Iran Israel War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 7 दिन के सीजफायर का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। इसके बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने साफ कर दिया है कि उनका देश अमेरिका और इजरायल के सामने घुटने नहीं टेकेगा। वहीं, ईरानी सेना ने भी अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य के मामले में दखल न देने की चेतावनी दी है।
Donald Trump Iran: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने साफ कर दिया है कि ईरान किसी भी कीमत पर अमेरिका और इजरायल के सामने पीछे नहीं हटेगा। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के 7 दिन के सीजफायर और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) से लौटने के बाद एयरपोर्ट पर अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए पेजेशकियन ने कहा, "हम पूरी ताकत से डटे हुए हैं। हम अपनी आखिरी सांस तक लोगों की सेवा करेंगे। जब तक हमारे शरीर में जान है, हम पीछे नहीं हटेंगे। आपने हमें जो प्यार दिया है, मैं खुद को उसके लायक नहीं मानता, मैं तो बस आपका सेवक हूं।"
ईरानी सेना ने अमेरिका को दी चेतावनी
ईरानी सेना के वरिष्ठ प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अबोलफजल शेकरची ने भी कड़े तेवर दिखाए हैं। उन्होंने ईरानी सरकारी टीवी को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान ने दुश्मन के सामने बिल्कुल भी न झुकने और उसे कुचलने का फैसला किया है।
शेकरची ने कहा कि ईरान 'असममित युद्ध' (asymmetric warfare) में दुनिया का सबसे अनुभवी देश है। उन्होंने अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन में दखल देने से बचने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, "अमेरिकियों को होर्मुज जलडमरूमध्य के मामले में दखल देने का सपना भी नहीं देखना चाहिए। अगर वे ऐसा करते हैं, तो ईरानी सेना उन्हें करारा जवाब देगी। उन्हें हमारा इलाका छोड़ देना चाहिए।" उन्होंने आगे चेतावनी दी, "ईरान के तय किए गए रूट के बाहर से जो भी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरेगा, उसकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होगी।"
जनरल शेकरची ने पड़ोसी मुस्लिम देशों को भी नसीहत देते हुए कहा, "आप लोग सुधर जाइए, अमेरिका से आपको कोई फायदा नहीं होने वाला है।"
क्या था सीजफायर का प्रस्ताव?
इससे पहले, शनिवार को अल जजीरा (Al Jazeera) को दिए एक इंटरव्यू में ईरानी राष्ट्रपति ने कहा था कि ईरान को अब अमेरिका के साथ बातचीत पर कोई भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछली बातचीत के बाद सिर्फ 'हमले' और प्रतिबंध ही मिले हैं। पेजेशकियन ने अल जजीरा से कहा, "हमें अमेरिकी पक्ष पर बिल्कुल भरोसा नहीं है और हम नहीं जानते कि उनके साथ किस आधार पर समझौता हो सकता है।"
पेजेशकियन और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची इसी हफ्ते संयुक्त राष्ट्र की बैठक के लिए अमेरिका गए थे। वहां उन्होंने युद्ध खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए 7 दिन का रोडमैप पेश किया था। इस प्रस्ताव के तहत, वाशिंगटन से ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, ईरानी तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में छूट देने, लगभग 12 अरब डॉलर (USD 12 billion) की फ्रीज की गई ईरानी संपत्ति को जारी करने और लेबनान व यमन सहित पूरे क्षेत्र में सीजफायर लागू करने की उम्मीद थी। इसके बदले में, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल देता। साथ ही, सातवें दिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ अंतिम समझौते पर बातचीत शुरू होनी थी।
अराघची ने बताया था कि शुरुआती कदमों में चार से पांच दिन लगेंगे और छठे दिन जलमार्ग को फिर से खोल दिया जाएगा।
इसके अलावा, पेजेशकियन ने शनिवार को अल जजीरा को बताया कि कतर और पाकिस्तान वाशिंगटन तक ईरान का संदेश पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बातचीत जून में दोनों पक्षों के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर आधारित थी। अमेरिका को इस समझौते पर अपना रुख साफ करने की जरूरत है, जो अब खत्म हो चुका है।
पेजेशकियन ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक करने की जिम्मेदारी लेने से भी इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने "हमारे सामने रास्ते बंद कर दिए हैं।" उन्होंने इस नाकेबंदी को "ईरान के रास्ते बंद होने पर एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया" बताया। उनका मानना है कि इस संकट को ताकत के बजाय बातचीत से सुलझाया जा सकता है। अगर बातचीत से युद्ध खत्म होता है, तो कमर्शियल जहाजों के लिए जलमार्ग फिर से खोल दिया जाएगा।
पेजेशकियन ने अमेरिका को इस संघर्ष में "हमलावर" बताया और कहा कि ईरान ने "200 सालों में किसी भी देश पर हमला नहीं किया है।" उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने यह सोचकर क्षेत्रीय देशों को युद्ध में घसीटा है कि ईरानी सिस्टम "कुछ ही दिनों में ढह जाएगा।"
ट्रंप ने ठुकराया ईरान का प्रस्ताव
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के 7 दिन के सीजफायर प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा, "मैं इस समझौते को खारिज करता हूं। वे एक ऐसा समझौता चाहते हैं जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोल दिया जाए, क्योंकि वे बुरी तरह से विफल हो रहे हैं।"
ट्रंप की विनाश की धमकी और शांति प्रस्ताव को ठुकराने के बाद भी ईरानी मजबूती से डटे हुए हैं। ऐसे में, अमेरिका के मिड-टर्म चुनाव (mid-term elections) खत्म होने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका है।