कल का मौसम, 31 जुलाई: मौसम वैज्ञानिकों ने इस बार अलनीनो और सुपर अलनीनो के सक्रिय होने की आशंका जताई थी, जिससे मानसून पर बुरा असर पड़ने का खतरा था. हालांकि, भारत के अलग-अलग हिस्सों में मानसून की मौजूदा स्थिति कुछ अलग ही कहानी बयां कर रही है. देश भर में हो रही मूसलाधार बारिश ने कई राज्यों में जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त कर दिया है. छत्तीसगढ़ के मध्य भागों और उससे सटे उड़ीसा के उत्तरी अंदरूनी क्षेत्रों में बने गहरे दबाव के कारण मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगड़ गया है. मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन से चार दिनों के दौरान उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में मानसून सामान्य से अधिक सक्रिय रहने वाला है.
कई राज्यों के लिए मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए एक और चिंताजनक अलर्ट जारी किया है. उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, छत्तीसगढ़, गुजरात और पूर्वोत्तर के राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है. इस दौरान चालीस से अस्सी किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और कई स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने का भी खतरा जताया गया है. कम समय में बहुत ज्यादा बारिश होने के कारण निचले इलाकों में जलभराव, बाढ़, भूस्खलन और रेल तथा सड़क यातायात प्रभावित होने की पूरी आशंका है.
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दिल्ली एनसीआर में बारिश और उमस का असर
राजधानी दिल्ली और आसपास के पूरे एनसीआर क्षेत्र के लिए मौसम विभाग ने भारी बारिश और तूफान की चेतावनी जारी की है. दिल्ली में अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25 से छब्बीस डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है. तापमान बहुत ज्यादा नहीं रहेगा, लेकिन हवा में मौजूद नमी और उमस लोगों को काफी परेशान कर सकती है. आसमान में बादल छाए रहेंगे और हल्की बूंदाबांदी से उमस में थोड़ी राहत मिल सकती है. हालांकि, आंधी और बिजली चमकने की आशंका को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
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— India Meteorological Department (@Indiametdept) July 30, 2026
उत्तर प्रदेश और बिहार में मौसम का हाल
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने वाला है. मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, बिजनौर, बागपत, गाजियाबाद, अलीगढ़, आगरा और बरेली जैसे जिलों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है. वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश के लखनऊ, सीतापुर, अयोध्या, गोंडा, बस्ती, गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं. बिहार में फिलहाल मानसून की रफ्तार थोड़ी सुस्त दिख रही थी, लेकिन अब वहां भी मानसूनी गतिविधियां तेज होने वाली हैं. उत्तर बिहार, सीमांचल और दक्षिण बिहार के अधिकांश जिलों में तेज हवाओं और गरज चमक के साथ अच्छी बारिश का पूर्वानुमान है.
असम में बाढ़ से तबाही और तिनका-तिनका बिखरा जीवन
पूर्वोत्तर राज्य असम में मानसूनी बारिश ने भयानक तबाही मचाई है. राज्य के करीब सात जिले बाढ़ की गंभीर चपेट में हैं. शिवसागर, गोलाघाट, नगांव, कामरूप और विश्वनाथ जैसे इलाकों में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है. बाढ़ की वजह से अब तक अठहत्तर लोगों की जान जा चुकी है और तीन लाख से अधिक लोग इससे प्रभावित हुए हैं. सैकड़ों गांव जलमग्न हैं और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूब चुकी है. हालांकि, अब धीरे-धीरे पानी उतर रहा है, लेकिन पानी घटने के बाद जो परेशानियां सामने आ रही हैं, वे लोगों को और ज्यादा डरा रही हैं. सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री और आर्थिक सहायता पहुंचाई जा रही है.
गुजरात में रेड अलर्ट जारी
गुजरात बारिश अलर्ट: मौसम विभाग ने 31 जुलाई के लिए अहमदाबाद समेत गुजरात के कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है. विभाग के अनुसार इन इलाकों में अत्यधिक भारी और असामान्य बारिश हो सकती है. 2 अगस्त तक कई जगह भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी है, जबकि अगले एक सप्ताह तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने का अनुमान है.
पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन का खतरा
पहाड़ी राज्यों में बारिश के बाद भूस्खलन की घटनाएं बड़ी समस्या बन गई हैं. जम्मू कश्मीर के डोडा, किश्तवाड़ और रामबन इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है. पहाड़ों से ढहते मलबे और पत्थरों के कारण सड़कों पर खतरा बढ़ गया है. उधर, उत्तराखंड के चमोली जिले में बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं. बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर भानेर पानी के पास भारी मलबा आ जाने से रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है, जिससे बद्रीनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
प्रशासन की सतर्कता और अपील
पहाड़ी और मैदानी इलाकों में लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है. जम्मू कश्मीर राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही को बनाए रखने के लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है, क्योंकि यह मार्ग कश्मीर घाटी को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है. उत्तराखंड में भी सड़कों से मलबा हटाने के लिए लगातार मशीनें काम कर रही हैं. प्रशासन ने आम जनता और यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम संबंधी चेतावनियों को ध्यान में रखकर ही यात्रा करें और अनावश्यक रूप से जोखिम भरे इलाकों में जाने से बचें.
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