IRDAI ने बीमा कंपनियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों का विस्तृत डेटा लेने से रोका है, ताकि अनचाहे कॉल और डेटा बिक्री पर अंकुश लग सके। ...और पढ़ें

ग्राहक डेटा से खिलवाड़ नहीं कर सकेंगी बीमा कंपनियां। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)
HighLights
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ग्राहक डेटा लेना बंद करें बीमा कंपनियां।
मिस-सेलिंग रोकने को एजेंट की जवाबदेही तय होगी अब।
DPDP एक्ट के तहत सहमति मैनेजर रखना होगा नवंबर से।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बीमा उत्पादों की तुलना के दौरान कंपनियां तभी कोई भी जानकारी मुहैया कराती हैं जब आप उन्हें अपना विस्तृत ब्योरा देते हैं। पहले कंपनियां आपकी उम्र, फोन नंबर, ई-मेल आईडी जैसी कई महत्वपूर्ण जानकारी कंपनियां ले लेती है। इसके बाद बताती है कि कौन से बीमा उत्पाद को खरीदने के लिए कितना प्रीमियम देना होगा या कितने का इंश्योरेंस होगा।
लेकिन अब इन कंपनियों को इस प्रकार से ग्राहकों का डेटा लेना बंद करने के लिए कहा गया है। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण की तरफ से इन कंपनियों को साफ तौर पर कहा गया है कि वे ग्राहकों को जानकारी देने के बदले इस प्रकार से उनका डेटा लेना बंद करें।
डेटा लिए बगैर ही ग्राहकों को जानकारी मुहैया कराएं- इरडा
डिजिटल रूप से तुलना करने के लिए ग्राहक अपनी सारी जानकारी दे देता है और फिर उन्हें कंपनियों की तरफ से अनचाहे कॉल का सामना करना पड़ता है। यहां तक कि अन्य संस्थानों को उन डेटा को बेच दिया जाता है। इरडा ने कंपनियों से कहा है कि वे इस प्रकार का डेटा लिए बगैर ही ग्राहकों को जानकारी मुहैया कराएं।
हालांकि, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) कानून के पूर्ण रूप से लागू होने पर कंपनियां ग्राहकों के डेटा का बिना उनकी इजाजत के इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी। डीपीडीपी एक्ट को पिछले साल नवंबर में आंशिक रूप से लागू किया गया और अगले साल मध्य तक यह कानून पूर्ण रूप से लागू हो जाएगा।
डेटा लेने और इस्तेमाल के लिए कंसेंट मैनेजर रखना होगा
इस साल नवंबर से कंपनियों को किसी व्यक्ति का डेटा लेने व उसके इस्तेमाल के लिए कंसेंट (सहमति) मैनेजर रखना होगा। जानकारों का कहना है कि आम लोगों से इस प्रकार से डेटा लेने का काम शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले की जानकारी लेने के दौरान भी किया जाता है।
इरडा ग्राहकों को बीमा उत्पादों की मिस-सेलिंग (गलत दावों के साथ बिक्री) को भी लेकर गंभीर है। इरडा के नए नियम के मुताबिक, बीमा उत्पाद के प्रति जिम्मेदारी तय करने के लिए अब कंपनियों को हरेक उत्पाद के साथ उस पॉलिसी का प्रस्ताव देने वाले व बिक्री करने वाले वाले बिक्री एजेंट की जानकारी देना अनिवार्य होगा।
क्या होगा फायदा?
इसका फायदा यह होगा कि ग्राहक अगर बाद में उस उत्पाद को मिस-सेलिंग करार देता है तो यह आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि किस एजेंट ने ग्राहक को गुमराह किया।
हालांकि, बीमा जानकारों का कहना है कि सिर्फ यह जान लेने से काम नहीं चलेगा कि मिस-सेलिंग के लिए कौन व्यक्ति जिम्मेदार है, बल्कि मिस-सेलिंग करने वाले पर पेनल्टी लगाने या फिर उनके इंसेंटिव को वापस लेने जैसी कार्रवाई से ही असली जिम्मेदारी तय होगी।