Jharkhand Protest: झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों और हेमंत सोरेन सरकार के बीच अहम बातचीत शुरू हुई है.
Jharkhand Protest: झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों और हेमंत सोरेन सरकार के बीच अहम बातचीत शुरू हुई है.
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Ranchi Guest house Photograph: (ANI)
Jharkhand Protest: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का गुस्सा अब सडकों पर साफ नजर आ रहा है. JPSC और JSSC परीक्षाओं में हुई कथित धांधली के आरोपों को लेकर आंदोलनरत छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया है. हेमंत सोरेन सरकार द्वारा गठित चार मंत्रियों के विशेष पैनल और 10 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल के बीच पहले दौर की बैठक स्टेट गेस्ट हाउस में संपन्न हुई. घंटों चली इस बैठक के बाद बाहर निकले छात्र नेताओं ने इसे बेहद सकारात्मक और पारिवारिक माहौल में हुई वार्ता करार दिया है. हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि जब तक उनकी सभी मांगों पर लिखित या ठोस भरोसा नहीं मिलता, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन पूरी मजबूती से जारी रहेगा.
मंत्रियों के पैनल ने सुनी अभ्यर्थियों की आवाज
झारखंड में पिछले लंबे समय से JPSC और JSSC की परीक्षाओं में गड़बड़ियों के आरोप लग रहे हैं. लाखों युवा अपनी मांगों को लेकर सडकों पर उतरे हुए हैं. छात्रों के बढ़ते जनआक्रोश को देखते हुए हेमंत सोरेन सरकार ने मामले को शांत करने और युवाओं का पक्ष सुनने के लिए चार प्रमुख मंत्रियों की एक समिति बनाई. इस पैनल में झामुमो से चमरा लिंडा और सुदिव्य कुमार सोनू, कांग्रेस से दीपिका पांडेय सिंह और राजद से संजय प्रसाद यादव शामिल हैं. सरकार की इस पहल के बाद आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मुख्य छात्र समूह ने 10 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल तय किया, जिसने स्टेट गेस्ट हाउस पहुंचकर मंत्रियों के सामने छात्रों का पक्ष मजबूती से रखा.
छात्रों का 10 सदस्यीय डेलिगेशन और उनकी मांगें
इस वार्ता में शामिल होने वाले छात्र प्रतिनिधिमंडल में रवीन्द्र पासवान, पीयूष कुमार, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, अंकित राज, कार्तिक सोरेन, शालू कुमारी, रवींद्र कुमार रवि, आनंद कुमार और अंकित कुमार शामिल थे. यह प्रतिनिधिमंडल आंदोलन कर रहे उस मुख्य छात्र समूह से संबंध रखता है, जो देवेंद्र महतो के गुट से अलग होकर अपनी मांगों को लेकर सीधे सरकार से संवाद कर रहा है. बैठक के दौरान छात्रों ने परीक्षाओं में पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने, धांधली की जांच कराने और अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड बंद करने जैसी महत्वपूर्ण मांगों को मंत्रियों के समक्ष रखा.
पारिवारिक माहौल में हुई चर्चा और आगे का भरोसा
बैठक समाप्त होने के बाद छात्र नेता रवीन्द्र पासवान ने मीडिया से बातचीत करते हुए पहली मुलाकात के अनुभव साझा किए. उन्होंने कहा कि मंत्रियों के साथ हुई यह पहली बैठक बहुत ही सकारात्मक रही. वार्ता के दौरान माहौल एकदम पारिवारिक लगा और मंत्रियों ने उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुना. रवीन्द्र पासवान ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी कैबिनेट युवाओं की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से उन्हें सकारात्मक संकेत मिले हैं और जल्द ही अगले दौर की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें मुख्यमंत्री तक उनका संदेश पहुंचाकर आगे का रास्ता निकाला जाएगा.
एक भी मांग अधूरी रही तो आंदोलन रहेगा जारी
इस सकारात्मक बातचीत के बावजूद छात्र नेताओं का रुख अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह सख्त है. बैठक में जाने से पहले भी छात्र प्रतिनिधि रवीन्द्र पासवान ने मीडिया के माध्यम से झारखंड के लाखों युवाओं को आश्वस्त किया था कि वे पूरे प्रदेश के छात्रों के प्रतिनिधि बनकर जा रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट कहा था कि प्रतिनिधिमंडल जिन मांगों को लेकर टेबल पर बैठा है, वे सभी अनिवार्य हैं. यदि सरकार उनकी एक भी मांग को नजरअंदाज करती है या पूरा करने से पीछे हटती है, तो छात्र इस वार्ता को सफल नहीं मानेंगे और सडकों पर जारी धरना-प्रदर्शन को रोकेंगे नहीं.
विधानसभा मार्च और आगे की रणनीति पर फैसला
कोर कमेटी के सदस्यों ने भी बैठक के बाद यह स्पष्ट कर दिया है कि भले ही मंत्रियों का रवैया सहयोगात्मक रहा हो, लेकिन छात्रों को मौखिक बातों की जगह ठोस और लिखित आश्वासन की जरूरत है. मंत्रियों ने आश्वासन दिया है कि वे छात्रों का पूरा मांग पत्र मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक पहुंचाएंगे और जल्द ही दोबारा बैठक बुलाएंगे. छात्र समूह का कहना है कि जब तक सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक और ठोस फैसला सामने नहीं आता, तब तक उनका प्रोटेस्ट मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार चलता रहेगा. छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि अगली बैठक में सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है, तो वे 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव मार्च पर विचार करेंगे.
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