Updated On: Jul 14, 2026 | 09:48 AM IST
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सार
Jagannath Temple Land: ओडिशा सरकार ने भगवान जगन्नाथ की जमीनों की सुरक्षा व बेहतर प्रबंधन के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। 11,675 लंबित राजस्व मामलों का जल्द से जल्द निपटारा किया जाएगा।

भगवान जगन्नाथ मंदिर (सोर्स- सोशल मीडिया)
विस्तार
Odisha Govt On Jagannath Temple Land: ओडिशा सरकार ने भगवान श्री जगन्नाथ की जमीनों की सुरक्षा, रखरखाव और बेहतर प्रबंधन को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य के सभी राजस्व अधिकारियों को बहुत व्यापक निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने इस पवित्र मंदिर की भूमि के प्रभावी संरक्षण और पूरी तरह से कानूनी तरीके से उचित प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी और समयबद्ध ठोस कार्रवाई करने को स्पष्ट रूप से कहा है। राज्य सरकार की यह नई और बड़ी पहल संपत्तियों के बेहतरीन संरक्षण में बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. अरविंद पाढ़ी ने राजस्व बोर्ड, राजस्व मंडलीय आयुक्तों, जिला कलेक्टरों और भूमि अभिलेख निदेशालय को एक बहुत ही अहम पत्र लिखा है। इस जारी पत्र में भगवान जगन्नाथ की अपार संपत्तियों से जुड़े सभी पुराने और नए मामलों पर तत्काल जरूरी कार्रवाई करने के सख्त निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। यह बहुत ही अहम कदम पवित्र मंदिर की कीमती संपत्तियों को हर प्रकार के अवैध कब्जे से पूरी तरह से बचाने के लिए उठाया गया है।
लंबित राजस्व मामलों का जल्द निपटारा
डॉ. पाढ़ी ने कहा कि ओडिशा की पूरी पहचान भगवान श्री जगन्नाथ से बहुत ही गहराई से जुड़ी हुई है और उनकी इन संपत्तियों की सुरक्षा करना राज्य की बड़ी नैतिक जिम्मेदारी है। राजस्व विभाग ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की ओर से विभिन्न तहसीलों में दायर 11,675 लंबित राजस्व मामलों का जल्द ही निपटारा किया जाए। ये सभी बहुत ही अहम मामले खुर्दा, पुरी, जगतसिंहपुर, बालासोर, भद्रक, जाजपुर, गंजाम, कटक और केंद्रपाड़ा जैसे बड़े जिलों से संबंधित हैं।
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संपत्तियों के पुराने रिकॉर्ड की जांच
इसके अलावा, ओडिशा एस्टेट्स एबोलिशन एक्ट की अहम धारा 7(ए) के तहत दायर कुल 257 मामलों में राजस्व बोर्ड के आदेशों को तुरंत लागू करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। भूमि रिकॉर्ड को पूरी तरह से सही रखने के लिए अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि जरूरत पड़ने पर पुराने अधिकार अभिलेख के रिकॉर्ड की अच्छी तरह जांच की जाए। इसका मुख्य उद्देश्य खेवट प्रविष्टियों में जरूरी सुधार करना और पवित्र मंदिर की सभी दान संपत्तियों को कानून के अनुसार पूरी तरह से दर्ज करना है।
अवैध कब्जे और सभी फर्जी दावों पर रोक
भगवान जगन्नाथ की जमीनों की सही पहचान, उचित सत्यापन और पुख्ता सुरक्षा के लिए राजस्व निरीक्षक, अमीन और कई अनुभवी क्षेत्रीय अधिकारियों को जल्द ही वहां तैनात किया जाएगा। अवैध कब्जे, अनधिकृत उपयोग, फर्जी दावे और मंदिर की बेशकीमती संपत्तियों पर निजी हित बनाने की सभी कोशिशों को रोकने के लिए नियमित सघन निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इससे जमीन पर अवैध रूप से किए गए सभी कब्जों को बहुत ही आसानी से और हमेशा के लिए हटाया जा सकेगा।
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मासिक राजस्व बैठकों में होगी पूरी समीक्षा
राजस्व विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को यह कड़ा निर्देश दिया है कि भगवान जगन्नाथ की पवित्र भूमि से जुड़े इन सभी मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर तुरंत लिया जाए। इन मामलों की प्रगति की पूरी समीक्षा जिला, उपखंड और तहसील स्तर पर होने वाली सभी मासिक राजस्व बैठकों में बहुत ही विस्तार से की जाएगी। राज्य सरकार ने सभी जिला प्रशासन को बहुत ही सक्रिय कदम उठाने के निर्देश दिए हैं ताकि कानूनी प्रबंधन सुनिश्चित हो सके और अनावश्यक मुकदमों को कम किया जा सके।
