निसंतान इनफ्लुएंसर बहन के लिए अनोखी कांवड़: IVF के खर्च उठाने की कहानी; एक ने मुहिम चलाई तो दूसरा भोले के कंधों पर बच्चे बिठाकर ला रहा - Sonipat News
August 9, 2026
राम सिंहमार, सोनीपत1 घंटे पहले
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ईशु की कांवड़ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।
हरिद्वार की हर की पौड़ी से सोनीपत के रतनगढ़ माजरा के लिए निकली यह कांवड़ अपने आप में अनोखी है। रतनगढ़ माजरा निवासी ईशु उर्फ फौजी रतनगढ़िया कंधों पर भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा रखकर पैदल चल रहे हैं और प्रतिमा के दोनों कंधों पर एक लड़के और एक लड़की की डॉलनुमा तस्वीरें लगाई गई हैं।
यह कांवड़ किसी व्यक्तिगत मनोकामना के लिए नहीं, बल्कि अपनी मुंहबोली धर्म बहन दर्शना हरियाणवी के लिए उठाई गई है, जो करीब 12 साल से संतान की प्रतीक्षा कर रही हैं। ईशु की प्रार्थना है कि दर्शना की प्रेग्नेंसी सुरक्षित रहे और उनके घर में बच्चे की किलकारी गूंजे।
लेकिन इस कांवड़ की कहानी यहां से शुरू नहीं होती। इसके पीछे पहले एक महिला का वर्षों का दर्द, फिर उससे प्रभावित होकर एक युवक द्वारा शुरू की गई मुहिम और आखिर में उस मुहिम से जुड़े दूसरे भाई का कांवड़ उठाने का प्रण है।
एक निसंतान महिला को दो धर्म के भाईयों ने सहयोग करने के लिए अनूठा रास्ता ढूंढ़ा और पहले आईवीएफ के लिए खुद पैसे दिए और उसके मान-सम्मान को ठेस न पहुंचे इसलिए धर्म की बहन को आत्मनिर्भर बनाने का अनूठी पहल शुरू की। महिला के जीवन में एक भाई मोहित है और दूसरा ईशू है। एक ने सोशल मीडिया से मुहिम शुरू कर कर्जवान होने से बचाया तो ईशू ने बहन के लिए कांवड़ उठाकर दुआएं मांगी।
ईशु उर्फ फौजी रतनगढ़िया कंधों पर भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा रखकर पैदल चल रहे हैं और प्रतिमा के दोनों कंधों पर एक लड़के और एक लड़की की डॉलनुमा तस्वीरें लगाई गई हैं।
पहले जानिए दर्शना का दर्द, शादी के सालों बाद भी नहीं हुई संतान
निसंतान दर्शना के लिए मुहिम: दर्शना का जन्म हांसी जिले के महिंद्रगढ़ी में हुआ था और उनकी शादी भिवानी के जीता खेड़ी में हुई। शादी के कई साल गुजरने के बाद भी उनके घर में संतान नहीं हुई। संतान न होने की वजह से वह काफी निराश रहने लगीं।
दर्शना सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर भी हैं और अपने मन का दर्द अक्सर वीडियो के जरिए सोशल मीडिया पर साझा करती थीं। उनकी यही वीडियो आगे चलकर उनकी जिंदगी में एक ऐसी मुहिम की शुरुआत का कारण बनी, जिसका असर अब उनकी जिंदगी में दिखाई देने की उम्मीद है।
वीडियो देखकर मोहित हुए प्रभावित: सोनीपत निवासी मोहित ने दर्शना की सोशल मीडिया पर चल रही वीडियो देखीं। वह उनके दर्द से प्रभावित हुए। कुछ साल पहले एक गौशाला के कार्यक्रम में मोहित और दर्शना की मुलाकात भी हो गई। मोहित ने बातचीत के दौरान दर्शना से उनके उदास रहने का कारण पूछा। तब दर्शना ने उन्हें अपनी संतान न होने की परेशानी बताई। बातचीत में यह भी सामने आया कि वह आर्थिक रूप से इतनी मजबूत नहीं थीं कि आईवीएफ जैसे महंगे उपचार का खर्च उठा सकें।
आईवीएफ से संभव है संतान, लेकिन खर्च बना सबसे बड़ी परेशानी: मोहित के अनुसार, उन्होंने दर्शना से कहा कि आज के समय में आईवीएफ जैसी चिकित्सा सुविधा के जरिए भी संतान प्राप्ति संभव है। लेकिन दर्शना ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए बताया कि वह इसका खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं। मोहित ने उनकी आर्थिक मदद करने की पेशकश की, लेकिन दर्शना ने किसी से पैसे लेने से मना कर दिया। यहीं से मोहित ने ऐसा रास्ता निकालने की सोची, जिसमें दर्शना को मदद भी मिले और उन्हें किसी के सामने हाथ भी न फैलाना पड़े।
हरिद्वार में भोले की प्रतिमा पर हाथ से डॉल को बांधते हुए ईशु
अनूठी मुहिम की शुरूआत इस प्रकार हुई…
मोहित ने कहा- मदद पैसे से नहीं, सोशल मीडिया से करेंगे:मोहित ने दर्शना के लिए एक अलग तरीका निकाला। उन्होंने यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर उन्हें आगे बढ़ाने और लोगों से जोड़ने की मुहिम शुरू करने का फैसला किया। लोगों से अपील की गई कि वे दर्शना को सोशल मीडिया पर फॉलो और सब्सक्राइब करें। उद्देश्य यह था कि जैसे-जैसे उनके फॉलोअर्स और सब्सक्राइबर बढ़ेंगे, सोशल मीडिया से आमदनी शुरू होगी और उस पैसे को उनके इलाज में लगाया जा सकेगा। मोहित और दर्शना के बीच यह भी सहमति बनी कि जब उनके पास पैसे आने लगेंगे तो वह अपनी क्षमता के अनुसार हर महीने 100 रुपए वापस देंगी।
आर्थिक सहारे की जगह आत्मनिर्भर बनाने पर जोर: मोहित का कहना है कि उन्होंने दर्शना को अपनी धर्म बहन बनाया है। उनका उद्देश्य सिर्फ तत्काल आर्थिक मदद करना नहीं था, बल्कि ऐसा जरिया तैयार करना था जिससे दर्शना भविष्य में अपने इलाज और दूसरी जरूरतों के लिए खुद सक्षम हो सकें। धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर लोगों का जुड़ना शुरू हुआ और मुहिम आगे बढ़ती गई।
एक सब्सक्राइबर को एक रुपया मानकर आगे बढ़ी मुहिम
सोनीपत के माेहित के अनुसार,मुहिम में एक सब्सक्राइबर को एक रुपए के बराबर माना गया। इसी के तहत दर्शना हरियाणवी के इंस्टाग्राम पर करीब एक लाख फॉलोअर्स हो चुके हैं। यूट्यूब पर भी करीब 50 हजार सब्सक्राइबर होने वाले हैं। फेसबुक पर भी लगातार फॉलोअर्स बढ़ रहे हैं।
मोहित के अनुसार, सोशल मीडिया से अब दर्शना को करीब 8 से 10 हजार रुपए की आमदनी होने लगी है। इसके अलावा कुछ प्रमोशनल काम भी मिलते हैं। उनका कहना है कि धीरे-धीरे यह आमदनी बढ़ेगी और दर्शना अपने इलाज के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहेंगी। हालांकि आईवीएफ के शुरूआती खर्च के पैसे मोहित द्वारा सहयोग के लिए दिए गए हैं और जब दर्शना ने लेने से मना किया तो हर महीने 100 रू देने की शर्त पर सहमति बनी।
आईवीएफ उपचार चल रहा, करीब छह महीने की प्रेग्नेंट हैं दर्शनार: मोहित के अनुसार, दर्शना इन दिनों आईवीएफ के जरिए अपना उपचार करवा रही हैं और करीब छह महीने की गर्भवती हैं। उनका कहना है कि करीब 12 साल बाद दर्शना मां बनने की उम्मीद में हैं।यानी जिस परेशानी से शुरू हुई थी यह मुहिम, वह अब एक उम्मीद में बदल चुकी है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। इस मुहिम से एक और भाई जुड़ा और उसने अपनी तरफ से ऐसा कदम उठाने का फैसला किया, जिसने इस पूरी कहानी को एक अलग रूप दे दिया।
अब पढ़िए ईशु ने क्या संकल्प लिया और कांवड़ उठाया…
मोहित की मुहिम देख ईशु ने कहा- बहन के लिए मैं भी कुछ करूंगा: सोनीपत के रतनगढ़ माजरा निवासी ईशु उर्फ फौजी रतनगढ़िया पहले से मोहित के संपर्क में हैं। उन्होंने दर्शना के लिए चलाई जा रही पूरी मुहिम को देखा और उससे प्रभावित हुए। ईशु के अनुसार, जब उन्होंने देखा कि मोहित अपनी धर्म बहन के इलाज और भविष्य के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं तो उनके मन में भी आया कि वह भाई के रूप में दर्शना के लिए कुछ करें। इसी सोच ने उन्हें कांवड़ उठाने का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया।
ईशु ने कांवड़ को दर्शना की संतान की मनोकामना से जोड़ दिया: ईशु ने तय किया कि वह हरिद्वार जाएंगे और भोलेनाथ से दर्शना के लिए प्रार्थना करेंगे। उन्होंने कांवड़ यात्रा को दर्शना की संतान प्राप्ति की मनोकामना से जोड़ दिया। उनका कहना है कि वह दर्शना को सोशल मीडिया पर प्रमोट करने के साथ-साथ उनकी प्रेग्नेंसी के दौरान किसी तरह का दुख-दर्द न आए, इसी प्रार्थना के साथ कांवड़ लेकर आ रहे हैं। वहीं ईशु का ये कहना है कि ये कांवड़ हर उस बहन को समर्पित है जो निसंतान है और भोले बाबा सबके घर में संतान सुख दें।
कांवड़ में बच्चों की तस्वीर लगाने के पीछे भी खास संदेशर: ईशु ने भोलेनाथ की प्रतिमा को अपने कंधों पर रखा है। प्रतिमा के दोनों कंधों पर एक लड़के और एक लड़की की डॉलनुमा तस्वीरें लगाई गई हैं। ईशु के मुताबिक, ये तस्वीरें उस संतान की खुशी का प्रतीक हैं, जिसकी दर्शना लंबे समय से प्रतीक्षा कर रही हैं। उनका संदेश है कि भोले बाबा सबके दुख-दर्द हरने वाले हैं और वह दर्शना के परिवार में भी सुख-शांति के साथ संतान की प्राप्ति की प्रार्थना कर रहे हैं।
ईशु की दूसरी कांवड़, पहली मनोकामना पढ़ाई के लिए मांगी थी: ईशु ने बताया कि यह उनकी दूसरी कांवड़ है। इससे पहले उन्होंने आईटीआई के दौरान भोले बाबा से मनोकामना मांगी थी।
उन्होंने संकल्प लिया था कि यदि आईटीआई में 70 प्रतिशत से ज्यादा अंक आए तो वह कांवड़ लेकर आएंगे। उनके 70 प्रतिशत से अधिक अंक आए और उन्होंने अपनी मनोकामना पूरी होने पर कांवड़ यात्रा की। इस बार उन्होंने अपनी मनोकामना नहीं, बल्कि अपनी धर्म बहन की खुशी को कांवड़ का उद्देश्य बनाया है।
3 अगस्त को घर से निकले, 5 अगस्त को हर की पौड़ी से जल उठाया
ईशु के अनुसार, मोहित 3 अगस्त को अपने घर से निकले थे और 5 अगस्त को हरिद्वार की हर की पौड़ी से जल उठाया गया। इसके बाद ईशु कांवड़ लेकर पैदल सोनीपत के रतनगढ़ माजरा स्थित अपने पैतृक गांव की ओर रवाना हुए। गांव पहुंचकर वह भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। यह यात्रा उनके लिए एक धार्मिक संकल्प के साथ-साथ अपनी बहन के लिए की गई प्रार्थना भी है।
रोज 35 किलोमीटर पैदल सफर, पैरों में पड़े छाले फिर भी कदम नहीं रुके
ईशु बताते हैं कि वह प्रतिदिन करीब 35 किलोमीटर पैदल चलते हैं। जब थकान होती है तो रास्ते में आराम कर लेते हैं। लगातार पैदल चलने के कारण उनके पैरों में छाले भी पड़ चुके हैं। इसके बावजूद वह यात्रा जारी रखे हुए हैं। उनका कहना है कि पैरों का दर्द वह सह लेंगे, लेकिन उनकी इच्छा है कि लंबे समय के बाद दर्शना के घर में बच्चे की किलकारी गूंजे।
कांवड़ उठाने से पहले ईशु ने हरिद्वार में भोले बाबा के चरणों में अर्जी लगाई। उनकी प्रार्थना थी कि जीवन में जो भी दुख-दर्द उनके हिस्से में हो, वह उन्हें दे दिया जाए, लेकिन उनकी मुंहबोली बहन दर्शना को किसी तरह का कष्ट न हो। उन्होंने भोलेनाथ से उनकी प्रेग्नेंसी सुरक्षित रहने और घर में सुख-शांति के साथ संतान की प्राप्ति की कामना की।
दर्शना का एक और दर्द- सगा भाई नहीं था, अब दो भाई साथ खड़े
दर्शना अक्सर इस बात को लेकर भी दुखी रहती थीं कि उनका कोई सगा भाई नहीं है। इसी कमी को मोहित ने धर्म भाई बनकर पूरा करने की कोशिश की और अब ईशु भी उनके साथ भाई के रूप में खड़े हैं। एक भाई ने सोशल मीडिया को सहारा बनाकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने की मुहिम शुरू की, तो दूसरे भाई ने भोलेनाथ के दरबार में पहुंचकर उनके लिए संतान सुख की प्रार्थना करने का प्रण लिया।
अब कांवड़ में सिर्फ जल नहीं, एक परिवार की उम्मीद भी
ईशु की कांवड़ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। लोग भोलेनाथ की प्रतिमा और उसके कंधों पर लगी बच्चों की तस्वीरों को देखकर इस कहानी से जुड़ रहे हैं। पोस्ट और वीडियो शेयर किए जा रहे हैं और ईशु की पहल की तारीफ हो रही है।
रतनगढ़ माजरा पहुंचकर जब ईशु भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे, तब उस कांवड़ के साथ एक ऐसी कहानी भी पूरी होगी, जिसकी शुरुआत दर्शना के दर्द से हुई थी, मोहित की मुहिम से आगे बढ़ी और ईशु की आस्था के जरिए हरिद्वार से सोनीपत तक पहुंची। अब इस पूरी कोशिश की मंजिल यही प्रार्थना है कि दर्शना के घर लंबे इंतजार के बाद बच्चे की किलकारी गूंजे।
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