भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने मीडिया में उसके निजीकरण या अंतरिक्ष क्षेत्र में उसकी भूमिका घटाने से जुड़ी खबरों को पूरी तरह से गलत बताया है। आइये जानते हैं कि इसरो ने क्या कहा है....
भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के अध्यक्ष पवन गोयनका ने रविवार को कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की भूमिका किसी भी तरह कम नहीं हो रही है और वह भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की आधारशिला बना रहेगा।
अंतरिक्ष विभाग के तहत एक स्वायत्त एजेंसी इन-स्पेस गैर-सरकारी संस्थाओं की विभिन्न अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने, सक्षम बनाने, अधिकृत करने और उनकी निगरानी का काम करता है।
गोयनका ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि 2020 से किए गए सुधार भारत के समग्र अंतरिक्ष परिवेशी तंत्र का विस्तार करने से जुड़े हैं। इसका उद्देश्य उद्योग को परिपक्व प्रक्षेपण यानों, उपग्रहों और अन्य प्रणालियों के निर्माण तथा बड़े पैमाने पर उत्पादन में तेजी से आगे बढ़ने का अवसर देना है। उन्होंने कहा कि वहीं, इसरो का ध्यान उन्नत अनुसंधान एवं विकास, वैज्ञानिक मिशन, रणनीतिक अभियानों, नई प्रौद्योगिकियों और ऐसे बुनियादी ढांचे पर रहेगा, जिसे निजी क्षेत्र अपने दम पर विकसित करने में सक्षम नहीं है।
गोयनका की यह टिप्पणी इसरो के नौ कर्मचारी संगठनों द्वारा अंतरिक्ष एजेंसी के अध्यक्ष वी नारायणन को पत्र लिखकर इसरो के विनिर्माण और परिचालन कार्यों को निजी संस्थाओं को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव पर आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद आई है। चार सितंबर को लिखे पत्र में कर्मचारी संगठनों ने गोयनका की 21 अगस्त की टिप्पणियों का उल्लेख किया। गोयनका ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कथित तौर पर कहा था, ''अंतत: इसरो कोई भी प्रक्षेपण यान नहीं बनाएगा और न ही किसी प्रक्षेपण यान का निर्माण करेगा। यह सब निजी क्षेत्र या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) द्वारा किया जाएगा।
दरअसल, कर्मचारी संगठनों ने दावा किया कि इन टिप्पणियों के बाद अंतरिक्ष विभाग की ओर से कोई ऐसी आधिकारिक सूचना जारी नहीं की गई जिसमें स्वीकृत नीति, उसके कानूनी और प्रशासनिक आधार, उसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की प्रक्रिया तथा मौजूदा कर्मचारियों और भविष्य की सरकारी भर्तियों पर पड़ने वाले असर को स्पष्ट किया गया हो। पत्र में कहा गया है कि इसरो द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय संपत्ति है। इसका हस्तांतरण पारदर्शी एवं जवाबदेह होना चाहिए तथा यह रणनीतिक, सुरक्षा और रोजगार संबंधी पहलुओं के अनुरूप होना चाहिए तथा कर्मचारियों को इसकी जानकारी समाचार पत्रों की खबरों के जरिये नहीं मिलनी चाहिए।
गोयनका ने रविवार को इससे पहले सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि भारत को 2030 तक हर साल 50 प्रक्षेपण के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए इसरो और निजी कंपनियों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि इतने बड़े लक्ष्य को कोई एक संगठन अकेले हासिल नहीं कर सकता।
इन-स्पेस के अध्यक्ष ने यह भी रेखांकित किया कि इसरो का अनुसंधान क्या संभव है, इसकी सीमाओं को लगातार आगे बढ़ाता रहेगा। उन्होंने कहा कि निजी उद्योग को इस गति को बड़े पैमाने पर विनिर्माण में बदलना होगा-अधिक रॉकेट, अधिक उपग्रह, अधिक प्रक्षेपण क्षमता और नई प्रौद्योगिकियां।