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लाखों का पैकेज, विदेश की नौकरी छोड़ फौज में जाकर कमाया नाम; अब IIM से MBA कर रहे कैप्टन अमर

July 23, 2026

Jul 23, 2026 11:18 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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आईआईटी मंडी से पढ़कर एलएंडटी का शानदार कॉर्पोरेट पैकेज छोड़ने वाले कैप्टन अमर सिन्हा यादव ने पहले इंडियन आर्मी में देश की सेवा की और अब आईआईएम कलकत्ता से मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहे हैं।

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कैप्टन अमर

हमारे समाज में कामयाबी की एक बहुत ही सीधी सी तस्वीर बनी हुई है। देश के किसी बड़े और नामी इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग की डिग्री लो, किसी मल्टीनेशनल कंपनी में लाखों का पैकेज क्रैक करो, और फिर आराम से किसी विदेशी शहर में सैटल हो जाओ। ज्यादातर युवाओं का यही सपना होता है और वो इसी रास्ते पर आंख मूंदकर चलते भी हैं। लेकिन क्या होता है जब ये सब कुछ हासिल करने के बाद भी अंदर से वो सुकून ना मिले जिसकी आपको तलाश थी? कैप्टन अमर सिन्हा यादव की कहानी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने वो सब कुछ पा लिया था जिसके लिए लोग दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन फिर उन्होंने अपनी जिंदगी की गाड़ी का गियर ऐसा बदला कि हर कोई बस देखता रह गया। आईआईटी से लेकर L&T की कॉर्पोरेट नौकरी, फिर वहां से इंडियन आर्मी की वर्दी और अब आईआईएम कलकत्ता तक का उनका ये सफर किसी भी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।

साल 2017 की बात है। अमर ने आईआईटी मंडी से अपनी बीटेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पूरी की। पढ़ाई खत्म होते ही उनके हाथ में एक शानदार ऑफर था। उन्हें लार्सन एंड टुब्रो यानी L&T जैसी दिग्गज कंपनी में सीनियर इंजीनियर की नौकरी मिल गई। पोस्टिंग भी भारत में नहीं, बल्कि यूएई में थी, जहां वो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे थे। पैसा, रुतबा और इंटरनेशनल एक्सपोजर सब कुछ उनके पास था। ये वो मुकाम था जहां पहुंचकर ज्यादातर लोग आराम की सांस लेते हैं और अपनी जिंदगी सेट मान लेते हैं।

लेकिन अमर के अंदर कुछ था जो लगातार बेचैन था। सब कुछ सही होने के बावजूद उन्हें लग रहा था कि जिंदगी में कुछ तो कमी है। उन्होंने खुद महसूस किया कि दिन भर एक ही डेस्क पर बैठकर काम करने से उनका वजन बढ़ रहा था और आंखों की रोशनी भी कमजोर हो रही थी। उनके माता-पिता चाहते थे कि वो इसी स्टेबल और सुरक्षित करियर में आगे बढ़ें, जो कि किसी भी मिडिल क्लास परिवार की पहली चाहत होती है। मगर अमर का मन तो कहीं और ही उड़ान भरने को बेताब था। उन्हें सिर्फ एक अच्छी सैलरी नहीं, बल्कि फिटनेस, एक बड़ी ज़िम्मेदारी और देश की सेवा करने का जज्बा चाहिए था। अपने इस फैसले पर बात करते हुए उन्होंने एक बार कहा था कि फौज ही वो इकलौती जगह है जहां आपको फिट रहने के पैसे मिलते हैं, भरपूर सम्मान मिलता है और दुनिया की सबसे बेहतरीन टुकड़ियों को लीड करने का मौका मिलता है। बस फिर क्या था, उन्होंने उस आरामदायक कॉर्पोरेट दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।

इंजीनियर से एक जांबाज आर्मी ऑफिसर तक का सफर

साल 2019 में अमर ने इंडियन आर्मी जॉइन कर ली। कॉर्पोरेट के एसी ऑफिस से निकलकर देश के सबसे मुश्किल और कड़े मिलिट्री ट्रेनिंग प्रोग्राम को पास करना कोई बच्चों का खेल नहीं था। लेकिन उन्होंने ये कर दिखाया और एक कॉम्बैट इंजीनियर ऑफिसर के तौर पर कमीशन हुए। फौज में उनकी जिम्मेदारियां सिर्फ टेक्निकल इंजीनियरिंग तक ही सीमित नहीं रहीं। उन्होंने एक इंजीनियर टास्क फोर्स की कमान संभाली, जिसमें 120 से ज्यादा सैनिक और 200 से अधिक सिविलियन वर्कर शामिल थे। इस दौरान उन्होंने ऊंचे बर्फीले पहाड़ों से लेकर काउंटर-इंसर्जेंसी वाले खतरनाक इलाकों में काम किया। सड़कें बनाने, बर्फ हटाने, पानी की सप्लाई चालू करने और जवानों के लिए सुरक्षित ठिकाने बनाने जैसे बेहद अहम और जोखिम भरे काम उनकी टीम ने सफलतापूर्वक पूरे किए। एक कंपनी कमांडर के रूप में उन्होंने 100 से ज्यादा जवानों को ना सिर्फ ट्रेनिंग दी, बल्कि ऑपरेशन्स, लॉजिस्टिक्स और जवानों की भलाई का भी पूरा ख्याल रखा। साथ ही, अपनी रेजीमेंट के एडजुटेंट के तौर पर उन्होंने 700 से अधिक जवानों का एडमिनिस्ट्रेशन और अनुशासन भी बखूबी संभाला।

मोर्चे के अलावा भी निभाईं कई बड़ी जिम्मेदारियां

अमर का काम सिर्फ मिलिट्री ऑपरेशन्स तक ही नहीं रुका, बल्कि उन्होंने कई मोर्चों पर अपनी लीडरशिप साबित की। उन्होंने असम पुलिस कमांडो बटालियन के जवानों को जिंदा माइन हैंडल करने, बम डिस्पोजल की बारीकियों और असॉल्ट ब्रिज बनाने की कड़ी ट्रेनिंग दी। जब देश में बाढ़ का कहर आया, तो अमर ने नेशनल सिक्योरिटी के साथ-साथ आपदा प्रबंधन में भी फौज का रोल साबित किया। उन्होंने रेस्क्यू टीमों की कमान संभालते हुए कई जानें बचाईं। बाद में उन्हें एक और बड़ी जिम्मेदारी दी गई। केरल के तटीय इलाकों में 500 करोड़ रुपये से ज्यादा के रणनीतिक डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की प्लानिंग और तालमेल बिठाने वाले सब-डिवीजन का हेड उन्हें बनाया गया। इस काम में अलग-अलग सरकारी एजेंसियों और कोस्ट गार्ड के कई संस्थानों के साथ मिलकर काम करना शामिल था। ये सारे वो काम थे जिनमें भयंकर दबाव के बीच बिना किसी गलती के सही और सटीक फैसला लेना होता है।

अब IIM कलकत्ता है पड़ाव

फौज की वर्दी में 6 साल की शानदार सर्विस के बाद, अमर ने अब अपनी जिंदगी की एक नई शुरुआत की है। वो इन दिनों आईआईएम कलकत्ता के वन-ईयर एमबीए एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम का हिस्सा हैं। कई लोगों को लग सकता है कि ये फिर से एक बड़ा बदलाव है, लेकिन अमर के लिए मैनेजमेंट की ये पढ़ाई लीडरशिप से दूर जाना नहीं है, बल्कि उसी लीडरशिप को एक नया और आधुनिक रूप देना है। उनके पास इंजीनियरिंग, मिलिट्री लीडरशिप, इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट और बड़े प्रोजेक्ट्स को संभालने का जो तगड़ा अनुभव है, उसे वो अब कॉर्पोरेट और ऑर्गनाइजेशनल लेवल पर नए तरीके से इस्तेमाल करना चाहते हैं।

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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