सावन के पावन महीने में मनाया जाने वाला हरियाली तीज का त्योहार दांपत्य जीवन में मिठास और खुशहाली का प्रतीक है। इस दिन सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं अखंड सौभाग्य और मनचाहे वर की कामना के साथ भगवान शिव व माता पार्वती का पूजन करती हैं।
Hariyali Teej Vrat Niyam : सावन का महीना आते ही चारों तरफ हरियाली और त्योहारों की रौनक छा जाती है। हाथों में रची मेहंदी, सुहाने झूले और पारंपरिक पकवानों के बीच हरियाली तीज का पर्व महिलाओं के लिए बेहद खास होता है।
इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन के लिए व्रत रखती हैं, वहीं कुंवारी कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं।
आइए जानते हैं कि इस दिन पूजा का समय क्या रहेगा, घर पर आसान विधि से पूजा कैसे करें और इस पर्व से जुड़ी खास परंपराएं क्या हैं।
हरियाली तीज की तिथि और समय
पंचांग के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 14 अगस्त की शाम 6:46 बजे से शुरू होकर 15 अगस्त की शाम 5:28 बजे तक रहेगी।
उदया तिथि के नियम अनुसार हरियाली तीज का पर्व और व्रत 15 अगस्त 2026 को ही मनाया जा रहा है। शाम को तृतीया तिथि समाप्त होने से पहले पूजा संपन्न करना शुभ माना जाता है।
घर पर कैसे करें शिव-पार्वती की पूजा?
हरियाली तीज की पूजा बहुत ही सरल और भावपूर्ण तरीके से की जा सकती है:
तैयारी और स्थापना: सुबह स्नान के बाद हरे या लाल रंग के साफ वस्त्र पहनें। घर के पूजा स्थल पर एक चौकी रखें और उस पर लाल या हरा कपड़ा बिछाएं। चौकी पर भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
गणेश वंदना: किसी भी शुभ कार्य की तरह सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें और उन्हें अक्षत, दूर्वा व पुष्प अर्पित करें।
शिव जी का अभिषेक: शिवलिंग या शिव प्रतिमा पर शुद्ध जल, कच्चा दूध, बेलपत्र, धतूरा और फूल चढ़ाएं।
माता पार्वती का श्रृंगार: माता पार्वती को सिंदूर, कुमकुम, अक्षत, हरी चूड़ियां, चुनरी और मेहंदी सहित सुहाग की सामग्री अर्पित करें।
भोग और मंत्र: फल, घेवर या घर की बनी मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ और माता पार्वती के मंत्रों का शांत मन से जप करें।
कथा और आरती: हरियाली तीज की पावन व्रत कथा पढ़ें या सुनें। अंत में आरती करके परिवार की सुख-शांति और पति की दीर्घायु का आशीर्वाद मांगें।
क्या है ‘सिंधारा’ और घेवर की परंपरा?
हरियाली तीज को कई क्षेत्रों में सिंधारा तीज या छोटी तीज भी कहा जाता है। इस अवसर पर नवविवाहित बेटियों के मायके से ससुराल ‘सिंधारा’ भेजने का रिवाज है।
सिंधारे में मुख्य रूप से घेवर, मठरी, तरह-तरह की मिठाइयां, हरी साड़ी, चूड़ियां और 16 श्रृंगार का सामान शामिल होता है। यह परंपरा दोनों परिवारों के बीच प्रेम, सम्मान और अपनापन बढ़ाने का सुंदर जरिया है।
व्रत और पूजा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
सेहत का रखें ख्याल: व्रत हमेशा अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही रखें। अगर आप निर्जला व्रत रखने में सहज नहीं हैं, तो फलाहार या जल लेकर भी व्रत पूर्ण किया जा सकता है।
सकारात्मक माहौल: इस त्योहार की मूल भावना उल्लास और भक्ति है। पूजा-अर्चना के बाद परिवार और सहेलियों के साथ तीज के पारंपरिक लोकगीत गाएं और झूले का आनंद लें।
श्रद्धा सबसे ऊपर: पूजा में महंगे सामान से ज्यादा जरूरी आपका निष्कपट भाव और संकल्प होता है। शांत चित्त से की गई प्रार्थना ही फलदायी होती है।