्राह्मण की मृत्यु हो गई। ब्राह्मण की मृत्यु के बाद क्षत्रिय ने उसके अंतिम संस्कार में शामिल होने और क्रिया-कर्म करने की इच्छा जताई, लेकिन वहां मौजूद ब्राह्मणों ने उसे क्रिया में शामिल होने से रोक दिया। ब्राह्मणों ने क्षत्रिय से कहा कि उसके ऊपर ब्रह्म हत्या का दोष लग चुका है। पहले उसे इस पाप का प्रायश्चित करके इससे मुक्त होना होगा। इसके बाद ही ब्राह्मण उसके घर भोजन करेंगे।
ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति के लिए किया कामिका एकादशी का व्रत
क्षत्रिय ने ब्राह्मणों से पाप से मुक्ति का उपाय पूछा, तब उन्होंने उसे श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। ब्राह्मणों ने बताया कि कामिका एकादशी पर भगवान श्रीधर का भक्तिभाव से व्रत और पूजन करना चाहिए। इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा देनी चाहिए और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। क्षत्रिय ने ब्राह्मणों द्वारा बताए गए विधान के अनुसार कामिका एकादशी का व्रत किया और भगवान श्रीधर की पूजा की।
भगवान श्रीधर ने दिए क्षत्रिय को दर्शन
व्रत की रात भगवान श्रीधर ने क्षत्रिय को दर्शन दिए। भगवान ने उसे बताया कि वह ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्त हो चुका है। कामिका एकादशी के व्रत और भगवान श्रीधर की आराधना के प्रभाव से क्षत्रिय को अपने पाप से मुक्ति प्राप्त हुई। इसके बाद कथा में इस व्रत की महिमा बताते हुए कहा गया है कि कामिका एकादशी के व्रत से ब्रह्म हत्या सहित अनेक पाप नष्ट हो जाते हैं।
भीष्म पितामह ने नारद जी को सुनाई थी कथा
भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया कि एक समय नारद जी ने भीष्म पितामह से श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी की कथा सुनाने का आग्रह किया। नारद जी ने कहा कि वह इस एकादशी की कथा और इसके व्रत का विधान जानना चाहते हैं। नारद जी की इच्छा सुनकर भीष्म पितामह ने कामिका एकादशी का महत्व बताना शुरू किया। उन्होंने बताया कि श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है।
भीष्म पितामह ने नारद जी को बताया कि कामिका एकादशी की कथा सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ के फल की प्राप्ति बताई गई है। इस दिन शंख, चक्र और गदा धारण करने वाले भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। धूप, दीप और नैवेद्य से भगवान विष्णु की पूजा करने वाले भक्तों को गंगा स्नान से भी उत्तम फल प्राप्त होने की बात कही गई है। सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के समय केदार और कुरुक्षेत्र में स्नान से मिलने वाले पुण्य की तुलना भी कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा से की गई है।
कामिका एकादशी पर तुलसी दल करना चाहिए अर्पित
भीष्म पितामह द्वारा बताई गई कथा में भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्तिभाव से तुलसी दल से भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसके पाप नष्ट हो जाते हैं। कथा में तुलसी दल से भगवान श्रीहरि की पूजा को सोने और चांदी के दान के बराबर फल देने वाला बताया गया है। भगवान विष्णु को रत्न, मोती और मणियों से बने आभूषणों की तुलना में तुलसी दल अधिक प्रिय बताया गया है।
कामिका एकादशी पर करें दीपदान और जागरण
कामिका एकादशी की रात जागरण और दीपदान का भी विशेष महत्व बताया गया है। कथा के अनुसार जो व्यक्ति इस रात जागरण करता है और भगवान के सामने दीपदान करता है, उसके पुण्य का पूरा वर्णन करना भी चित्रगुप्त के लिए कठिन बताया गया है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु के सामने घी या तिल के तेल का दीपक जलाने वाले व्यक्ति को भी विशेष पुण्य प्राप्त होने की बात कही गई है। कथा में कहा गया है कि ऐसे व्यक्ति के पितर स्वर्गलोक में अमृत का पान करते हैं।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी पौराणिक ग्रंथों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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मोहित तिवारीauthor
मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।
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