हरियाली तीज पर महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत के दौरान मन, वाणी और आचरण में संयम रखना जरूरी माना जाता है।
Hariyali Teej 2026
- Published: 15 Aug 2026, 09:19 AM IST
- Last Updated: 15 Aug 2026, 09:19 AM IST
सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। कई जगहों पर महिलाएं झूला झूलने, तीज के गीत गाने और सुहाग सामग्री से जुड़े पारंपरिक रीति-रिवाजों में भी हिस्सा लेती हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरियाली तीज के व्रत में सिर्फ पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि मन और व्यवहार में संयम रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। कुछ ऐसी बातें हैं, जिन्हें व्रत के दौरान करने से बचने की सलाह दी जाती है।
व्रत के दौरान मन को रखें शांत
हरियाली तीज पर व्रत रखने वाली महिलाओं को पूरे दिन शांत और सकारात्मक रहने की कोशिश करनी चाहिए। किसी से विवाद करना, गुस्सा करना या अपशब्द बोलना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करते हुए मन को शांत रखने की मान्यता है।
पूजा में रखें शुद्धता का ध्यान
पूजन के दौरान साफ और शुद्ध सामग्री का इस्तेमाल करना चाहिए। सुहाग सामग्री अर्पित करते समय टूटी या खराब वस्तुओं से बचने की धार्मिक मान्यता है। पूजा की सामग्री को श्रद्धा के साथ तैयार करना और शिव-पार्वती को विधि-विधान से अर्पित करना चाहिए।
कपड़ों के रंग को लेकर क्या मान्यता है?
हरियाली तीज के दिन हरे और लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। वहीं, कुछ धार्मिक परंपराओं में काले और सफेद रंग के कपड़ों से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, रंगों से जुड़ी मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती हैं।
तीज की कथा अधूरी न छोड़ें
हरियाली तीज की पूजा में व्रत कथा सुनने का भी विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता के अनुसार कथा को श्रद्धापूर्वक पूरा सुनना चाहिए। इसके बाद आरती कर भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण किया जाता है।
घर के बड़ों का सम्मान करें
धार्मिक परंपराओं में बड़ों का आशीर्वाद लेना शुभ माना जाता है। इसलिए पूजा के बाद घर के बुजुर्गों का सम्मान करें और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। व्रत के दौरान घर में सकारात्मक और शांत वातावरण बनाए रखना बेहतर माना जाता है।
नोट: ऊपर बताए गए नियम धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में हरियाली तीज की पूजा-पद्धति और व्रत के नियम अलग हो सकते हैं।